सेक्टर 23ए कम्युनिटी सेंटर पर कब्जे के लिए पूर्व पार्षद नेपाल से लाया एके-47

सेक्टर 23ए कम्युनिटी सेंटर पर कब्जे के लिए पूर्व पार्षद नेपाल से लाया एके-47
June 07 05:02 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 23 ए कम्युनिटी सेंटर पर कब्जेदारी को लेकर भाजपा के धर्मवीर खटाना और ज्ञानेंद्र भारद्वाज के बीच विवाद सड़क तक आ गया है। वार्ड नंबर चार की पार्षद संगीता के पति ज्ञानेंद्र भारद्वाज और वार्ड पांच की पार्षद शीतल के ससुर धर्मवीर खटाना अपने समर्थकों के बीच एक दूसरे को देख लेने की धमकियां देते नजर आ रहे हैं। धर्मवीर खटाना तो कम्युनिटी सेंटर पर कब्जा बनाए रखने के लिए एके-47 तक इस्तेमाल करने के दावे कर रहे हैं। बकौल खटाना वह खुद नेपाल से एके-47 लेकर आए हैं। उन्होंने यह दावा अपने समर्थक जगदीश मारवाड़ी से फोन काल के दौरान किया। मारवाड़ी ने उस ऑडियो का कुछ हिस्सा वायरल कर दिया। इसके बाद से भाजपाइयों में चर्चाओं का दौर गर्म है। बताया जाता है कि ज्ञानेन्द्र भारद्वाज कभी धर्मवीर खटाना का खास चेला रहा है और उन्हीं से राजनीति के गुण सीखे हैं।

जानकारों के अनुसार सेक्टर 23 ए का कम्युनिटी सेंटर पूर्व पार्षद धर्मवीर खटाना के प्रयास से दो दशक पहले बनाया गया था। तब से इस कम्युनिटी सेंटर के प्रबंधन पर उनका या उनके परिवार का ही कब्जा बना हुआ है, यानी इससे होने वाली कमाई का लाभ खटाना परिवार उठा रहा था। बल्लबगढ़ के विधायक व पूर्व मंत्री मूलचंद और धर्मवीर भड़ाना के बीच राजनैतिक प्रतिद्वंदिता रही है। जानकार बताते हैं कि खटाना परिवार ने कभी मंत्री पंडित मूलचंद शर्मा की सत्ता को स्वीकार नहीं किया।

संभवत: इसी कारण मूलचंद भी इस परिवार की जड़ें काटने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उन्हें यह मौका नगर निगम के परिसीमन के दौरान मिल भी गया। उनके इशारे पर खटाऩा परिवार की बपौती कहे जाने वाले सेक्टर 23 ए के कम्युनिटी सेंटर को परिसीमन मेें खटाना परिवार के वार्ड से बाहर कर दिया। वार्ड चार का बटवारा ऐसे किया गया जिसमें खटाना परिवार का वहां से जीतना मुश्किल हो जाए, इसलिए खटाना परिवार ने वार्ड पांच से शीतल खटाना को चुनाव लड़ाया। चुनाव में वार्ड पांच से धर्मवीर खटाना की बहू शीतल खटाना जीतीं, तो वार्ड चार से ज्ञानेंद्र भारद्वाज की पत्नी संगीता भारद्वाज।
विधायक मूलचंद शर्मा ने असली बदला लेना तो अब शुरू किया। क्योंकि कम्युनिटी सेंटर वार्ड चार में ही रह गया तो उसके प्रबंधन से खटाना परिवार को हटाने का खेल शुरू हो गया। इसके लिए मूलचंद ने सजातीय ज्ञानेंद्र भारद्वाज को अपना करीबी बनाया। इसके बाद मोहरे की तरह इस्तेमाल करते हुए उससे कम्युनिटी सेंटर के कुप्रबंधन आदि की शिकायतें करवाईं। इसका प्रबंधन पुरानी कमेटी से छीन कर आरडब्ल्यूए को सौंपने की मांग उठाई गई।

इससे धर्मवीर खटाना बुरी तरह भड़क गए। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले एसडीएम बल्लबगढ़ के कार्यालय में धर्मवीर के बेटे जयवीर खटाना और ज्ञानेंद्र भारद्वाज का आमना सामना हुआ। दोनों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई लोगों के बीच बचाव कराने के बावजूद दोनों एक दूसरे को मिटा देने की धमकियां देते नजर आए। बताया जा रहा है कि सेक्टर 23 बूस्टर पंप पर भी खटाना के गुर्गों का कब्जा है। बूस्टर में लगने वाले डीजल व मरम्मत के फर्जी बिलों से होने वाली कमाई से खटाना के उन गुर्गों का हुक्का पानी ठीक ठाक चल जाता है जिनकी बैठक वहां लगी रहती है। ज्ञानेंद्र भारद्वाज ने उस बूस्टर को इन अराजकतत्वों से मुक्त कराने की एप्लीकेशन नगर निगम के संयुक्त आयुक्त से लेकर निगमायुक्त तक दी है, खटाना परिवार ने इसे भी अपने ऊपर हमला माना है। यह भी चर्चा है कि बल्लबगढ़ में कचरे का एक खत्ता है, धर्मवीर खटाना बेटे व पार्षद पति जयवीर खटाना इसमें घरेलू के अलावा प्रतिष्ठानों का कूड़ा भी अवैध रूप से डलवा कर अच्छी खासी कमाई कर लेते हैं। ज्ञानेंद्र ने इसकी भी शिकायत की है। खटाना परिवार को यह उनके आर्थिक हितों पर चोट करने वाला लगा।

भाजपा को करीब से जानने वालों के अनुसार ज्ञानेंद्र परिवार को मूलचंद का समर्थन प्राप्त है तो खटाना परिवार भी सजातीय केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का दम भर रहा है। जो भी हो लेकिन इन दोनों की लड़ाई से खुद को सदाचारी बताने वाली भाजपा के जन प्रतिनिधियों के बीच लूट कमाई और कब्जेदारी की जंग सामने आ गई है। जिस तरह से दोनों पक्ष एक दूसरे को धमकियां दे रहे हैं उससे तो खूनी संघर्ष की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। समझने वाली बात यह है कि भाजपा का धर्मवीर खटाना खुलेआम नेपाल से एके 47 लेकर आने की धमकियां दे रहा है, यह ऑडियो पुलिस तक भी पहुंच चुकी है। पुलिस आयुक्त सतेेंद्र कुमार गुप्ता कार्रवाई करना तो दूर जांच कराने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।

संदर्भ वश सुधी पाठक समझ लें कि भाजपाई राजनीति का चरित्र और चेहरा क्या हो चुका है। पार्षद हो, विधायक हो, सांसद हो या फिर मंत्री हो सबका लक्ष्य केवल और केवल लूट कमाई के अलावा कुछ भी तो नहीं है। ऐसे राजनीतिज्ञों से अपनी भलाई की अपेक्षा करना उस कबूतर की मानिंद है जो बिल्ली को देख कर आंखें बंद कर लेता है।

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Mazdoor Morcha
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