क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा शिक्षा को गऱीब-गुरबों की पहुंच से बाहर करने के लिए, मोदी सरकार कई तरीक़ों का इस्तेमाल कर रही है. उनमें से एक है; आर्थिक रूप से कंगाल हो चुके मज़दूरों, किसानों के बच्चों को मिलने वाले वजीफों को ख़त्म कर दो, इनके बच्चे, उच्च शिक्षा से अपने आप महरूम हो जाएंगे!! गऱीब और मेधावी छात्रों को मिलने वाली सरकारी आर्थिक मदद के तौर-तरीक़े बदलकर, केंद्र की मोदी सरकार तथा राज्य सरकारें, जाने कितने छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों से बाहर कर, उनके घर भेज चुकी है. ‘चौधरी चरणसिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार’ में, सरकार का यह दांव उल्टा पड़ गया. अपनी छात्र वृत्तियों को बचाने के लिए, इस प्रतिष्ठित संस्थान के सैकड़ों छात्रों ने ज़बरदस्त आंदोलन चलाया और सरकार को पीछे हटने को मज़बूर किया. रिपोर्ट लिखे जाने तक,हालाँकि, छात्रों द्वारा आंदोलन वापस लेने की घोषणा नहीं हुई है.
हिसार कृषि विश्वविद्यालय में एम एस-सी कोर्स के लिए, 30त्न छात्रों का दाखला, ‘इंडियन कौंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च’ द्वारा ली जाने वाली परीक्षा, ‘आल इंडिया एंट्रेंस एग्जाम फॉर एडमिसन’ के ज़रिये, तथा 70त्न छात्रों का दाखला, विश्वविद्यालय द्वारा ली जाने वाली परीक्षा से होता है. इन सभी छात्रों को रु 3,000 प्रति माह वज़ीफ़ा मिलता है. जो छात्र, एम एस-सी की परीक्षा में 75त्न या उससे भी अधिक नंबर लाते हैं, उन्हें रु 6,000/ प्रति माह ‘मेरिट स्कालरशिप’ भी मिलती है. सरकार ने ‘मेरिट स्कॉलरशिप’ के हक़दार 25त्न छात्रों को आर्थिक मदद बंद करने का प्रपंच रचा था. विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि देश भर में ऐसा ही हो रहा है. कुछ छात्रवृत्तियां सरकार देती है, और कुछ को विश्वविद्यालय के ‘विवेक’ पर छोड़ दिया जाता है. प्रबंधन का विवेक कहता है कि मेरिट स्कालरशिप बंद कर दी जाए!! हमने जो क़दम उठाया है उससे 140 छात्रों को पैसे नहीं मिलेंगे, लेकिन विश्वविद्यालय के 2.5 करोड़ रु बचेंगे, यह भी तो देखिए!! छात्रों के विवेक ने, लेकिन, विश्वविद्यालय के विवेक से मेल नहीं खाया, और उन्होंने विवेकपूर्ण फ़ैसला लिया की आप हमें शिक्षा से महरूम नहीं कर सकते. कैम्पस की लड़ाई सड़क पर आ गई.
10 जून को विश्वविद्यालय में जो हुआ वह भयानक था. छात्र नेता, दीपांशु द्वारा पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक़, सुबह 10.15 बजे,जब छात्र, उपकुलपति के दफ़्तर के सामने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, वीसी अपनी कार में वहां पहुंचे. रजिस्ट्रार पवन कुमार, प्रोफ़ेसर राधे श्याम तथा मुख्य सुरक्षा अधिकारी,सुखबीर सिंह, सुरक्षा गार्डों तथा कथित बौंसरों ने मिलकर छात्रों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं. कम से कम 8 छात्र जख़़्मी हुए. पुलिस की प्रारंभिक जांच में ये बात सही पाई गई, क्योंकि एफ़आईआर उसके बाद ही दजऱ् होती है. 14 तारिख को पुलिस ने प्रोफ़ेसर राधेश्याम को गिरफ्तार कर लिया तथा रजिस्ट्रार पवन कुमार, मुख्य सुरक्षा अधिकारी समेत 8 को आरोपी बनाते हुए, एफ़आईआर दजऱ् हो गई. अब मामला गंभीर हो गया. जो छात्र अपनी कक्षाओं में थे, वे भी सड़क पर आ गए. इसके बाद छात्रों ने ऐलान किया कि विश्वविद्यालय के उपकुलपति, बी आर कंबोज को बर्खास्त करने और 10 जून को छात्रों के सर फोडऩे वाले गुंडों को सज़ा मिलने तक, यह आंदोलन ज़ारी रहेगा. एम एस-सी फाइनल में पढ़ रहीं, छात्र नेता, पूजा ने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो 27 जून को विश्वविद्यालय के गेट पर ज़बरदस्त प्रदर्शन होगा, किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया जाएगा. साथ ही विश्वविद्यालय के इर्द-गिर्द सड़कों पर चक्का जाम किया जाएगा. विश्वविद्यालय प्रबंधन तथा हरियाणा पुलिस-प्रशासन ने जितना दमन किया, छात्र आक्रोश उतना ही बढ़ता गया. हरियाणा के सभी मज़दूर संगठन, संयुक्त किसान मोर्चा छात्रों के साथ आ गए.
छात्रों का कहना है कि जहाँ कहीं भी गऱीब मेहनतक़शों के बच्चों को आर्थिक मदद मिलनी होती है, उसी जगह सरकारी खजाना ख़ाली होने का रोना क्यों रोया जाता है. धन्नासेठों को मदद देनी हो, बड़े कजऱ्दारों की कज़ऱ् माफ़ी करनी हो, कॉर्पोरेट करों में छुट देनी हो; तब सरकारी खज़ाने पर असर क्यों नहीं पड़ता? हरियाणा ही नहीं, बल्कि देश भर के किसान-मज़दूर संगठनों का समर्थन जब, छात्रों के न्यायोचित आंदोलन को मिलने लगा, 24 जून को एक ज़बरदस्त महापंचायत हुई, संयुक्त किसान मोर्चा खुलकर छात्रों के समर्थन में आ गया और तेज़ बारिश में भी जब छात्र युनिवेर्सिटी के गेट से नहीं हटे, तो प्रबंधन के विवेक ने उसे समझाया; पीछे हट जाओ!! देशभर के छात्र उखड़ गए, तो, लेने के देने पड़ जाएंगे, शिक्षा का बेड़ा गकऱ् करने की सरकारी परियोजना का भांडा फूट जाएगा. चंडीगढ़ ट्रिब्यून के मुताबिक़, 30 जून को तड़के ही, विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारी डॉ राजबीर गर्ग, छात्रों के सामने उपस्थित हुए और बहुत विनम्र अंदाज़ में बोले; युनिवेर्सिटी ने ‘मेरिट स्कालरशिपÓ में कटौती का फ़ैसला पलट दिया है. आप लोग यह सड़क पर क्यों बैठे हैं. अपनी क्लास में क्यों नहीं जाते!! छात्रों की औपचारिक प्रतिक्रिया का पता नहीं चल पाया लेकिन प्राइमरी स्कूल बंद कर डालने, बेतहाशा फ़ीस बढ़ाकर मेहनतक़श अवाम के बच्चों को शिक्षा से से महरूम कर डालने, शिक्षा को उद्योग बना डालने के सरकार के पक्के इरादे को कृषि विश्वविद्यालय हिसार के बहादुर छात्रों ने एक बहुत ज़ोरदार झटका दिया है,जिसके लिए वे दिली मुबारकबाद के हक़दार हैं. क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा, शिक्षा को बचाने के हर आंदोलन के साथ अपनी प्रतिबद्धता रेखांकित करते हुए, कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों को शाब्बाश कहता है.