जब ऑपरेशन ही नहीं होंगे तो थियेटर बनाने पर क्यों करें धन बर्बाद

जब ऑपरेशन ही नहीं होंगे तो थियेटर बनाने पर क्यों करें धन बर्बाद
December 09 12:33 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) तिगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रोगियों की सर्जरी के लिए ऑपरेशन थियेटर बनाया जाएगा। इस ओटी के लिए नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन एनटीपीसी ने दो ऑपरेशन टेबल और ओटी लाइट दी हैं। ओटी का प्रबंध स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जाएगा। ऑपरेशन थियेटर बन तो जाएगा लेकिन वहां ऑपरेशन करने के लिए डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं होंगे और अगर ऑपरेशन हो गया तो बिना सपोर्टिंग स्टाफ के मरीजों की देखभाल नहीं हो सकेगी। यानी तिगांव सीएचसी में सीएसआर फंड के तहत दिया जाने वाले चिकित्सा उपकरण धूल ही फांकेंगे और उनका देर सबेर कबाड़ा बनना तय है, मरीजों को कुछ लाभ मिलने की जरा भी उम्मीद नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार तिगांव सीएचसी में एक सीनियर मेडिकल ऑफिसर व तीन मेडिकल ऑफिसर के पद हैं। रिकॉर्ड में तो यह चारों पद भरे हुए हैं। एसएमओ पद पर डॉ. हरीश आर्य तैनात हैं, तीन एमओ हैं डॉ. मयंक, डॉ. हितेश और डॉ. स्नेहलता। कहने को तो ये तीनों तिगांव सीएचसी में हैं लेकिन डॉ. मयंक डेप्युटेशन पर सीएमओ कार्यालय में काम कर रहे हैं। डॉ. हितेश बल्लभगढ़ सरकारी अस्पताल में और डॉ. स्नेहलता यूपीएचसी भारत कॉलोनी संभाल रही हैं। यदि डॉ. स्नेहलता लौटती हैं तो यूपीएचसी भारत कॉलोनी पर ताला लग जाएगा क्योंकि वहां कोई स्टाफ नहीं है।

डॉ. हितेश को भी बल्लभगढ़ इसीलिए लगाया गया है कि वहां भी चिकित्सक की कमी है। डॉ. मयंक सीएमओ साहब के यहां बाबूगीरी कर रहे हैं। अकेले एसएमओ डॉ. हरीश आर्य ओपीडी देखेंगे, मरीजों को संभालेंगे या ऑपरेशन करेंगे। सुधी पाठक जानते हैं कि सीएचसी में अधिकतर स्त्री एवं प्रसूति रोग, सामान्य एवं सीजेरियन प्रसव वाले केस पहुंचते हैं, समझा जा सकता है कि शहर के किसी भी सीएचसी में महिला चिकित्सकों की कमी के कारण सामान्य प्रसव की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है तो सीजेरियन की बात ही क्या की जाए। तिगांव सीएचसी में ऑपरेशन थियेटर बना भी दिया गया तो भी वहां ये सुविधाएं शुरू होने की दूर दूर तक कोई संभावना नहीं है।

यह तो बात रही मेडिकल स्टाफ की, तिगांव सीएचसी में नर्सिंग स्टाफ भी पूरा नहीं है। सबसे बड़ी बात सपोर्ट स्टाफ की भरपूर कमी है जिसके बिना 30 बेड का अस्पताल चलाया जाना नामुमकिन है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार सीएचसी के लिए एचकेआरएन के तहत 30 सपोर्ट स्टाफ के पद हैं लेकिन तैनात केवल तीन हैं। सपोर्ट स्टाफ अस्पताल में सफाई, सैनिटेशन, पोंछा, शौचालय, बेड की सफाई, चादर बदलने आदि काम के साथ मरीजों को शौच, सफाई आदि सेवाएं देते हैं।

ऑपरेशन थियेटर में भी इनकी जरूरत पड़ती है। केवल तीन सपोर्ट स्टाफ तो साफ सफाई का काम पूरा नहीं कर पाएगा, मरीज और ओटी में सेवाएं देना तो भूल ही जाएं। सीएचसी में केवल एक सिक्योरिटी गार्ड है जो 24 घंटे तैनात नहीं रह सकता। बिना गार्ड के स्टाफ नर्स दिन में ड्यूटी करने से घबराती हैं तो रात में ड्यूटी देने की बात छोड़ ही दी जाए। इन हालात में भी बताया जा रहा है कि ओटी तैयार होने के बाद वहां सबसे पहले नसबंदी के ऑपरेशन किए जाएंगे। इसके बाद मोतियाबिंद लेंस प्रत्यारोपण, सीजेरियन ऑपरेशन भी किए जाएंगे।

स्वास्थ्य विभाग की घोषणा ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। 80 हजार से 1 लाख 20 हजार आबादी पर बनने वाले एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में माइनर ऑपरेशन, प्रसव की सुविधा के साथ 30 बेड की आईपीडी होती है। घोषणा से यह तो तय हो गया कि तिगांव में अभी तक ऑपरेशन थियेटर ही नहीं था। जब एनटीपीसी ने दो ऑपरेशन टेबल और दो ओटी लाइट देने को कहा तो अब वहां आपरेशन थियेटर बनवाया जाएगा। बनाने का उद्देश्य केवल कमीशनखोरी ही न रह जाए। शहर के अन्य पीएचसी, सीएचसी, यूपीएचसी की हालत देख कर तो कमीशनखोरी से इनकार भी नहीं किया जा सकता।

सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि जब जिले में पर्याप्त चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ ही नहीं है तो फिर थियेटर और इमारतें बनाने से क्या फायदा। फायदा तो इन इमारतों, कमरों को बनवाने से कमीशनखोरों को होगा न कि आम जनता को। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने डेढ़ साल पहले करोड़ों रुपये की बंदरबांट कर मेवला महाराजपुर में तीन मंजिला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनवा डाला लेकिन उसमें ऑपरेशन तो छोड़ो ओपीडी भी फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही है। जब केंद्रीय मंत्री अपना सीएचसी ठीक से नहीं चलवा पा रहे तो जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों का हाल समझा जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार खेड़ी कलां, कौराली, पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी ऑपरेशन थियेटर नहीं है। यह मोदी-खट्टर-सैनी की डबल इंजन की सरकारों द्वारा बीते दस वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं में की गई तरक्की का नमूना है। दावे तो बड़े बड़े किए गए, जनता को दिखाने के लिए नई नई सीएचसी पीएचसी और यूपीएचसी भी बना कर तैयार कर दी गईं लेकिन इलाज किसी में नहीं दिया जा पा रहा है। ये तो खैर प्राथमिक स्तर के अस्पताल हैं, बीके जैसे द्वितीय स्तर के अस्पताल जिस पर पूरे जिले का बोझ है वह भी विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में केवल रेफरल सेंटर बना हुआ है। तृतीयक सेवा देने वाले छांयसा के मेडिकल कॉलेज के तो पूछने ही क्या, जब से सरकार ने इसे अपने हाथ में लिया है ओपीडी भी ठीक से नहीं चला पाई है। ऑपरेशन, आईसीयू जैसी विशेष सेवाएं तो दूर रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी जैसी आधारभूत चिकित्सा सेवाएं भी यहां उपलब्ध नहीं हैं। मेडिकल विद्यार्थियों के पढऩे की भी कोई व्यवस्था नहीं है।

तिगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एनटीपीसी द्वारा ऑपरेशन थियेटर के लिए दिया जाने वाला सामान भी सफेद हाथी न साबित हो इसके लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग क्या उपाय करेंगे यह जून तक सामने आ जाएगा, जैसा कि एसएमओ डॉ. हरीश आर्या के अनुसार जून तक स्वास्थ्य केंद्र में ऑपरेशन शुरू हो जाने की घोषणा की गई है।

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Mazdoor Morcha
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