जेई तो सिर्फ मोहरा, अधिकारियों की कमाई का बड़ा स्रोत है हूडा की जमीनों पर अतिक्रमण

जेई तो सिर्फ मोहरा, अधिकारियों की कमाई का बड़ा स्रोत है हूडा की जमीनों पर अतिक्रमण
September 25 06:30 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हूडा की ग्रीन बेल्ट में बने दो शराब ठेकों को नहीं तोडऩे के एवज में डेढ़ लाख रिश्वत ले रहे जेई नरेश कुमार को एंटी करप्शन ब्यूरो ने (एसीबी) बीते शुक्रवार रंगेहाथों पकड़ लिया। नरेश तो पकड़ा गया लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि हूडा में भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा। जेई अकेले डेढ़ लाख रुपये जैसी बड़ी रकम नहीं डकार सकता, जाहिर है कि वह यह रिश्वतखोरी ऊपर बैठे आला अधिकारियों की सहमति से ही कर रहा था, यानी घूस की इस राशि में से वह खुद छोटा सा हिस्सा रख कर बाकी ऊपर तक पहुंचाता था।

लूट कमाई का यह पद नरेश को मुफ्त में नहीं मिल गया। इसके लिए उसने उच्च अधिकारियों से लेकर राजनेताओं तक के न केवल चरणचुंबन किए हैं बल्कि लूट कमाई मेें नियमित हिस्सापत्ती देना होता है। नेताओं की कृपा से टिके ये ऊपर के अधिकारी नरेश आदि द्वारा लूट कमाई से इकट्ठा की गई धनराशि में से अच्छी खासी भेंट निकाल कर नेताजी के चरणों में समर्पित करते हैं। यदि ऐसा न होता तो सदाचार का ढिंढोरा पीटने वाली ट्रिपल इंजन सरकारों में रिश्वतखोरी, कमीशनखोरी और लूटमार चरम पर नहीं होती।

दरअसल नरेश तो हूडा के भ्रष्टाचार के वृक्ष की एक पत्ती भर है। इस वृक्ष (हूडा) की हर शाखा में भ्रष्टाचार व्याप्त है। हूडा की ग्रीन बेल्ट में सिर्फ अशोक एंक्लेव या ऊंचागांव में ही अतिक्रमण और अवैध कब्जे नहीं है, सेक्टर 46, 20, 21, 16 आदि के साथ ग्रेेटर फरीदाबाद में बड़े पैमाने पर हैं। इन अवैध कब्जों या अतिक्रमण पर हूडा कार्रवाई नहीं करता क्योंकि सारी जगहों से बाकायदा महीना तय है, जो हूडा के खाते में नहीं बल्कि साहब लोगों की जेब में जाता है। सूत्र बताते हैं कि ग्रेटर फरीदाबाद मेें हूडा की जमीन, ग्रीन बेल्ट, स्लिप रोड पर किए गए कब्जों से केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के सजातीय अवैध कब्जा-अतिक्रमण माफिया बाकायदा वसूली करके ईमानदारी से एसडीओ, जेई के जरिए आला अधिकारियों तक पहुंचाते हैं।

भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि हूडा की ओर से साल छह महीने में अतिक्रमण, अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान इसलिए नहीं चलाया जाता कि सरकारी जमीन कब्जे से छुड़वा ली जाए। अभियान दो कारणों से चलाया जाता है। पहला कि कागजों में कार्रवाई दर्ज की जा सके। दूसरा, अभियान के बहाने कब्जाधारियों को यह बताया जाता है कि असल मालिक हम हूडा वाले हैं और हमें महीना देने में कोताही मत करना। जाहिर है कि तोडफ़ोड़ की गाज उन्हीं अवैध कब्जों पर गिरती है जो चढ़ावा नहीं चढ़ाते। हूडा का शायद ही कोई ऐसा तोडफ़ोड़ अभियान हो जिसमें तोडफ़ोड़ में पक्षपात के आरोप न लगते हों।

सारा खेल नेता मंत्री विधायकों के इशारे पर ही होता है इसलिए वसूली के लिए कब, कितनी देर और कहां अभियान चलाना है यह सब पहले से ही तय होता है। अधिकारी अभियान शुरू कर पहले से ही तय निर्माण में तोडफ़ोड़ करते हैं, मिशन पूरा होते ही नेताजी के चमचे दुकानदार विरोध करना शुरू कर देते हैं, इसके बाद नेताजी कार्रवाई नहीं होने का आश्वासन दे अभियान रुकवा कर अपना जलवा कायम करते हैं, उधर तोड़े गए निर्माण वाले भी अधिकारियों से मांडवाली कर धंधा फिर से जमा लेते हैं। यही कारण है कि मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की मुहावरे की तर्ज पर हुडा अभियान भी चलाता रहता है और अतिक्रमण व अवैध कब्जे भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

इनका उदाहरण सेक्टर 21सी, 15, 16, 46 और आसपास के सेक्टरों में 27 गज के बूथ के रूप में देखा जा सकता है। हैं तो ये बूथ, लेकिन पब्लिक कॉरिडोर पर अतिक्रमण कर पचास गज या उससे भी ज्यादा बड़ी दुकान की शक्ल ले चुके हैं। सेक्टर 46 में तो बूथों पर डबल स्टोरी इमारतें खड़ी की जा चुकी हैं। सेक्टर 21 डी में तो दुकानदारों ने मुख्य सड़क की ओर ही दरवाजा खोल दिया है। यहां भी ग्रीन बेल्ट और पार्किंग पर बाकायदा दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है कुछ तो किराए पर भी उठाते हैं। सेक्टरों में संचालित अनेक नर्सिंग होम वालों ने तो नक्शे से कहीं अधिक निर्माण कर रखा है, कई नर्सिंग होम की बिल्डिंग नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी) के मानकों का खुला उल्लंघन है लेकिन खर्चा पानी की व्यवस्था होने के कारण अधिकारी इनकी ओर देखते ही नहीं। एससीओ में कार्यालय की जगह होटल, जिम आदि धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। बीती सात जुलाई को सेक्टर 16 ए मार्केट के एससीओ में चलाए जा रहे आकाश इंस्टीट्यूट और एआई बैक के नाम से चलाए जा रहे रेस्टोरेंट में भयंकर आग लगी थी। हूडा के हरामखोर अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की आज तक पता नहीं चल सका है। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि दो साल पहले हूडा अधिकारियों ने अतिक्रमण, अवैध निर्माण करने वाले पांच सौ बूथ चिह्नित किए थे, इन पर कार्रवाई नहीं की जानी थी बल्कि कार्रवाई का डर दिखा कर वसूली की रकम तय करनी थी। वसूली के दो साल बाद भी आज तक एक बूथ पर कार्रवाई नहीं हुई।

कहने को हूडा में भी एन्फोर्समेंट शाखा है लेकिन इसका काम कागजों पर कार्रवाई करना ज्यादा है, बताया जाता है कि मोटी कमाई होने के कारण अनेक-जेई एसडीओ एन्फोर्समेंट शाखा में पोस्टिंग पाने की जुगाड़ में लगे रहते हैं, जिसकी थैली मोटी हो या जिसका जैक मजबूत हो उसे ही खजाने की चाभी सौंपी जाती है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में जेई विजय राठौर के पास चार्ज
है।

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Mazdoor Morcha
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