जनता के पैसे से निजी कॉलोनियों में सुविधा देगा नगर निगम

जनता के पैसे से निजी कॉलोनियों में सुविधा देगा नगर निगम
September 29 18:46 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम शहर की जनता को आधारभूत सुविधाएं देने में भले ही बुरी तरह फ्लॉप साबित हो रहा है लेकिन निजी बिल्डरों द्वारा विकसित कॉलोनियों में जनता की गाढ़ी कमाई से बेहतरीन सुविधाएं देने की तैयारी कर रहा है। दरअसल, कैबिनेट मंत्री राव नरबीर ने अगस्त में हुई ग्रीवांस कमेटी की बैठक में आदेश जारी किया था कि निजी बिल्डर बीपीटीपी कंपनी लिमिटेड द्वारा सेक्टर 75 से 89 के बीच विकसित चार कॉलोनियों में नगर निगम सारी सुविधाएं दे। उनके आदेश पर डायरेक्टरेट टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने निगमायुक्त को पत्र जारी किया है। पत्र के अनुसार बीपीटीपी लिमिटेड द्वारा वर्ष 2005 से 2024 के बीच जारी 18 लाइसेंस के आधार पर सेक्टर 75 से 89 में विकसित की गई कॉलोनियों को जहां हैं जैसी हैं के आधार पर नगर निगम को हैंडओवर करने का निर्णय लिया गया है। निगमायुक्त से अपेक्षा की गई है कि वह इन कॉलोनियों में सड़क, पार्क, स्वास्थ्य सेवाएं और ओपन स्पेस आदि नागरिक सुविधाओं का रखरखाव की सहमति दें ताकि सरकार इस प्रस्ताव को लागू कर सके।

जानकार इसे नेता-बिल्डर और नौकरशाहों के गठजोड़ का बेहतरीन नमूना बता रहे हैं जिसमें प्लॉट-फ्लैट बेचकर मोटा मुनाफा वसूल कर बिल्डर उसका एक हिस्सा नेताजी और नौकरशाहों को पेश करता है। इसके बदले नेता व नौकरशाह बिल्डर को मुफ्त में या कौडिय़ों के दाम पर सैकड़ों करोड़ की सुविधाएं उपलब्ध कराते हैँ। जानकारों के अनुसार बीपीटीपी बिल्डर ने 1177 एकड़ में विकसित कॉलोनियों से कई हजार करोड़ रुपये बनाए। जैसा कि इस तरह की कॉलोनियों में होता है कि फ्लैट-प्लॉट तो बेच दिए गए लेकिन वीआईपी इलाक़ों को छोड़ कर बाकी में सड़क, स्ट्रीट लाइट, नाली, खड़ंजा, सीवर आदि की मानक के अनुसार व्यवस्था न कर कई सौ करोड़ रुपये डकारे जाते हैंं। स्प्रिंग फील्ड, सैनिक कॉलोनी आदि उदाहरण हमारे सामने हैं। बीपीटीपी की कॉलोनियों में भी यही खेल किया गया है।

इसके बाद बिल्डर की पिट्ठू आरडब्ल्यूए आधारभूत सुविधाएं दिलाने के लिए नेताओं और अधिकारियों के चक्कर लगाती है। इधर बिल्डर भी नेताओं को मोटा वोट बैंक होने की लालच के साथ कॉलोनी में एक दो बढिय़ा प्लॉट नजराने के रूप में देने के एवज में कॉलोनी नगर निगम को हस्तांतरित करने की मांग करता है। नेता के बाद दूसरी बाधा नौकरशाह पैदा करते हैं तो बिल्डर उन्हें भी एक आध फ्लैट दान देकर ऊपर से नीचे तक सेटिंग बैठाता है।

इसके बाद कॉलोनी को बाकायदा नगर निगम को हैंडओवर करने का खेल किया जाता है। सैनिक कॉलोनी इसका एक उदाहरण है नगर निगम में इसे शामिल करने के लिए ईडीसी-आईडीसी शुल्क के करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये वसूले जाने थे लेकिन पूर्व सीएम खट्टर ने इस शुल्क की वसूली टाल दी जो आज तक नहीं की जा सकी है। इसी तरह का खेल बीपीटीपी की कॉलोनियों में किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन कॉलोनियों को नगर निगम में शामिल कराने के लिए भूमाफिया मंत्री राजेश नागर भी सक्रिय है, राव नरबीर तो पहले ही इसके आदेश जारी कर चुके हैं। जब सरकार की मंशा है तो सत्ता के चरणों में लोट लगाने वाले निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा जैसों की क्या औकात कि वह ईडीसी-आईडीसी शुल्क वसूली की शर्त रख दे। जो बिल्डर नेताओं को राजी कर चुका है उसके लिए नौकरशाहों को मनाना कुछ मुश्किल नहीं होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही ये कॉलोनियां नगर निगम में शामिल कर ली जाएंगी।

जानकार बताते हैं कि करीब 1177 एकड़ में विकसित की गई इन कॉलोनियों को जहां है जैसा है के आधार पर नगर निगम को इसलिए सौंपा जा रहा है कि बिल्डर ने सड़क, जल निकासी, पेयजल आपूर्ति, सीवर आदि आधारभूत सुविधाएं दी ही नहीं हैं, यानी हस्तांतरण के बाद निगम को ये सारी आधारभूत सुविधाएं देनी पड़ेंगी। समझने वाली बात यह है कि सैनिक कॉलोनी की तरह यहां भी बिल्डर ने प्लॉट-फ़्लैटधारकों से ईडीसी-आईडीसी शुल्क वसूल कर रखा है लेकिन ये सुविधाएं मानक के अनुरूप विकसित नहीं की गई हैं। यानी नगर निगम को ये सारी सुविधाएं जनता की गाढ़ी कमाई से वसूले गए कर की राशि से देनी पड़ेंगी।

जो नगर निगम शहर में नाली, पानी, सड़़क, स्ट्रीट लाइट, सीवर की व्यवस्था न कर सकी वो इन अविकसित कॉलोनियों में क्या करेगी आसानी से समझा जा सकता है। हां, यह जरूर है कि हरामखोर अधिकारियों के लिए इन कॉलोनियों में विकास के मोटे प्रोजेक्ट बना कर लूट कमाई के रास्ते खुल जाएंगे।

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles