फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अधिकारियों को सूचना दिए बिना विदेश यात्रा करने वाला जेई प्रवीण कुमार नगर निगम में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, नगर निगम के सेक्टर 25 स्थित बूस्टर से बीती 11 जनवरी की रात एक टैंकर, ट्रॉली और बोरिंग में इस्तेमाल होने वाले 24 इंच के लगभग बीस पाइप गायब हो गए। चर्चा है कि ये पाइप गायब नहीं हुए बल्कि महंगे-महंगे शौक करने वाले एचकेआरएन जेई प्रवीण कुमार ने पार करवाए हैं, माना जा रहा है कि ये सारा सामान बेच दिया गया है। एसडीओ विनोद कुमार द्वारा चोरी की इस घटना को दबाया जाना दाल में काला होने की ओर संकेत दे रहा है। चर्चाओं में कितनी सच्चाई है ये तो बूस्टर के स्टोर रजिस्टर में दर्ज सामान और मौके पर मौजूद सामान का सत्यापन करने के बाद ही सामने आ सकती है।
सेक्टर 25 स्थित बूस्टर हाउस में ट्यूबवेल ऑपरेटर योगेश, बेलदार मुकेश और चौकीदार बाबूलाल तैनात हैं, इसकी सुपरविजन जेई प्रवीण कुमार करते हैं। बूस्टर परिसर में नगर निगम का बोरिंग, जलापूर्ति से संबंधित काफी सामान पड़ा हुआ था। उसमें एक टैंकर , दो पहिए की ट्रॉली और बोरिंग के पाइप भी पड़े थे। नगर निगम सूत्रों के अनुसार 11 जनवरी की शाम प्रवीण कुमार ने बूस्टर से टैंकर – ट्रॉली और पाइप निकलवा दिए। चौकीदार बाबूलाल के अनुसार उसने जेई साहब के कहने पर केवल ट्रॉली ही निकलवाई थी, बाकी का सामान बूस्टर के दूसरी ओर से निकाला गया होगा। चौकीदार की मानें तो साहब ने ट्रॉली रिपेयर करवाने के लिए बाहर भेजी है, लगभग बीस दिन हो गए लेकिन न तो ट्रॉली वापस आई न टैंकर और पाइप।
सूत्र बताते हैं कि जेई की करतूत की जानकारी निगम के आला अधिकारियों को भी है, यहां तक कि एसडीओ विनोद और एसडीओ करतार दलाल तो मौका मुआयना करने भी गए थे, जांच में सामान गायब भी पाया गया लेकिन चहेता प्यादा होने के कारण एसडीओ साहब प्रवीण कुमार को बचाने की कवायद में जुटे हैं। जब इस संवाददाता ने एसडीओ विनोद से जानकारी चाही तो उन्होंने पहले तो मामले की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया लेकिन उनके द्वारा मौका मुआयना करने की जानकारी होने की बात की गई तो बोले कि जेई को बुलवा लेंगे आप भी आ जाना आमने सामने बात हो जाएगी। चोरी के मामले में आमना-सामना कराने से बेहतर है कि जांच करो और गलत पाए जाने पर कार्रवाई करो। जेई जब कमाऊ पूत हों तो कार्रवाई कौन करे।
जानकार कहते हैं कि अधिकारी और पार्षद सबकी थैलियां भरनी हों तो जेई ये सब हरकत करेंगे ही। निगम अधिकारियों के मुताबिक पार्षद रवि भगत की मोटी मांगों के कारण अधिकतर जेई वार्ड तीन में तैनाती नहीं चाहते। पार्षद महोदय की डिमांड पूरी करने के लिए चोरी तक करने को मजबूर हैं। पाठकों को याद होगा कि रवि भगत ने इसी जेई से उसकी नेपाल यात्रा को निगम अधिकारियों के सामने मुद्दा न बनाने के एवज में एक लाख रुपये की डिमांड की थी, जेई ने किसी के हाथ तीस हजार रुपये भिजवाए थे तो पार्षद महोदय बहुत नाराज हुए थे। चर्चा है कि पार्षद महोदय की मोटी मांगें पूरी करने के लिए जेई प्रवीण ने यह काम किया। पाठकों को याद होगा कि पार्षद गायत्री देवी ने तो शपथ ग्रहण से पहले ही पचास लाख रुपये की डिमांड कर दी थी, तो पार्षद जसवंत सिंह अवैध निर्माण करवाने के एवज में पांच लाख रुपये मांग रहे थे। रवि भगत ने तो संवाददाता को ही उनके वार्ड में होने वाले प्रत्येक अवैध निर्माण के लिए दस हजार रुपये का ऑफर दिया था। पार्षद की सारी फटीकें भुगतने के लिए अब ये सब तो करना ही पड़ेगा। जाहिर सी बात है कि जेई साहब फिर अपना भी मोटा हिस्सा लेंगे क्योंकि उनको भी तो लाखों रुपये कीमत वाले फोन, हर महीने पंद्रह से बीस हजार रुपये ब्रांडेड जूते, कपड़े, गैजेट्स, महंगी कार या एसयूवी आदि पर खर्च करने होते हैं, ये सारे खर्च निगम से बतौर वेतन मिलने वाले 33 हजार रुपयों में तो पूरे किए नहीं जा सकते।
निगम में जेई प्रवीण कुमार के कांड की चर्चा जोरों पर है, निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा से लेकर एसई, चीफ इंजीनियर को इसकी जानकारी न हो ऐसा नहीं हो सकता, बावजूद इसके जांच और कार्रवाई के बजाय इन अधिकारियों का चुप्पी साधना बताता है कि निगम में भ्रष्टाचार संस्थागत रूप ले चुका है। दरअसल, जब ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार और लूट खसोट मची हो तो बूस्टर से टैंकर , ट्रॉली, पाइप चोरी होना बड़ी बात नहीं।