जब तक जिम्मेदार अधिकारियों की जेल नहीं होगी, शहरवासी यूं ही मरते रहेंगे फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम के हरामखोर और हरामखोर अधिकारियों द्वारा डिस्पोजल के लिए महीनों पहले खुदवा कर असुरक्षित रूप से छोड़े गए गहरे गडढ़े में गिरने से चार वर्षीय आर्यन नाम के बच्चे की मौत हो गई। पल्ला थाना क्षेत्र की सूरदास कॉलोनी स्थित शिव मंदिर के पास रविवार की शाम हुई इस दर्दनाक घटना में पुलिस ने मृत बालक आर्यन के पिता राधो शाह की शिकायत पर निगम के अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है लेकिन इसमें संशय है कि पुलिस इसके लिए किसी को भी गिरफ़्तार कर जेल भेजेगी।
स्थानीय निवासियों के अनुसार करीब छह महीने पहले नगर निगम ने शिव मंदिर के पास खाली पड़ी जमीन में गड्ढा खुदवाना शुरू किया था। तब बताया गया था कि यहां नगर निगम का डिस्पोजल बनने जा रहा है। निगम ने यहां करीब चालीस फीट गहरा गड्ढा खुदवा दिया। जब यह गड्ढा खोदा जा रहा था तब भी निगम या ठेकेदार की ओर से न तो यहां सुरक्षा के लिए फेंसिंग कराई गई और न ही कोई संकेतक लगाए गए। करीब चार महीने पहले गड्ढा खोद कर ठेकेदार नदारद हो गया और यहां काम रुक गया। गहरे गड्ढे में कोई पशु या व्यक्ति न गिर जाए इस आशंका पर कॉलोनी वासियों ने नगर निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास और मुख्यमंत्री से कई बार शिकायत की लेकिन किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी, क्योंकि उन्हें किसी के मरने-जीने से कोई सरोकार नहीं है।
निगम अधिकारियों ने गड्ढा शिवमंदिर के ठीक पड़ोस में खुदवाया था श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण हादसे की आशंका ज्यादा थी। बरसात के कारण गड्ढे में काफी पानी भर गया था। रविवार की शाम चार साल का प्रिंस शिव मंदिर के पास खेल रहा था, गड्ढे के पास गया और पैर फिसलने से उसी में समा गया। साथी बच्चों ने शोर मचाया तो आसपास मौजूद युवकों ने तुरंत छलांग लगाकर पानी मेंं डूबे आर्यन को बाहर निकाला और बीके अस्पताल ले गए लेकिन डाक्टरों ने उसे मृ़त घोषित कर दिया।
आर्यन की मौत सीधे सीधे नगर निगम के अधिकारियों की हरामखोरी, कामचोरी और भ्रष्टाचार का नतीजा है। बच्चे की मौत के जिम्मेदारों में से एक कार्यकारी अभियंता नितिन कादियान निगम के भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए निर्लज्जता से कह रहा है कि जिस जगह पर हादसा हुआ है वहां डिस्पोजल का निर्माण नहीं हो रहा था, यह जगह काफी जगह से खाली पड़ी थी, जहां काफी गहरा गड्ढा बना हुआ है। इसकी फेंसिंग कराई जा रही है। कोई ये बताए कि क्या काफी दिनों से खाली पड़े मैदान मेें अपने आप चालीस फीट गहरा गड्ढा हो जाता है? नहीं। अगर यह नगर निगम के डिस्पोजल की जगह नहीं है तो वह गड्ढा कहां है जिसे नगर निगम ने डिस्पोजल के लिए खुदवाया था? जाहिर है कि नितिन कादियान कोरा झूठ बोल रहे हैं? अगर यह गड्ढा नगर निगम के डिस्पोजल के लिए नहीं खोदा गया था तो फिर अब इसकी फेंसिंग क्यों कराई जा रही है, ये तब ही क्यों नहीं लगाई गई जब गड्ढा खोदा जा रहा था? तब तो सिक्योरिटी एंड सेफ़्टी की मद में आने वाले धन की बंदरबांट कर डाली गई होगी, आम जनता की सुरक्षा से इन हरामखोर अधिकारियों को वैसे भी क्या लेना-देना।
निगम के निकृष्ट अधिकारियों के कारण केवल आर्यन की ही जान नहीं गई है, 23 सितंबर को ओल्ड रेलवे अंडरपास में डूबने से दो बैंककर्मियों की भी मौत हुई थी। अंडरपास से पानी निकालने का जिम्मेदार जेई प्रवीण बैंसला जेनरेटर-डीजल के नाम पर लाखों रुपये के बिल बनाकर तो पास करा लेता है। लेकिन अगर समय रहते जेनरेटर चला कर पानी निकालता तो शायद वो बैंककर्मी मौत का शिकार नहीं होते। हादसे के लिए जेई प्रवीण बैंसला प्रथम दृष्टया जिम्मेदार है लेेकिन मंत्री कृष्णपाल गूजर का खास होने के कारण न तो निगमायुक्त उसके खिलाफ कार्रवाई कर पा रही हैं और न ही पुलिस उसको दायरे में लेकर तफ्तीश करने की हिम्मत जुटा पा रही है। इससे पहले 31 जुलाई को बल्लभगढ़ में भ्रष्टाचार के नाले में डूब कर प्रिंस नाम के युवक की मौत हो गई थी। निगम के हरामखोर अधिकारी और खाऊ ठेकेदार ने मिलीभगत कर डिजाइन के अनुसार नाला निर्माण पूर्ण नहीं किया और लिंटर के धन की बंदरबांट कर डाली, नतीजा बिना रेलिंग के खुला हुआ नाला प्रिंस की मौत का कारण बना था। इस मामले में तो अप्राकृतिक मौत का केस दर्ज कर दोषी अधिकारियों को ही बचा लिया गया।
एफएमडीए द्वारा सेक्टर 22 में हार्डवेयर सोहना रोड पर श्मशान के पास सीवर लाइन के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर कर 4 जुलाई को विमल उर्फ बिल्लू नामक बाइक सवार युवक की मौत हो गई थी। एफएमडीए ने सड़क के बीचोबीच गड्ढा तो खुदवा दिया था लेकिन वाहन चालकों को खबरदार करने और हादसे से रोकने के लिए कोई चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, फेंसिंग नहीं करवाई थी, रोज की तरह बाइक से आ रहे विमल को रात के अंधेरे में गहरा गड्ढा नहीं नजर आया और उसकी मौत हो गई।
लगभग एक-एक महीने के अंतर पर होती रहीं लोगों की मौत पर किसी अधिकारी ने कुछ नहीं किया। दरअसल, इन अधिकारियों को मालूम है कि उनका कुछ बिगडऩे वाला नहीं। यदि केस दर्ज भी हो गया तो पुलिस उनकी गलती नहीं निकालेगी। करीब दस साल पहले दिल्ली मथुरा हाईवे पर बाटा पुल के पास सड़क पर बने गड्ढे के कारण मासूम पवित्र वाधवा की मौत हो गई थी। पिता मनोज वाधवा बेटे की मौत के जिम्मेदार अधिकारियों को सजा दिलाने की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद प़ुलिस आज तक दोषी अधिकारी को नहीं तलाश सकी है। आर्यन का केस हो, बैंक कर्मी पुण्यश्रेय शर्मा और विराज या विमल की मौत इनमें भी पुलिस की तफ्तीश की दिशा और दशा बताती है कि वह दोषी अधिकारी तक नहीं पहुंच पाएगी, और जब तक पुलिस दोषी अधिकारियों को जेल नहीं पहुंचाती, सजा नहीं दिलवाएगी, इसी तरह के हादसे होते रहेंगे। जिस दिन एक भी अधिकारी जेल चला गया उसके बाद कहीं भी इस तरह के हादसे देखने को नहीं मिलेंगे।