ग्रीवांस कमेटी : सत्ता का मजा चखाने के लिए नेताओं के दल्ले बनाए गए सदस्य

ग्रीवांस कमेटी : सत्ता का मजा चखाने के लिए नेताओं के दल्ले बनाए गए सदस्य
July 04 17:02 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नायब सैनी सरकार ने हाल ही में जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति फरीदाबाद की 47 सदस्यीय कमेटी की घोषणा की है। कमेटी में विधायक, मंत्री के दल्लों को रखा गया है या पद नहीं मिलने के कारण पार्टी से नाराज चल रहे लोगों को शामिल किया गया है। जाहिर है कि जिस ग्रीवांस कमेटी में भ्रष्टचारी, दलाल टाइप के लोग बैठे होंगे वहां आम जनता को इंसाफ के नाम पर धोखा ही मिलने वाला है।

ग्रीवांस कमेटी में सबसे चर्चित नाम अमित आहूजा का है, वही अमित आहूजा जो विधायक भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा का दांया हाथ है और उसके लिए वसूली की स्कीमें बनाता है। खेड़ी गूजरान में ग्राम पंचायत की जमीन पर अवैध कब्जा कर राधा कृष्ण गो सेवा धाम ट्रस्ट के नाम से चलाई जा रही गोशाला को विधायक अदलखा के इशारे पर हथियाने के लिए इसी अमित आहूजा ने संचालिका मंजू यादव को एक करोड़ रुपये दिलाने और उसमें से नब्बे लाख रुपये लूट बांट करने का ऑफर दिया था। नायब सैनी ने उसका टैलेंट देखते हुए ग्रीवांस कमेटी में जगह दी है। एक अन्य सदस्य हैं उमा शंकर गर्ग, ये हूडा के बड़े दलाल और प्रॉपर्टी डीलर हैं। इनका असली काम हूडा के अधिकारियों से सेटिंग-गेटिंग कर ई ऑक्शन के जरिए हूडा के रिज्यूम प्लॉट खरीदना और फिर उन पर बिल्डर फ्लोर बना कर मोटी कमाई करना है। इनकी विस्तारवादी नीति से अनेक जमीन मालिक परेशान हैं। उमाशंकर गर्ग जैसे सदसयों के रहते ऐसे पीडि़तों की ग्रीवांस कमेटी में कितनी सुनवाई होगी, कौन से कष्टों का कैसा निवारण होगा, आसानी से समझा जा सकता है।

इस कमेटी में वार्ड नंबर तीन के पार्षद रवि भगत को भी शामिल किया गया है। कहने को तो ये जन प्रतिनिधि हैं लेकिन निगम के भ्रष्ट जेई परवेज आलम के साथ मिल कर वार्ड में अवैध निर्माण कराने के ठेके लेते हैं। पार्षद जी खुद को मां काली का उपासक और मंदिर का पुजारी बताते हैं बावजूद उन्हें हत्या किए जाने का भय है और उन्होंने पुलिस की सुरक्षा हासिल कर रखी है। यह अलग बात है कि गनमैन का इस्तेमाल वो सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि जनता में टोरा कायम करने के लिए ज्यादा करते हैं। पार्षद जी अपने वार्ड की टूटी सड़कों, शुद्ध पेयजल, सीवर जाम की समस्या तो समाप्त करवा नहीं पा रहे लेकिन ग्रीवांस कमेटी में आने वाली शिकायतें जरूर सुनेंगे।

कमेटी में पूर्व मेयर और वार्ड बारह की पार्षद सुमन बाला को भी सदस्य बनाया गया है। इनके कार्यकाल में नगर निगम में दो सौ करोड़ का घोटाला हुआ। उनके दामन पर भी ठेकेदारों से वसूली के दाग हैं। एक पत्रकार की विधवा जो परिवार चलाने के लिए ट्यूशन पढ़ाती थी मेयर बनने के बाद उसने सेक्टर 11 जैसे महंगे इलाके में बड़ा सा मकान बना डाला। निगम में आज भी चर्चाएं होती हैं कि भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा ने ठेकेदारों से वसूली करवा कर अपनी चेली सुमनबाला को न केवल सेक्टर 11 में प्लाट दिलवाया बल्कि मकान भी बनवाया। अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों से मैडम इतनी करीब रही हैं कि अवैध बिल्डर फ्लोर पर कार्रवाई रुकवाने के लिए उसमें खुद ही किराए पर रहने लगीं। एनआईटी 3 ए 199 में अवैध रूप से बनाए गए पांच मंजिला फ्लैटों को पूर्व निगमायुक्त यशपाल ने सील करने का आदेश जारी किया था। बिल्डर ने उनमें से एक फ्लैट तत्कालीन मेयर सुमनबाला को किराए पर दे दिया, उसके बाकी सारे फ्लैट भी अच्छे दामों पर बिक गए, निगमायुक्त का आदेश धरा का धरा रह गया।

पार्टी ने भ्रष्टाचारियों के साथ ही रूठे हुए कार्यकर्ताओं को भी सदस्यता का लॉलीपॉप थमाया है। सैनिक कॉलोनी निवासी भाजपा कार्यकर्ता अंजू भड़ाना नगर निगम चुनाव में भाग्य आजमाना चाहती थीं।
पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय मैदान में उतरी थीं। सूत्रों के अनुसार तब उन्हें भविष्य में कुछ अच्छा पद देने का प्रलोभन देकर भाजपा कैंडिडेट के पक्ष में बैठने को मना लिया गया था सो ग्रीवांस कमेटी का सदस्य बना कर वादा पूरा किया गया। कमेटी के अन्य सदस्योंं के बारे में भी जानकारी बटोरी जा रही है, अगले अंकों में उनकी भी तारीफ बयान की जाएगी। यह खुला सच है कि जनता की गाढ़ी कमाई लुटा कर की जाने वाली ग्रीवांस कमेटी की बैठक सरकार के सस्ती लोकप्रियता बटोरने के पाखंड और नेता-मंत्रियों व अफसरों के लिए पिकनिक इवेंट से ज्यादा कुछ नहीं है। इसमें आम जनता तो अपनी शिकायत रख भी नहीं सकती, अधिकारी अपनी सहूलियत के हिसाब से दस पंद्रह शिकायतें चुनते हैं और नेता-मंत्री उन पर कार्रवाई करने के आदेश नाटक करते हैं, तालियां बजती हैं मीडिया कवरेज होता है, काम खत्म। अब जनता की जेब से इन 47 सदस्यों की पिकनिक का भी पैसा निकाला जाएगा, यानी कुल मिलाकर आम जनता के खर्च पर सरकारी पाखंड के चर्चे होंगे।

समझने वाली बात यह भी जरूरी है कि इस तरह वाहियात कमेटी की सदस्यता प्राप्त करने वाले को आखिर मिलता क्या है? मिलने के नाम पर ऐसे टुच्चे-पुच्चे सड़क छाप नेताओं के लिए इतना ही काफी होता है कि वे जिले के अफसरों व नेताओं के अगल बगल बैठ कर जनता को अपना रुतबा दिखा कर अच्छे खासे लोगों को बेवकूफ बना कर अपनी दिहाड़ी खड़ी कर लेते हैं।

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Mazdoor Morcha
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