फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) गोरक्षा की आड़ लेकर मारा गया आर्यन मिश्रा की हत्या के मामले की जांच उसके माता-पिता और सामाजिक संगठन सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं। पिछले सप्ताह इन सामाजिक संगठनों ने मृतक के परिजनों के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु से लेकर प्रधानमंत्री मोदी, राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय और सीएम नायब सिंह सैनी को ज्ञापन भेजे हैं। बुधवार को सामाजिक संगठनों ने पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने और सीबीआई जांच की मांग करते हुए बीके चौक तक मार्च भी किया। एक सप्ताह बाद भी न तो मूर्मु-मोदी और न ही दत्तात्रेय-सैनी की सरकार ने उनकी मांगों पर कोई सुनवाई-कार्रवाई करना तो दूर उनकी मांगों को देखने की भी जरूरत नहीं समझी। कार्रवाई करें भी कैसे, हत्या करने वाले अपराधी सत्ता द्वारा ही पैदा किए गए और पोषित हैं। गोरक्षा के नाम पर इन्हीं के द्वारा दंगा करने और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा कर बहुसंख्यक हिंदू आबादी का ध्रुवीकरण चुनावों में भाजपा के लिए करने के यही मुख्य हथियार हैं। 2014 से पहले पूरे देश में न तो कहीं गोवंश खतरे में था और न ही इस मुद्दे पर कहीं हिंसा होती थी। मोदी-खट्टर के सत्ता में आते ही पूरे देश में गोवंश पर संकट आ गया। लाला रामदेव से लेकर दुष्कर्म आसाराम बापू और न जाने कितने पाखंडियों ने गायों को जन्म देने वाली माता से भी श्रेष्ठ घोषित कर बेरोजगार हिंदू युवाओं को धर्म की रक्षा का रोजगार सौंप दिया, इन युवाओं को सत्ता ने संरक्षण दिया तो कानून अपनी जेब में समझ कर ये ‘विधर्मियोंÓ की हत्या करने से भी परहेज नहीं करते। इन हत्यारों का मनोबल इस तरह बढ़ाया जाता कि सरकार पहले तो उनकी गिरफ्तारी नहीं होने देती, यदि दबाव में गिरफ्तारी की गई तो आनन फानन जमानत कराई जाती और जेल से बाहर निकलने पर इन हत्यारोपियों का स्वागत फूल मालाओं से किया जाता, कई जगहों पर तो बाकायदा शोभायात्रा निकाल कर उनका महिमामंडन किया जाता। इतना ही नहीं इन पर मुकदमा दर्ज करते वक़्त भी इस बात का ध्यान रखा जाता है कि मुकदमे का नाटक पूरा होने पर ये बरी हो जाएं।
समझा जा सकता है कि धर्म और गाय के नाम पर मानव हत्या, बलात्कार करने वाले सत्ता के लिए मुफीद इन नरपशुओं के खिलाफ मोदी-सैनी सीबीआई जांच का आदेश क्यों कर देंगे। एक बात और कि ये हत्या मोदी-सैनी की डबल इंजन सरकार के राज में हुई है न कि पश्चिम बंगाल या केरल जैसे गैर भाजपाई राज में। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में बागपत में भाजपा समर्थकों ने एक दलित युवती का सामूहिक दुष्कर्म कर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी, लेकिन लगता है कि रामराज का ढिंढोराी पीटने वाले छप्पन इंची मोदी ने इसकी सीबीआई जांच कराने का आदेश तक नहीं दिया।
योगी के सजातीय विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने युवती से दुष्कर्म किया, शिकायत करने पर उसके पिता को ही जेल में डलवा दिया, और इतनी बुरी तरह पिटवाया की उसकी मौत हो गई, लेकिन मोदी-योगी ने सीबीआई जांच नहीं होने दी। बागपत जेल में गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई लेकिन मोदी-योगी सरकार सीबीआई जांच से इनकार करती रही, हाईकोर्ट ने आदेश दिया तो मजबूरी में सीबीआई जांच करानी पड़ी। भाजपा की डबल इंजन सरकारों के ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं जहां सीबीआई जांच की अपील ठुकरा दी गई। आर्यन हत्याकांड का हश्र भी यही होने वाला है।
हां मोदी से लेकर संघी और सारे कट्टरपंथी संगठन किसी गैर भाजपा राज्य में हुई हिंसा की किसी भी घटना पर उबल पड़ते हैं और मोदी भी जनता की ‘भावनाओंÓ की कद्र करते हुए सीबीआई जांच करवाने में देर नहीं करते। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना इसका ताजा उदाहरण है। जो प्रधानमंत्री डेढ़ साल से जल रहे मणिपुर में न तो हिंसा रोकने की कोई पहल कर रहा है और न ही हिंसा रोकने और उसके मूल कारणों को जानने के लिए सीबीआई जैसी जांच एजेंसियां लगा रहा वो गैर भाजपा शासित राज्यों में छोटी सी घटना के लिए सीएम-मंत्री तक को सीबीआई के जरिए जेल में डलवा देता है, वह अपनी डबल इंजन सरकारों में होने वाले बड़े बड़े घोटालों से लेकर दंगे, हिंसा के प्रति धृतराष्ट की तरह आंखें बंद कर लेता है।
आर्यन मिश्रा के माता पिता की सीबीआई जांच वाली मांग तब ही पूरी हो सकती थी कि जब यह घटना किसी गोरक्षक खासकर सरकारी गोरक्षकों ने न की होती और किसी गैर भाजपाई राज वाले प्रदेश में होती। क्योंकि ये दोनों तथ्य पीडि़त परिवार के विपरीत हैं ऐसे में सीबीआई जांच नामुमकिन ही मानी जाए तो सही होगा।
कथित सामाजिक संगठनों का दो मुहांपन देखिए कि आर्यन मिश्रा की हत्या पर तो विरोध प्रदर्शन और मार्च करने सड़क पर उतर आए और सीबीआई जांच की मांग कर डाली, बीते दस वर्षों में इन गोरक्षकों ने न जाने कितने अखलाक, जुनैद की जान ले ली लेकिन कोई संगठन सीबीआई जांच की मांग तो दूर विरोध करने आगे नहीं आया। एक दशक पहले जब ये संघी-भाजपाई मुसलमानों के खिलाफ हिंदुओं में डर और नफरत का माहौल बना रहे थे। जब संघी-भाजपाई ये बारूद का ढेर तैयार कर रहे थे और लोगों को चार्ज किया जा रहा था उसमें एक दिन पलीता लगना ही था। जब ये संघी दंगाई गोतस्करों के नाम पर हत्याएं कर रहे थे सार्वजनिक रूप से हिंसा कर रहे थे तब सभी सामाजिक संगठन चुप थे, अब हिंसा की आग हिंदुओं को भी चपेट में लेने लगी तो आपको दर्द हुआ। यदि दस साल पहले ही विरोध शुरू हो जाता तो नौबत गोतस्करों से आर्यन मिश्रा की हत्या तक नहीं पहुंचती। अभी एक आर्यन हत्यारों का शिकार बना है यदि अब भी इनका तगड़ा विरोध नहीं किया तो ये भस्मासुर पूरे समाज के लिए खतरनाक साबित होंगे। अगर समाज अभी नहीं चेता तो जर्मन कवि मार्टिन नीमोलर यह कालजयी रचना भारत में भी चरितार्थ हो जायेगी।