फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बडख़ल झील को प्राकृतिक स्रोतों की जगह सीवर के पानी से भरने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये पानी में बहा दिए लेकिन क्षेत्र की जनता को साफ पेयजल मुहैया कराने का कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया गया। काम नहीं बल्कि काम का दिखावा करने में विश्वास रखने वाले ढिंढोरेबाज भाजपा सरकार की बड़बोली विधायक सीमा त्रिखा दस साल सत्ता में रहीं लेकिन उनकी प्राथमिकता में जन सुविधाओं से ज्यादा बडख़ल झील भर कर खुद का नाम अमर करवाने की ही रही। झील तो भरी जाने लगी लेकिन अब उसमें पानी रुका रहे इस पर करोड़ों रुपये फिर खर्च किए जाएंगे, क्षेत्र की जनता भले ही पानी खरीद कर पीने को मजबूर हो।
मोदी लहर में देश और प्रदेश का चहुंमुखी विकास करने का झूठ गढ़ कर 2014 से सत्ता में आई भाजपा सरकार के सीएम खट्टर और बडख़ल विधायक सीमा त्रिखा ने बड़े बड़े दावे किए थे कि जनता को बिजली, पानी, सड़क की बेहतरीन सुविधाएं हासिल होंगी। सीमा त्रिखा ने यह बडे बोल इसलिए भी बोले थे कि पीएम मोदी ने फरीदाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने का झुनझुना थमाया था। जनता को सुविधाएं तो नहीं मिलीं लेकिन लूट कमाई और कमीशनखोरी के नए रास्ते खोजते हुए उन्हें बडख़ल झील नजर आ गई। इस प्रोजेक्ट के नाम पर अधिकारियों से लेकर नेताओं तक कमाई की खासा संभवनाएं थीं तो यह जुमला भी उछाल दिया गया।
बडख़ल विधानसभा क्षेत्र की विधायक बनीं सीमा त्रिखा ने संघियों के पक्षपाती फार्मूले पर चलते हुए उन इलाकों में होने वाले जनोपयोगी विकास कार्य या तो रुकवा दिए या उनकी गति धीमी करवा दी, जहां से उन्हें वोट नहीं मिले थे। उन्होंने अपना पूरा ध्यान पंजाबी बिरादरी के वोट बैंक को साधने में लगा दिया। नतीजा ये हुआ कि एसजीएम नगर के ए, बी व सी ब्लॉक, बडख़ल गांव, सैनिक कॉलोनी, ग्रीनफील्ड कॉलोनी, चार्मवुड विलेज, दयाल नगर, इरोज गार्डन, शिवदुर्गा विहार सहित सूरजकुंड क्षेत्र के बड़े इलाके में विधायक मैडम की मर्जी के बिना नगर निगम कोई काम नहीं करता। बीते दस साल में इन इलाकों में पेयजल और सीवरेज दोनों की समस्या गंभीर हो गई। खास कर सैनिक कॉलोनी, एसजीएम नगर, ग्रीनफील्ड कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं की गई। इन इलाकों में हालात ये हैं कि नगर निगम और एफएमडीए द्वारा बड़े बड़े दावे किए जाने के बावजूद लोगों को पीने का पानी जल माफिया से खरीदना पड़ रहा है। जानकारों के अनुसार मंत्री कृष्णपाल गूजर की बिरादरी वाले जल माफिया भाजपा के कट्टर समर्थक हैं, उनका धंधा चलता रहे इसलिए भी मंत्री-विधायक के इशारे पर इन क्षेत्रों में न तो पेयजल आपूर्ति दुरुस्त की जा रही है और न ही सीवर लाइनें। एसजीएम नगर के बड़े इलाके की हालत तो ये है कि यहां सीवेज का दूषित पानी जर्जर हो चुकी पेयजल लाइनों में मिल कर घरों में बदबूदार पानी के रूप में पहुंचता है। सीमा त्रिखा भले ही पांच महीनों के लिए मंत्री बनाई गईं लेकिन जिस तरह केंद्रीकृत सत्ता का स्वभाव होता है उसी तरह वह और नए मुख्यमंत्री नायब सैनी केवल मोदी के रबर स्टैंप और भोंपू की तरह काम करते रहे। इन दोनों ने बडख़ल क्षेत्र की जनता की पेयजल समस्या दूर करने की कोई घोषणा भी नहीं की।
दस साल पहले उन्होंने जो बडख़ल झील भरने और उसे पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की थी, वह भी आधी अधूरी है। जिस झील को पर्यावरणविद् बिना खर्च के ही पर्यावरण अनुकूल तकनीक के जरिए प्राकृतिक पानी यानी वर्षा जल से भरने का प्रस्ताव दे रहे थे उसे रद्द कर सीमा त्रिखा ने नगर निगम के भ्रष्ट-लुटेरे और अवैज्ञानिक अधिकारियों सौंप दिया।
अधिकारियों ने गुरुत्वाकर्षण नियम के विरुद्ध सेक्टर 21 में एसटीपी लगाकर वहां से शोधित पानी झील में डालने की खर्चीली और बिना परखी हुई योजना बना डाली। झील भरने और एसटीपी बनाने में बताया तो साठ करोड़ रुपया जा रहा है लेकिन भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार इसमें सौ करोड़ के आसपास रुपया खर्च किया जा चुका है। अवैज्ञानिक अधिकारियों ने झील भरने का तो इंतजाम कर दिया लेकिन उसमें पानी रोकने पर कुछ नहीं किया। इस बरसात में झील का जलस्तर थोड़ा सा बढ़ा और फिर पानी प्राकृतिक नालों के जरिए बह निकला। सूत्रों के अनुसार अब इन नालों को बंद करने में भी करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे।
जितना धन बडख़ल झील भरने पर खर्च किया गया है यदि उसका आधा भी इलाके की पेयजल आपूर्ति दुरुस्त करने पर लगा दिया जाता तो क्षेत्र की बहुत बड़ी आबादी को मोदी-खट्टर-सैनी की इस स्मार्ट सिटी में पानी खरीदने पर अपनी आय का बड़ा हिस्सा नहीं खर्च करना पड़ता। दस साल तक जनता को प्यासा रखने वाली सीमा त्रिखा का जनता में विरोध देखते हुए पार्टी ने उनका टिकट काट कर खट्टर के चहेते धनेश अदलखा को दे तो दिया है लेकिन दूसरी विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले अदलखा को जनता विधानसभा चुनाव में वोटों को तरसा सकती है।