फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जिले का सबसे बड़ा सरकारी बीके सिविल अस्पताल, एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। यहां इलाज के लिए आने वाले हजारों गरीब मरीजों की जान से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल परिसर के भीतर, वह भी ओपीडी गेट के सामने, कथित तौर पर एक देसी नीम-हकीम महिला मरीज का इलाज करता पाया गया—और अस्पताल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बीके अस्पताल की ओपीडी के बाहर एक व्यक्ति एक महिला के पैर का इलाज कर रहा था। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने अपना नाम प्रदीप बताया और खुद को मूल रूप से कोलकाता का रहने वाला बताया। फिलहाल वह गोची के प्रतापगढ़ क्षेत्र में रह रहा है। उसने दावा किया कि यह उसका पुश्तैनी धंधा है और वह लंबे समय से इसी तरह लोगों का उपचार करता आ रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब उससे पूछा गया कि क्या उसके पास बीके अस्पताल या किसी भी स्वास्थ्य विभाग से इलाज करने की अनुमति है, तो उसने साफ कहा—’नहींÓ। इसके बावजूद वह सरकारी अस्पताल परिसर में मरीजों का इलाज करता मिला।
30 रुपये में इलाज का लालच इलाज करवा रही महिला शीला से जब बातचीत की गई तो उसने बताया कि उक्त व्यक्ति ने खुद को आयुर्वेदिक डॉक्टर बताया था। उसने महिला से कहा कि उसे चलने में दिक्कत है और वह सिर्फ 30 रुपये में तुरंत इलाज कर देगा। मजबूरी और भरोसे में आकर महिला इलाज के लिए तैयार हो गई। इसके बाद कथित नीम-हकीम ने महिला के पैर पर अलग-अलग तेल लगाए, कपड़े की रस्सी जैसी पट्टियां बनाकर पैर को कसना शुरू कर दिया। यह पूरा दृश्य बीके अस्पताल की ओपीडी के ठीक सामने घटित हुआ—जहां रोजाना डॉक्टर, नर्स, सुरक्षाकर्मी और अधिकारी आते-जाते रहते हैं।
पूछताछ होते ही हुआ फरार जब उस व्यक्ति से ज्यादा सवाल पूछे जाने लगे तो वह मौके से भाग निकला। यह घटना साफ दर्शाती है कि वह किसी भी प्रकार की कानूनी अनुमति या मेडिकल योग्यता के बिना इलाज कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए संवाददाता ने तुरंत सीएमओ को फोन किया, लेकिन सीएमओ ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद कार्यकारी पीएमओ को भी कॉल की गई, लेकिन वहां से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अंतत: अस्पताल की नर्सिंग ऑफिसर को सूचना दी गई। तब तक कथित नीम-हकीम फरार हो चुका था। हालांकि उसकी फोटो और वीडियो नर्सिंग अधिकारी को सौंप दी गई है। नर्सिंग अधिकारी ने आश्वासन दिया कि यदि वह व्यक्ति दोबारा अस्पताल परिसर में नजर आता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि जब सब कुछ कैमरे में कैद है, तब कार्रवाई कब होगी?
सरकारी अस्पताल में झोलाछाप इलाज:बड़ी लापरवाही या मिलीभगत? बीके अस्पताल में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में नीम-हकीमों का खुलेआम इलाज करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ भी है। वास्तव मेें जब डॉक्टर पैदा भी नहीं ह़ुए थे भारत में ऐसे ही नीम हकीम जनता का इलाज किया करते थे, लगता है कि आज फिर हम उसी ओर लौट कर जा रहे हैं।