फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हूडा के रिश्वतखोर अधिकारी और हरामखोर बिल्डर मनमोहन सिंह पुरी ने मिलीभगत कर धोखाधड़ी से एक बुजुर्ग विधवा के दो बेशकीमती प्लॉटों को बेच डाला। महिला की प्रॉपर्टी बेचने के लिए मनमोहन सिंह पुरी ने बाकायदा ऑनलाइन आवेदन किया। किसी भी प्रॉपर्टी की डीलिंग में सारे दस्तावेज, कील-कांटे दुरुस्त होने के बावजूद अड़ंगे लगाने वाले हूडा के अफसरों ने इन विवादित प्लॉटों का फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आनन-फानन हस्तांतरण करने का फरमान जारी कर दिया। एक करोड़ रुपये मिल रहे हों तो किसका ईमान नहीं डोल जाए, हूडा के अधिकारियों-कर्मचारियों को तो हरामखोरी की आदत ही पड़ी हुई है।
वर्ष 1974 में सेक्टर आठ स्थित प्लॉट नंबर 1535 और 1537 को हूडा ने दरियागंज दिल्ली निवासी मनमोहन सिंह पुरी के नाम अलॉट किया था, उन्होंने हूडा में इन दोनों प्लॉट्स की पूरी कीमत भी चुका दी थी। इन प्लॉटों पर उन्हें 1994 में हूडा ने कब्जा भी दे दिया था।
मनमोहन सिंह ने सेक्टर 16 निवासी कृष्ण कुमार गौरी को साल 2003 में ये दोनों प्लॉट बयाना लेकर बेच दिए थे, दोनों के बीच बाकायदा कन्वेयंस डीड और सेल एग्रीमेंट हुआ था। इसके बावजूद मनमोहन सिंह ने यह कहते हुए प्लॉटों के ट्रांसफर कराने से इनकार कर दिया था कि प्लॉटों की बाजार की कीमत काफी बढ़ चुकी है। इस पर कृष्ण कुमार ने 2004 में सिविल कोर्ट में केस दायर किया था। केस न्यायालय में विचाराधीन था इसी दौरान 31 मार्च 2008 को हूडा ने निर्माण नहीं होने के चलते दोनों प्लॉट रिज्यूम कर लिए। चार फरवरी 2011 को एडीजे फरीदाबाद कोर्ट ने कृष्ण कुमार के हक में फैसला सुनाया। कोर्ट के फैसले के अनुसार प्लॉटों की जो रकम मनमोहन सिंह को दी जानी थी वह कोर्ट द्वारा गौरी से लेकर ट्रेजरी में जमा करवा दी और कोर्ट से कारिंदा भेज कर बल्लबगढ़ तहसील में दोनों प्लॉटों की रजिस्ट्री कृष्ण कुमार गौरी के नाम करवा दी गई।
केस जीतने के बाद कृष्ण कुमार ने हूडा में प्लॉट उनके नाम ट्रांसफर किए जाने का आवेदन किया लेकिन रिज्यूम होने के कारण मामला लटक गया। साल 2013 में हूडा की पॉलिसी आई कि जो प्लॉट निर्माण नहीं किए जाने के कारण रिज्यूम किए गए हैं उनके मालिकों से एक्सटेंशन फीस लेकर रिजम्शन रद्द कर दी जाए। पॉलिसी के तहत कृष्ण कुमार ने प्लॉट ट्रांसफर किए जाने का दोबारा आवेदन किया लेकिन बेशकीमती प्लॉटों के लिए मोटा शुकराना चाह रहे अधिकारी आवेदन को लटकाए रहे। 23 अप्रैल 2017 को कृष्ण कुमार की मृत्यु हो गई। कनाडा में रहने वाले उनकी बेटी और बेटे को प्लॉटों की जानकारी नहीं थी। पति की मृत्यु से टूट चुकीं सुनीता गौरी से प्लॉटों के दस्तावेज इधर उधर हो गए। 2022 में उनके हाथ प्लॉटों से संबंधित कुछ दस्तावेज लगे। इसके बाद उन्होंने हूडा में आरटीआई लगा लगा कर प्लॉटों के बाकी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी प्राप्त कर लीं।
सारे दस्तावेज जमा कर वह तत्कालीन हूडा एडमिनिस्ट्रेटर से मिलीं और प्लॉट उनके नाम रिस्टोर किए जाने का आवेदन किया। एडमिनिस्ट्रेटर ने केस पंचकूला स्थित मुख्यालय में चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के पास स्वीकृति के लिए भेज दिया। एडमिनिस्ट्रेर ने इसके बाद कई रिमाइंडर भेजे लेकिन जवाब नहीं आया। अंत में आठ जुलाई 2024 को भेजे गए रिमाइंडर पर चीफ एडमिनिस्ट्रेटर का जवाब आया कि इन प्लॉटों का ई ऑक्शन किया जाए। फरीदाबाद जोन के लिए 9 नवंबर 2024 को ई ऑक्शन होना था। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट में सिविल रिट पिटिशन दायर कर दी। 12 नवंबर 2024 को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अरुण पिल्लई व जस्टिस विक्रम अग्रवाल ने इसका जवाब देने के लिए 8 जनवरी 2025 को हूडा अधिकारियों को तलब किया है।
सुनीता गौरी न्यायालय के चक्कर काट रही थीं इसी दौरान मनमोहन पुरी ने फर्जी दस्तावेज लगा कर दोनों प्लॉट क्षमा अरोड़ा और कलावती को बेच दिए और बल्लबगढ़ तहसील में रजिस्ट्री करा दी। रजिस्ट्री की कॉपियां हूडा में लगाकर प्लॉट दोनों खरीदारों के नाम ट्रांसफर करने का आवेदन किया। विवादित और चर्चित प्लॉट होने के बावजूद हूडा के रिश्वतखोर अफसरों ने प्लॉट क्रमश: क्षमा अरोड़ा को 15 अक्तूबर 2024 और कलावती को 24 अक्तूबर 2024 को ट्रांसफर किए जाने की स्वीकृित दे दी। सुनीता गौरी ने और जानकारी हासिल की तो पता चला कि मनमोहन सिंह पुरी ने ही इन प्लॉटों के ट्रांसफर के लिए हूडा की सिंगल विंडो पर आवेदन किया था। आवेदन होते ही डीलिंग क्लर्क, डीलिंग असिस्टेंट हनुमान प्रसाद, सेक्टर 8 के जेई नरेश कुमार ने आनन फानन सारी रिपोर्ट आदि लगाकर फाइल डिप्टी सुपरिंटेंडेंट सुमेर और हूडा अकाउंट ऑफिसर सुशीला को भेज दी। सीधे काम में नुक्स निकाल कर अटकाने में माहिर इन अधिकारियों ने भी जल्दी जल्दी सारी औपचारिकताएं पूरी कर एस्टेट अधिकारी सिद्धार्थ दहिया एचसीएस और एडमिनिस्ट्रेटर आनंद शर्मा आईएएस से भी स्वीकृति दिलवा दी।
हूडा सूत्रों के अनुसार कृष्ण कुमार गौरी की दो प्लॉटों के विवाद की जानकारी चपरासी से लेकर एडमिनिस्ट्रेटर तक सबको अच्छी तरह से है। बावजूद इसके अधिकारियों ने मिलीभगत कर ट्रांसफर की स्वीकृति दी और बल्लभगढ़ तहसील के सब रजिस्ट्रार ने आंखें बंद कर रजिस्ट्री भी करवा दी। सुनीता गौरी का आरोप है कि इस सारे काम के लिए एक करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई इसके बाद ही प्लॉटों के फाइनल ट्रांसफर लेटर जारी किए गए।
सर्वविदित है कि ‘हूडा’ महकमा रिश्वतखोरी एवं धोखाधड़ी के माध्यम से जनता की लूट का एक बड़ा अड्डा बन चुका है। शायद ही कोई दिन जाता होगा जिस दिन इसके कार्यालयों में आम जनता को लूटा न जाता हो, उपरोक्त मामला तो चूल्हे पर चढ़ी हांडी का एक चावल मात्र ही है। इस मामले में क्लर्क से लेकर एस्टेट आफिसर, एडमिनिस्ट्रेटर व चीफ एडमिनिस्ट्रेटर तक के तमाम अधिकारी धोखाधड़ी करके श्रीमती गौरी को लूटने के दोषी नजर आ रहे हैं। इन अधिकारियों के हौसले इतने बढ़ चुके हैं कि मामला न्यायपालिका में लंबित होने के बावजूद बेखौफ होकर धोखाधड़ी करवाने में जुटे हुए हैं यानी ये लोग न्यायपालिका को भी कुछ नही समझते। समझें भी क्यों, जब उन्हें विश्वास है कि न्यायालयों में बरसों तक मुकदमे के घिसटते रहने के बावजूद भी उनका कुछ बिगडऩे वाला नहीं है।
धोखाधड़ी का स्पष्ट मामला देखते हुए पीडि़ता ने डीजीपी, सीपी, डीसीपी व एसएचओ तक के सभी अधिकारियों को इस मामले में बजरिया दरख्वास्त समुचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। इसके फलस्वरूप तफ़्तीश हेतु मामला सेक्टर आठ की पुलिस चौकी के एएसआई अजय कुमार के पास पहुंच गया है। अब देखने वाली बात यह है कि तफ़्तीशी एएसआई साहब इसे लेनदेन का साधारण मसला बता कर रफा दफा कर देते हैं अथवा धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला मानकर भारतीय दंड संहिता की धाराओं में एफआईआर दर्ज करके संबंधित फाइलों को कब्जा पुलिस में लेकर दोषियों की पहचान सुनिश्चित करते हैं।