एनआईटी तीन चौकी में नहीं दर्ज हुई मोटर चोरी की एफआईआर फऱीदबाद (मज़दूर मोर्चा) जाओ लाला जी, यहां दो-चार हज़ार रुपये वाली मोटर चोरी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती। अब पुलिस मोटर चोर को तलाशती फिरेगी क्या? एनआईटी तीन चौकी के मुंशी हेड कांस्टेबल जगदीश ने सोमवार सुबह मोटर चोरी की शिकायत दर्ज कराने एससी गोयल को यह कह कर लौटा दिया। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज दिखाया और केस दर्ज करने पर जोर दिया तो उनसे शिकायती पत्र लिखवा कर बिना रिसीविंग दिए चलता कर दिया।
एनआईटी तीन बी ब्लॉक निवासी एसएसी गोयल का मकान निर्माणााधीन है, वह पड़ोस के मकान में परिवार के साथ किराए पर रहते हैं। रात करीब साढ़े दस बजे कूड़ा बीनने वाला एक युवक उनके निर्माणाधीन घर में घुस गया, जबकि उसका दूसरा साथी बाहर आने जाने वालों पर नजर रखता रहा। करीब छह मिनट बाद युवक अंदर कुछ सामान लेकर निकला और झोले में डाल कर फरार हो गया। सुबह लिंटर सिंचाई के लिए मोटर चलानी चाही तो गायब थी। कोई तार काट कर मोटर उठा ले गया था। पड़ोस के सीसीटीवी कैमरे की जांच की तो कूड़ा बीनने वाले युवकों की करतूत नजर आई। इसके बाद उनका बेटा रिपोर्ट दर्ज कराने एनआईटी तीन चौकी पहुंचा, तो मुंशी जगदीश ने टरका दिया। युवक ने चौकी इंचार्ज से फोन पर बात की तो उन्होंने भी गोल मोल उत्तर देकर उसे लौटने की सलाह दे डाली।
सुशासन का ढिंढोरा पीटने वाले सीएम सैनी भले ही कहते फिरें कि थाने चौकी पर आने वाले हर पीडि़त की सुनवाई हो, उसकी शिकायत पर केस दर्ज कर जांच की जाए, सच्चाई ये है कि हर थाने-चौकी पर तैनात ‘जगदीश’ पीडि़तों को इसी तरह लौटा देते हैं। लौटाएं भी क्यों न सरकार इन्हें तनख्वाह केवल ड्यूटी करने की देती है न कि अपराधियों को पकडऩे की।
अपराधी को पकड़वाने की जिम्मेदारी तो पीडि़त पक्ष की होती है। उसे पुलिस का सहयोग करना होता है, जैसे, अपने खर्च पर वाहन, पेट्रोल-डीजल का इंतजाम करना, यात्रा के दौरान पुलिस टीम के खाने-पीने का खर्च उठाना और आराम का इंतजाम करना, आदि। अब दो-चार हज़ार रुपये की चीज़ की चोरी के लिए तो पीडि़त मोटा खर्च करेगा नहीं तो फिर उसकी रिपोर्ट दर्ज कर चौकी-थाने का रिकॉर्ड क्यों गंदा किया जाए। कम एफआईआर दर्ज होंगी तो सरकार भी खुश और पुलिस की भी सरदर्दी कम होगी। जानकारों का कहना है कि पुलिस केवल वही केस दर्ज करती है जिसमें मोटी कमाई की उम्मीद हो या केस खुलने पर गुडवर्क का तमगा मिले। यह सच भी किसी से छिपा नहीं है कि कमाई वाले थाने-चौकियों में पुलिसकर्मी आला अधिकारियों को चढ़ावा चढ़ा कर ही तैनाती हासिल करते हैं। जाहिर है कि ये पुलिसकर्मी तैनाती के साथ ही खुद की मोटी कमाई करने में जुट जाते हैं। लगता है कि एनआईटी तीन चौकी का मुंशी भी इन्हीं पुलिसकर्मियों में से एक है।
पुलिस का यह निठल्लापन दर्शाता है कि पुलिस आयुक्त ओपी नरवाल की महकमे और अपने मातहतों पर पकड़ नहीं है। अगस्त में पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने ऐलान किया था कि लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाना ही उनकी प्राथमिकता होगी, साथ ही अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस और आम लोगों के बीच तालमेल बनाने संकल्प जताया था। एनआईटी तीन चौकी पर पीडि़त से अभद्रता किए जाने की घटना से तो लगता है कि ओपी नरवाल पुलिस आयुक्त के रूप में अपनी प्राथमिकताएं ही महकमे से लागू नहीं करवा सके।