बल्लबगढ़ (मज़दूर मोर्चा) बीते सप्ताह, लाइब्रेरी से पढ़कर श्याम कॉलोनी स्थित अपने घर लौट रही 17 वर्षीय लड़की पर, एकतरफा प्यार के चलते, तमंचे से फायर करने वाले जतिन मंगला को क्राइम ब्रांच सेक्टर 65 से मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया था। अदालत से रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ की जा रही थी। यकायक गुरुवार को पुलिस ने उसके साथ हुई एनकाउंटर की कहानी रच डाली। पुलिस की कहानी में कहा गया है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया था कि उसके पास दो तमंचे थे, एक तो वह मौका-ए-वारदात पर छोड़ आया था जिसे पुलिस ने उसी दिन कब्जे में ले लिया था। दूसरा उसने गांव कबूलपुर में कहीं छिपा रखा है जिसे वह बरामद करा सकता है। इसी छिपाए गए तमंचे की बरामदगी के लिए पुलिस उसको लेकर कबूलपुर पहुंची थी। वहां पहुंच कर आरोपी ने यकायक पत्थरों के ढेर में से एक तमंचा निकाल कर पुलिस पर फायर करके निकल भागने का प्रयास किया। इसके जवाब में पुलिस ने उसके पैर में गोली मार कर उसे घायल करके अस्पताल में दाखिल कराने के साथ-साथ पुलिस पर हमला तथा हत्या का प्रयास करने का एक और मुकदमा थाना सेक्टर 58 में दर्ज करा दिया।
जरा सी भी समझ रखने वाला, पुलिस की इस मनगढ़ंत कहानी में पड़े छेदों को साफ देख सकता है। जो आरोपी अपना ही हथियार मौके पर फेक कर फरार हो गया हो और पुलिस की दबिश पडऩे पर स्वत: पेश हो गया हो, वह मानसिक रोगी तो हो सकता है परन्तु पेशेवर अपराधी नहीं इसलिए उसके पास दूसरा कोई असलहा होने का औचित्य नजर नहीं आता। दूसरे, जो लड़का दो-तीन दिन क्राइम ब्रांच की हिरासत में रह कर ठीक से चल पाने की स्थिति में न हो और बुरी तरह से दहशतजदा हो उसके द्वारा पुलिस पर हमला करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। विदित है कि जब भी पुलिस पार्टी किसी आरोपी को निशानदेही एवं बरामदगी कराने के लिए लेकर जाती है तो वह बाकायदा हथकड़ी से बंधा होता है। आरोपी और पुलिसकर्मी के बीच एक फुट से अधिक का फासला भी नहंी होता। ऐसे में भला कोई आरोपी कैसे पत्थरों में से कोई असलहा निकाल कर पुलिस पर फायर करके भागने का प्रयास कर सकता है? यदि वास्तव में ही ऐसा हुआ था और पुलिस की यह कहानी सच्ची है तो उस आरोपी को ले जाने वाली पुलिस पार्टी वाले महा निकृष्ट व नालायक थे।
दबी जुबान से पुलिस वाले यह कहते बताए जा रहे हैं कि वे अपराधियों को खौफजदा करने के लिए इस तरह की एनकाउंटरबाजी करते हैं। इस संबंध में पुलिस आयुक्त सतेेंद्र गुप्ता से बातचीत करने के लिए उन्हें फोन लगाया, उनके रीडर ने पीआरओ यशपाल से बात करने को कहा। संवाददाता ने इससे इनकार करते हुए कहा कि वह तो केवल सीपी साहब का ही बयान लेना चाहता है। तुरंत पीआरओ यशपाल का फोन आ गया उन्हेें बताया गया कि यह संवादादाता सीपी साहब का वर्जन इस एनकाउंटर के बारे में जानना चाहता है। इस पर पीआरओ ने कहा कि यह कहानी नहीं है यह सच्ची हकीकत है, पूछने पर उन्होंने कहा कि वे सीपी साहब के बिहाफ पर ही बोल रहे हैं।