क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा पीछे है;निजीकरण, व्यवसायीकरण, भगवाकरण, लूटकरण; अर्थात धन्ना सेठ कॉर्पोरेट के सामने बिछ जाना, उन्हें सरकारी बेशकीमती ज़मीनें अर्पित करना, उन्हें लूट की छुट देना. बिजली गई!! सुनते ही कान खड़े हो जाते हैं, दिल की धक-धक तेज़ हो जाती है, सब कुछ बंद हो जाता है!! ‘बिजली के बगैर विकास नहीं’, यह सच्चाई भी सबसे पहले कॉमरेड लेनिन ने ही समझी थी. जो सरकारी महकमा जीवन के लिए जितना ज्यादा ज़रूरी है, निजीकरण के सरकारी अजेंडे पर उसका नाम, उतना ही ऊपर है. ‘बिजली सेवाओं का आधुनिकीकरण, तकनीकीकरण करना है, जिससे इसकी दक्षता बढ़े, लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें’, इस जुमले का मतलब है, बिजली महकमे को अडानी-अंबानी को सौंपना है. हर राज्य में बिजली विभाग को निजी कॉर्पोरेट को या तो सौंप दिया गया है, या सौंप देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है.
‘विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति’ ‘National Coordination Committee of Electricity Employees & Engineers (NCCoEEE), नाम से, अखिल भारतीय स्तर पर अपना मोर्चा क़ायम कर, देश भर के बिजली विभाग में काम कर रहे कर्मचारियों ने, ट्रेड यूनियन आंदोलन के सामने एक बहुत सुखद आश्चर्यजनक और शानदार मिसाल पेश की है. इस साझे मोर्चे का गठन तो 5 साल पहले 2000 में हुआ था, लेकिन उम्मीद नहीं थी कि सुविधाभोगी और भ्रष्ट समझे जाने वाले बिजली विभाग के कर्मचारी और इंजिनियर एक साथ मिलकर संघर्ष करेंगे. बहुत ख़ुशी है कि मेरी आशंकाएं ग़लत साबित हुईं. ‘विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति’ की कुल सदस्य संख्या, 27 लाख से भी ज्यादा है!!
हर वक़्त राम-राम जपने वाली यूपी सरकार, बिजली विभाग को निजी हाथों में देने की सभी तैयारियां कर चुकी है. थोक में कर्मचारियों को नोकरी से निकाला जाना है. इसके जवाब में लेकिन ‘विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति’ के झंडे के नीचे, यूपी के बिजली कर्मचारियों ने बेहतरीन आंदोलन खड़ा किया है. 29 मई से देश के सभी 27 लाख बिजली कर्मचारी/ इंजिनियर, यू पी के अपने साथियों के समर्थन में, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाले थे, लेकिन 9 जुलाई की देश व्यापी हड़ताल के मद्देनजऱ वह कार्यक्रम स्थगित हो गया. यू पी के लगभग सभी मज़दूर और किसान संगठन बिजली कर्मचारियों के साथ आ गए हैं. यू पी में तहरीक़ की फिज़़ा बनने लगी है. प्रदेश को हिंदुत्व की भट्टी में जाने से रोकने का भी यह ही तरीका है.
इसी तरह, निजीकरण के विरोध में, सभी सरकारी विभागों के कर्मचारियों ने, देश स्तर पर पहले विभागीय एकता क़ायम करनी चाहिए. उसके अगले चरण में सभी अखिल भारतीय विभागीय संघर्ष समितियों ने, एक अखिल भारतीय संयुक्त संघर्ष समिति क़ायम करनी चाहिए. उसके बाद, संगठित, असंगठित, मज़दूर, मेहनतक़श किसान संगठनों ने एक साझा मोर्चा खड़ा कर, जीवन-मरण के मुद्दों पर तीखे जन-आंदोलन खड़े करने चाहिएं.
दिल ना उम्मीद नहीं, नाकाम ही तो है लंबी है गम की शाम, मगर शाम ही तो है क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा, फऱीदाबाद, यू पी के आन्दोलनरत, संघर्षशील बिजली कर्मचारियों के साथ अपनी एकजुटता सॉलिडेरिटी का ऐलान करता है.