फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बीके अस्पताल में पूर्व सीएम द्वारा ठेके पर खोला गया हार्ट सेंटर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के साथ ही लूट कमाई वाला मॉडल साबित हुआ है। सेंटर में आयुष्मान मरीजों से वसूली, अयोग्य डॉक्टरों से हृदयरोगियों का इलाज, सर्जरी में संक्रमित सामान का इस्तेमाल आदि गंभीर धोखाधडिय़ां होती रहीं, इनके कारण जब मरीजों की मौत होने लगी और लोगों ने विरोध किया तब कहीं जाकर सरकार होश में आई और जून 2025 में सरकारी संरक्षण में चल रहा यह फर्जीवाड़ा बंद करना पड़ा।
स्वास्थ्य विभाग संभालने वाली सैनी सरकार को चाहिए था कि हार्ट सेंटर के विकल्प के रूप में बीके सिविल अस्पताल में पहले की तरह हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती करती और हार्ट सेंटर अपने अधीन कर वहां एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती। ऐसा करने में सरकार की जेब पर बोझ पड़ता और मोदी-खट्टर की चहेती मेडिट्रिना हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड की लूट कमाई बंद हो जाती। इस लूट कमाई को सही ठहराने वाले अधिकारियों की भी कमाई रुक जाती। हृदयरोगी मरें या फिर निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराएं सरकार की बला से।
अब बताया जा रहा है कि एक बार फिर से इसी मेडिट्रिना हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड प्रबंधन और सरकार के बीच हार्ट सेंटर दोबारा चलाने की बात चल रही है। यानी सरकार इसी कंपनी को एक बार फिर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर उन्हें लूटने-मारने का मौका देने जा रही है। पाठकों को याद दिला दें कि सीएमओ-पीएमओ कार्यालयों के भ्रष्ट मेडिकल अफसरों की मिलीभगत से हार्ट सेंटर में एक नहीं अनेक घोटाले हुए। इनमें पहला घोटाला आयुष्मान मरीजों से इलाज के लिए वसूली करना और इसी का पैसा सरकार से भी लेना शामिल है। बताया जाता है कि यह आयुष्मान घोटाला करोड़ों रुपये का था। जाहिर है कि आयुष्मान मरीजों के बिल सीएमओ कार्यालय की मुहर के बाद ही पास होते थे। सेंटर के ही कुछ कर्मचारियों ने इसका खुलासा किया तो एसीबी ने जांच की और खेल सही पाया। सरकार ने सेंटर का करीब सात करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया था। अब बताया जा रहा है कि सेंटर प्रबंधन ने शर्त रखी है कि पहले सात करोड़ का भुगतान कराओ उसके बाद ही सेवाएं शुरू की जाएंगी। सरकार को शायद लग रहा है कि आठ महीने में चर्चाएं ठंडी हो चुकी हैं इसलिए चुपचाप लेनदेन कर हार्ट सेंटर दोबारा चालू करवा दिया जाएगा। सरकार और उसके मंत्री एक बार फिर हार्ट सेंटर चालू कराने ढिंढोरा पीटकर श्रेय लेंगे। यानी सरकार एक बार फिर हार्ट सेंटर को मनमानी लूट करने की छूट दे रही है। पाठकों को याद दिला दें कि हार्ट सेंटर की ईकोग्राफ मशीन का इस्तेमाल प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण करने में होता था। केवल कार्डियोलॉजिस्ट ही मरीज की ईको जांच कर सकता है लेकिन पैसा बचाने के लिए सेटर प्रबंधन यह काम अयोग्य टेक्नीशियनों से कराता था। इतना ही नहीं हृदयरोगियों की एंजियोग्राफी-एंजियोप्लास्टी भी कार्डियोलॉजिस्ट ही कर सकता है लेकिन सेंटर में यह काम साधारण एमबीबीएस डिग्री धारक डॉ. पंकज से कराया गया। उसके कारण कम से कम तीन मरीजों की जान चली गई।
पैसा कमाने की हवस में हृदयरोगियों की एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी में इस्तेमाल होने वाले सिंगल यूज आइटम जैसे गाइड वायर, कैथेटर बलून और डिफ़्लेशन टिप कैथेटर आदि को कई कई मरीजों में बार बार इस्तेमाल किया गया। यहां तक कि स्टेंट डालने में भी इस्तेमालशुदा सामान का दोबारा-तिबारा उपयोग किया गया। विजिलेंस जांच में सामने आया था कि 2024 जनवरी तक 341 हृदयरोगियों की मौत हुई। करीब सौ लोगों की मौत सर्जरी का इस्तेमालशुदा सामान दोबारा प्रयोग करने के कारण होना पाया गया है। यह सारा खेल पीएमओ-सीएमओ द्वारा गठित कमेटी की निगरानी में होता रहा। इस कमेटी ने कभी सेंटर का रिकॉर्ड, स्टोर, स्टॉक, मरीजों का या उनके बिलों का सत्यापन करने की जहमत नहीं उठाई। समझा जा सकता कि पैसों से कमेटी की आंखें और मुंह बंद कर दिया गया होगा तब ही उसने सेंटर में मरीजों के साथ हो रहे अन्याय पर एक शब्द नहीं बोला।
मेडिट्रिना की इतनी सारी धांधलियां, मरीजों की मौत, सरकारी धन का गबन आदि गड़बडिय़ां उजागर होने के बाद सरकार जांच करा कर उसके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय एक बार फिर उसे ही हार्ट सेंटर सौंप रही है। प्रबंधन आयुष्मान योजना के तहत रोकी गई सात करोड़ की धनराशि भी वापस मांग रहा है, यदि सरकार इस धनराशि का भुगतान करती है तो इसका अर्थ होगा कि उसने आयुष्मान लाभार्थी मरीजों से इलाज के नाम पर लूटी गई रकम को जायज मान लिया है। सरकार के इस प्रोत्साहन से उत्साहित मेडिट्रिना हॉस्पिटल्स वाले हार्ट सेंटर में क्या यही धांधलियां दोबारा नहीं करेंगे?
जानकार कहते हैं कि ठेका स्वास्थ्य सेवाओं में हमेशा भ्रष्टाचार, मरीजों से लूट, इलाज के मानकों का उल्लंघन, घटिया और अयोग्य चिकित्सा सेवाओं की संभावना रहती है क्योंकि इन कंपनियों का उद्देश्य मुनाफा और धन कमाना होता है न मरीज की सेवा करना। सरकार जितना भुगतान इन ठेका कंपनियों को करती है उससे कहीं कम में विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात कर मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध करा सकती है। लेकिन ऐसा करने में अधिकारियों और उनके जरिए नेताओं की जेब में कुछ नहीं जाएगा। इसके विपरीत ठेका देने पर अधिकारी-नेता सबकी कमाई का जुगाड़ हो जाएगा। यदि सरकार सच में हार्ट सेंटर चलाने के लिए गंभीर है तो उसे सुनिश्चित करना होगा कि हार्ट सेंटर वाले पहले जैसी बेइमानियां दोबारा न करें। सरकार ऐसा कर पाएगी इसमें बड़ा संशय है।