फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) चप्पल पहनने वाले को हवाई यात्रा कराने का जुमला फेकने वाले उद्घाटनवीर प्रधानमंत्री मोदी लोकल ट्रेनों से यात्रा करने वालों की सारी सुविधाएं छीनने में लगे हैं। पहले तो कोविड के नाम पर लोकल ट्रेनों की संख्या आधी और किराया तिगुना कर दिया। फिर वंदे भारत जैसी वीआईपी ट्रेनों को चलाने के नाम पर लोकल व अन्य ट्रेनों की समय सारिणी में बदलाव कर गरीब यात्रियों की दिक्कतें बढ़ाई गईं। और अब तो मालगाडिय़ों के लिए लोकल ट्रेनों को घंटोंं किनारे खड़ा किया जा रहा है।
लोकल ट्रेनों के कई कई घंटे लेट होने से ड्यूटी पर समय से उपस्थित नहीं हो पाने के कारण परेशान दैनिक यात्रियों ने रेलवे में शिकायत की है लेकिन ट्रेनों, खासकर लोकल ट्रेनों का कोई पुरसाने हाल नजर नहीं आ रहा है। दिल्ली को दक्षिण भारत से जोडऩे वाली दिल्ली आगरा रेलवे लाइन काफी व्यस्त होने के कारण वर्ष 2019-20 में तुगलकाबाद से पलवल तक 33 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन डाली गई थी। इस रेलवे लाइन के पडऩे से लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनें समय से चलने लगी थीं। इसका फायदा पलवल, बल्लभगढ़, फरीदाबाद के दैनिक यात्रियों को हुआ था। दैनिक यात्रियों के अनुसार कोविड से पहले दिल्ली-पलवल रूट पर करीब 50 लोकल और इतनी ही एक्सप्रेस, सुपरफास्ट ट्रेनें चलती थीं। कोविड में लोकल ट्रेनों की संख्या घटा कर 26 कर दी गई जो अभी तक बढ़ाई नहीं गई हैं। पलवल-बल्लभगढ़ और फरीदाबाद से रोजाना करीब साठ हजार दैनिक यात्री दिल्ली आता जाता है। ट्रेनों की संख्या घटाए जाने से दैनिक यात्रियों को परेशानी बहुत हुई लेकिन किसी तरह तालमेल बैठाया गया। यात्रियों का आरोप है कि बीते एक-डेढ़ सप्ताह से लोकल ट्रेनों को रोक कर माल गाडिय़ां पास कराई जा रही हैं। लोकल ट्रेनों को स्टेशन पर एक एक घंटे तक खड़ा रखा जा रहा है। पिछले बुधवार को 04920 दिल्ली पलवल ईएमयू बल्लभगढ़ व असावटी स्टेशन के बीच करीब एक घंटा खड़ी रही जबकि इसी दौरान मेन लाइन और थर्ड लाइन से मालगाड़ी को निकाला गया। चौथी लाइन पर चल रही ईएमयू को असावटी में फिर रोक कर इस लाइन से एक और मालगाड़ी को आगे भेज दिया गया, यह मालगाड़ी जब तक पलवल नहीं पहुंची लोकल ट्रेन असावटी पर खड़ी रही। दैनिक यात्रियों का आरोप है कि रेलवे की यह हरकत एक दिन की नहीं है, लगभग हर दिन दैनिक यात्रियों को ट्रेन में घंटों बिताने पड़ते हैं। शाम को तो किसी तरह समय काट लिया जाता है लेकिन सुबह ड्यूटी जाने के समय लोकल ट्रेनों को किनारे खड़ा कर मालगाड़ी व अन्य ट्रेनों को निकाला जाना रुकना चाहिए। हजारों दैनिक यात्रियों को काम पर देर से पहुंचने के कारण अधिकारी के गुस्से का सामना करना पड़ता है, कभी कभी तो आधे दिन की छुट्टी लग जाती है।
रेलवे पैसेंजर एसोसिएशन के प्रधान प्रकाश मंगला कहते हैं कि दैनिक यात्रियों ने ईमेल से लेकर वाट्सएप, ट्विटर सब जगह शिकायत कर ली लेकिन लोकल ट्रेनों के संचालन में आज तक कोई सुधार नहीं हुआ है। उनकी बातों से लगता है कि दैनिक यात्रियों की समस्या का सामाधान करने में न तो रेलवे अधिकारियों को कुछ रुचि है और न ही रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को।
अश्वनी वैष्णव और उनके आक़ा मोदी को गऱीब, वेतनभोगी, मध्यमवर्गीय रेलवे यात्रियों की सुविधा असुविधा से कुछ लेना देना नहीं है। उन्हें तो जनता को हर तरह से लूट कर सरकार का खजाना भरना है ताकि पूंजीपति दोस्तों की मदद कर सकें। दस साल में मोदी ने लंबी दूरी की ट्रेनों से जनरल कोच की संख्या आधी कर उनकी जगह थर्ड एसी और सेकेंड ऐसी के कोच लगाए हैं। इसी तरह स्लीपर कोच की संख्या भी तीस से चालीस प्रतिशत तक घटा कर थर्ड और फस्र्ट एसी कोच की संख्या बढ़ाई गई है। मोदी के सत्ता संभालते ही रेलवे ने झूठा राग अलापना शुरू कर दिया था कि रेलवे को प्रत्येक ट्रेन के संचालन में होने वाले खर्च की तुलना में केवल 67 प्रतिशत ही कमाई होती है। यह प्रोपेगंडा किराया बढ़ाने और सुविधा के नाम पर अन्य शुल्क वसूली को वाजिब बताने के लिए फैलाया गया था। मोदी ने रेलवे को मुनाफे का सौदा साबित करने के लिए तेजस नामक निजी ट्रेन चलवाई। निजी क्षेत्र की इस ट्रेन के संचालन का जिम्मा सरकारी रेलवे कर्मचारियों को ही सौंपा गया। इन ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेनों से दोगुणे से अधिक रखा गया। इसके बाद मोदी ने वंदे भारत ट्रेनें चलाईं जिनका किराया प्रीमियम यानी करीब पौने दो गुणा अधिक रखा गया। इन ट्रेनों को सफल बनाने के लिए इनसे प्रतियोगिता करने वाली अन्य ट्रेनों का किराया भी प्रीमियम कर दिया गया लेकिन सुविधाएं वंदे भारत के बराबर नहीं की गईं।
सिर्फ लंबी दूरी की ट्रेनें ही गरीब और मध्यमवर्गीय यात्रियों की पहुंच से दूर नहीं की गईं, लोकल ट्रेनों को भी वसूली का औजार बना डाला गया। कोविड में लोकल ट्रेनों की संख्या आधी कर दी गई और उन्हें स्पेशल नाम देकर किराया तीन गुणा कर दिया गया। यानी संचालन की लागत आधी और आमदनी तीन गुणा कर दी गई। कोविड समाप्त होने के दो साल बाद तक तीन गुणा ज्यादा किराया वसूला जाता रहा। लोकसभा चुनाव में अपनी छवि चमकाने के लिए मोदी ने किराया तो घटा दिया लेकिन सारी ट्रेनें बहाल नहीं की गईं।
अब मालगाडिय़ों को यात्री गाडिय़ों पर तरजीह दिया जाना बताता है कि मोदी और अश्विनी वैष्णव की नजर में आम जनता ऐसी प्रजा है जिसका किसी भी हद तक शोषण किया जाए लेकिन वह सत्ता का विरोध नहीं करेगी।