फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सीएलयू, सब डिवीजन के बिना ही जमीनों की अवैध रजिस्ट्री करने के लिए कुख्यात बडख़ल तहसील में अब फर्जी रजिस्ट्रियां भी हो रही हैं। तहसील के रिश्वतखोर अधिकारियों ने सत्ता के चहेते भूमाफिया से मिलीभगत कर बुजुर्ग महिला सुदेश अरोड़ा का एनआईटी तीन सी ब्लॉक में करीब दो सौ गज के प्लॉट की रजिस्ट्री कर डाली। पीडि़ता की शिकायत पर पुलिस मामले की जांच कर रही है लेकिन खरीदारों को छूट भी दी गई है कि वह शिकायतकर्ता को साम-दाम-दंड-भेद कर समझौता करने को मजबूर करें, क्योंकि यदि शिकायतकर्ता पीछे नहीं हटी तो खरीदार के साथ ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले और रजिस्ट्री की धोखाधड़ी में शामिल तहसील के हरामखोर अधिकारी भी फंसेंगे।
65 वर्षीय सुदेश अरोड़ा के अनुसार उन्होंने तीस सी 58 बीपी प्लॉट 2005 में खरीदा था। बीते दिनों उन्हें पता चला कि इस मकान पर कोई हेमंत नागपाल नामक व्यक्ति निर्माण करवा रहा है। तीन नंबर चौकी में शिकायत दी तो जांच शुरू हुई। हेमंत नागपाल ने पुलिस को बताया कि उसने यह प्लॉट किसी आशा देवी से दस जनवरी 2025 को खरीदा है, प्लॉट विधायक धनेश अदलखा के सजातीय संजय अदलखा ने दिलवाया है। बताया जा रहा है कि हेमंत नागपाल ने यह प्लॉट निजी इस्तेमाल के लिए नहीं खरीदा था बल्कि वह भी इसे किसी तीसरे व्यक्ति को बेचने वाला था। निर्माण कार्य का दिखावा जमीन पर कब्जा दर्शाने के लिए किया जा रहा था। समझा जा सकता है कि हेमंत को भी फर्जी रजिस्ट्री की जानकारी थी इसीलिए वह किसी तीसरे व्यक्ति को बेच कर मोटा मुनाफा कमा कर निकलना चाहता था।
जानकारों के अनुसार बडख़ल विधानसभा में केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर, विधायक और सत्ता के चहेते भूमाफिया खाली पड़ी जमीन, या कमजोर बुजुर्गों की जमीनों को कब्जा कर फर्जी रजिस्ट्री करवाने में जुटे हैं। ये लोग विवादित जमीन, लंबे समय से खाली, आर्थिक-राजनीतिक रूप से कमजोर लोगों की जमीन पर कब्जा कर अजनजान से लोगों के नाम से बेचते हैँ, रजिस्ट्री में बेचने वाला तो अनजान व्यक्ति होता है लेकिन धनराशि ये भूमाफिया हड़प लेते हैं। इस खेल में तहसील के रिश्वतखोर अधिकारी भी शामिल हैं। सुदेश अरोड़ा वाले केस से समझा जा सकता है कि तहसील में फर्जी व्यक्ति को जमीन का मालिक बना कर खड़ा किया जाता है और जमीन की रजिस्ट्री करवा दी जाती है। जानकार कहते हैं कि अधिकतर मामलों में बेचने वाला और खरीदार सब एक ही थाली के चट्टे बट्टे होते हैं यानी पैसों का लेनदेन सिर्फ रजिस्ट्री में होता है, फर्जी रजिस्ट्री के जरिए मालिकाना हक हासिल कर लिया जाता है। जाहिर है कि करोड़ों की जमीन का हेरफेर तहसील के हरामखोर अधिकारी मोटे दाम लेने के बाद ही करते हैं।
तीन सी 58 बीपी का केस तो खुल गया इसलिए तहसील में भ्रष्टाचार सामने आ गया यदि गहनता से जांच हो तो इस तरह की सैकड़ों रजिस्ट्रियां की हुई पाई जाएंगी। जानकार कहते हैं कि केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का चममा अरोड़ा अंडेवाला तो पचासों करोड़ की जमीनों पर अवैध कब्जे और फर्जी रजिस्ट्री करवाने में महारत रखता है। बताया जा रहा है कि एनआईटी तीन के डी ब्लॉक मेन रोड पर तीन-चार प्लाट काफी लंबे अर्से से विवादित थे, इनके मालिकों का कुछ पता नहीं चल रहा था। गूजर के चेले अरोड़ा अंडेवाले ने इन पर बाउंड्री वाल बनवा डाली, और एक पर शेड डाल मोटे किराए पर उठा दिया। समझा जा सकता है कि तहसील के हरामखोर अधिकारियों की मदद से ही अंडेवाले ने इन प्लॉटों का मालिकाना हक हासिल किया होगा। इसी अंडे वाले ने बडख़ल में अवैध जमाई कॉलोनी के पास अवैध प्लॉटिंग भी कर रखी है और बाटा पुल उतरते ही सेक्टर 11 डीएलएफ में बारात घर भी बना रखा है। जानकार बताते हैं कि इन सबमेंं अंडेवाले ने बेनामी रजिस्ट्रियां कराई हैं ताकि जांच होने पर उसका नाम नहीं आए। यह सब तहसील वालों की कृपा से ही मुमकिन हो सकता है। बता दें कि अरोड़ा अंडे वाला भाजपा की पहली बार बनी सरकार में मंत्री विपुल गोयल के जूते उठाने लगा था, लेकिन दूसरी बार उसका टिकट कटते ही केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के यहां दरी बिछाने, जय जयकार करने लगा और जमीनों पर कब्जा करने की महारत के कारण डीलर मंत्री का खास बन गया।
बडख़ल तहसील में फर्जी रजिस्ट्रियों का खेल काफी पहले से चल रहा है। मज़दूर मोर्चा ने दिसंबर 2024 के अंक में बडख़ल तहसील में चल रहा अवैध प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री का खेल शीर्षक से तहसील में भ्रष्टाचार का विस्तार से उल्लेख किया था। एसडीएम त्रिलोकचंद ने दावा किया था कि तहसील में सब कुछ पाक साफ है, एक भी फर्जी रजिस्ट्री लाकर दिखाओ। एसडीएम महोदय, अब तो आपके सामने तीन सी 58 बीपी की फर्जी रजिस्ट्री आ गई है, अगर आप ईमानदार हो तो इस रजिस्ट्री के लिए जितने अधिकारी जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कार्रवाई करो, यदि आपके बस में नहीं है तो मुख्यालय को या सरकार को इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का पत्र लिखो। यदि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते तो यह मानना गलत नहीं होगा कि फर्जी रजिस्ट्रियां आपकी सहमति से ही हुई होंगी।