फरीदाबाद। बीके अस्पताल में डाक्टर, दवाइयों आदि की कमी का फायदा निजी अस्पताल के दलाल तो उठाते ही थे अब यहां के डाक्टर भी इलाज कराने आये मरीजो को ऊपरी कमाई के लिए अलग से दवाइयों की पर्चो बना कर निजी मेडिकल स्टोर से खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। 20 वर्षीय कुमकुम अपनी माँ के साथ चर्मरोग के इलाज के लिए 31 दिसम्बर को बीके अस्पताल में आई थी। पांच रुपये का ओपीडी कार्ड बनवाने के बाद उन्हें ओपीडी कमरा नंबर 5 में जाने को कहा गया। यहां पर कुमकुम की जांच डॉ. सरोज ने की, जांच के उपरान्त डॉक्टर ने ओपीडी कार्ड में एक दवा लिख दी और अलग से एक कागज पर चार-पांच दवाइयों के नाम लिख दिए और इनको अस्पताल के बाहर स्थित निजी मेडिकल स्टोर से ही लेने को कहा।
कुमकुम डॉ. सरोज की लिखी दवाएँ खरीदने निजी मेडिकल स्टोर पहुंची तो उसे नौ सौ रुपये बताए गए। किसी तरह पैसे इकट्ठा कर उसने दवाएं खरीदीं। कुमकुम ने मज़दूर मोर्चा के इस संवाददाता को डॉक्टर की लिखी पर्ची दिखाई और बीके अस्पताल में चल रहे कमीशनखोरी के खेल की जानकारी दी। संवाददाता ने डॉ. सरोज से बाहर से दवा लिखने के बारे में पूछा तो वह बिफर पड़ी और अभद्रता पर आमादा हो गई। डॉ. सरोज ने कुमकुम और उसकी मां को अपने चेंबर में बंद कर लिया, इस दौरान वहां मौजूद कई अन्य मरीजों ने भी डॉ. सरोज पर बाहर से महंगी महंगी दवाएं लिखने का आरोप लगाया। अस्पताल में ंघूम रहे कई दलाल डॉ. सरोज के समर्थन में आ गए और सबने मिलकर कुमकुम व उसकी मां को दबाव मेें ले लिया। डॉक्टर के चेंबर से निकलने के बाद दोनों ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया और चुपचाप चली गईं। पाठक जान लें की सरकारी अस्पताल के डाक्टर को ये अनुमति नहीं है कि वह किसी मरीज को बाहर की दवाई लिखेे, अगर अस्पताल में वह दवा नहीं है तो वह डाक्टर दवा का जेनेरिक नाम ओपीडी कार्ड पर लिखेगा, अब मरीज की मर्जी है कि वह दवा कहां से ले और किस कम्पनी की ले।
पीएमओ डॉ. विकास गोयल को इस बारे मेें बताया गया तो उनका कहना था कि डा. सरोज पहले भी कई बार इस तरह के काम कर चुकी है जिसके लिए उन्हें वार्निंग भी दी गई है लेकिन लगता है वार्निंग का उन पर कोई असर नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत मिली तो संबंधित मामले की जांच करा कार्रवाई की जाएगी। इसमें कोई दो राय नहीं कि पर्ची पर दवाई कमीशन बनाने की लिए ही लिखी जाती है, बीके अस्पताल में इस तरह का पर्ची का खेल बहुत आम है, पर्ची के अलावा यहां डाक्टर व अन्य स्टाफ कमीशन के लिए कई तरह के खेल खेलते ही रहते है।