मज़दूर मोर्चा ब्यूरो बीते शनीवार को दिल्ली में हुई बारिश के चलते तीन होनहार छात्रों की जान चली गई। एक छात्रा यूपी से, एक छात्र तेलंगाना व दूसरा केरल से आईएएस बनने की कोचिंग लेने ओल्ड राजेन्द्र नगर स्थित राउज़ कोचिंग सेंटर में पढ़ते थे। शनिवार को जब वे कोचिंग सेंटर की बेसमेंट में बनी लाइब्रेरी में अध्ययन कर रहे थे तो यकायक पानी इतनी तेज़ी से भरने लगा कि तीन मिनट में ही पानी 9 फीट ऊंची छत तक जा पहुंचा। छात्रों ने भाग कर दरवाजे से निकलने की कोशिश की तो बायोमीट्रिक दरवाजा जाम हो गया, लिहाजा वे सड़े हुए गंदे पानी में डूब कर मर गये।
इस कांड के विरोध में उतरे हजारों छात्रों को शान्त करने के लिये अन्य पुलिसिया उपायों के अलावा सरकार ने इलाके के जेई को नौकरी से बर्खास्त कर दिया तथा उसके ऊपर तैनात असिस्टेंट इंजीनियर को निलम्बित करने के साथ-साथ सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर को कारण बताओ नोटिस देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। इस पर भी छात्र शान्त न हुए तो नगर निगम के बुलडोजर ने सम्बन्धित भवन के साथ-साथ कुछ अन्य भवनों द्वारा नाले पर किये गये अवैध कब्जों को ध्वस्त कर दिया। ऐसे ही कुछ भवनों को गिराने के बजाय अधिकारियों ने सील कर दिया। इसके बावजूद भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। आईएएस की तैयारी करने वाले छात्र यह बात बखूबी समझते हैं कि इतने बड़े हादसे के लिये एक जेई तथा एक-दो इंजीनियरों को जिम्मेदार ठहरा कर सरकार बच नहीं सकती। छात्रों ने निगम आयुक्त अश्वनी कुमार आईएएस से मिलने की मांग रखी। लेकिन वो चूहे की तरह किसी बिल में छिप गया और पुलिस उसे छिपाए रखने के लिये पूरी तरह से मुस्तैद है। समझने वाली बात यह है कि किसी भी नगर निगम में मेयर एवं पार्षदों के पल्ले शोर-मचाने के अलावा कोई भी कार्यकारी अधिकार नहीं होता। ये सारे अधिकार आयुक्त एवं उसके मातहत छोटे-बड़े अधिकारियों के पास होते हैं। कहने को दिल्ली नगर निगम व दिल्ली सरकार आम आदमी पार्टी की है लेकिन वास्तव में मोदी सरकार ने न तो इस सरकार के पल्ले कुछ छोड़ा है और न ही नगर निगम के पल्ले। और तो और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को जेल में बंद कर रखा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को, मोदी ने नया कानून बना कर, काटते हुए तमाम अधिकार आरएसएस के एक स्वयं सेवक से बने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को दे रखे हैं। इसी तथ्य को समझते हुए जब यह संघी स्वयंसेवक छात्रों को सांत्वना देने पहुंचा तो छात्रों ने ऐसा खदेड़ा कि पुलिस उसको जैसे-तैसे बचा कर ले गई। इसी सक्सेना ने न केवल उक्त निगमायुक्त बल्कि तमाम छोटे-बड़े वे अधिकारी तैनात कर रखे हैं जो संघ द्वारा दीक्षित हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो सभी के सभी मोदी के अन्धभक्त हैं और लूट-कमाई करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं।
जो काम बुलडोज़र ने अब किया, क्या वो पहले नहीं हो सकता था? हो तो सकता था! यदि मोटी-मोटी रिश्वतें न ली होतीं। ये अवैध निर्माण कोई आज-कल में तो बन नहीं गए, वर्षों पहले से बने हुए हैं इन सबके बनने देने के एवज में न केवल नगर निगम बल्कि स्थानीय पुलिस व कई अन्य विभागों ने अच्छी-खासी काली कमाई की थी।
आज यदि सीएम केजरीवाल अथवा मेयर शैली ओबरॉय किसी पर कोई एक्शन लेना भी चाहें तो कार्यकारी अधिकारी उपराज्यपाल के मुंह की ओर देखते हैं। यानी कि असली आदेश तो उपराज्यपाल का ही चलता है।