फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एनजआईटी पांच निवासी आर्यन मिश्रा को मुसलमान गोतस्कर समझ कर गोली मारने वाले गोरक्षक गुंडे अनिल कौशिक और उसके गुर्गों को सजा न हो पाए, लगता है पुलिस इस दिशा में काम करती रही है। संभवता यही कारण है कि घटना के सात महीने बाद भी पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त पिस्टल की बैलिस्टिक-फोरेंसिक रिपोर्ट अभी तक कोर्ट में नहीं पेश की है। न्यायालय में सुनवाई बैलिस्टिक रिपोर्ट के कारण ही रुकी हुई है। पिस्टल की बैलिस्टिक रिपोर्ट आने में इतनी देरी खट्टर-सैनी की पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है।
2014 में मोदी-खट्टर सरकारें आने के बाद भारत विश्व में सबसे बड़ा बीफ एक्सपोर्टर बन गया लेकिन डबल इंजन सरकारों के संरक्षण में संघ और उसके कट्टपंथी हिंदू संगठनों ने गोरक्षा के मुद्दे के जरिए मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का काम शुरू किया। खट्टर ने भी प्रदेश की पुलिस को गो तस्करों पर कार्रवाई में नाकारा मानते हुए संघी-नफरतियों को काम देनेे के लिए हरियाणा स्पेशल काऊ प्रोटेक्शन फोर्स बना डाला। बीते दस सालों में इन कथित गोरक्षकों ने न जाने कितने मुसलमान-दलितों को गोतस्कर बना कर जान से मार डाला या अधमरा कर दिया या पीट पीट कर जीवन भर को अपंग बना दिया। सरकार का संरक्षण होने के कारण पुलिस भी इनकी चाकरी करती घूमती और कभी कभी तो ये गोरक्षक पुलिस के साथ कथित गोतस्करों का शिकार करने का साझा अभियान चलाते।
संरक्षण से बेखौफ हो चुके खट्टर की स्पेशल काऊ प्रोटेक्शन टास्क फोर्स के इन गोरक्षक गुंडों ने 23 अगस्त की रात मकान मालिक सुजाता गुलाटी और उनके परिवार के साथ आइसक्रीम खाने निकले आर्यन मिश्रा को गोतस्कर मान कर गोली मार दी थी। कार में दो महिलाएं मौजूद होने के बावजूद आर्यन को गोली मारने वाले खट्टर के गोरक्षक गुंडे अनिल कौशिक ने पुलिस को बताया था कि उसने आर्यन को मुसलमान समझ कर गोली मारी थी।
चर्चित कांड में पुलिस ने एक पिस्टल बरामद की थी, लेकिन ये वही पिस्टल है जिससे आर्यन को गोली मारी गई थी या नहीं, पुलिस इस महत्वपूर्ण तथ्य को छिपा गई थी। मज़दूर मोर्चा ने 15 से 21 सितंबर 2024 के अंक में खट्टर-सैनी की स्पेशल काउ प्रोटेक्शन फोर्स ने अवैध पिस्टल से की आर्यन की हत्या शीर्षक से खबर प्रकाशित कर पुलिस की इस करतूत को उजागर किया था। सरकारी गोरक्षक गुंडों को बचाने के लिए हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्टल की जगह कोई दूसरी पिस्टल बरामद किए जाने से हत्यारों को फायदा पहुंचाने की आशंका जताई थी। यदि दूसरी पिस्टल बरामद दिखाई गई तो निश्चित ही बैलिस्टिक-फोरेंसिक रिपोर्ट में उससे गोली चलाया जाना साबित नहीं होगा। ऐसे में भगवा रंग में रंगती जा रही न्यायपालिका हत्यारों को शक का लाभ देकर अन्य निर्दाेषों की हत्या करने के लिए उन्हें रिहा कर सकती है। हालांकि पुलिस प्रवक्ता यशपाल का कहना है कि मधुबन लैब से फोरेंसिक रिपोर्ट न मिल पाने के कारण कोर्ट में जमा नहीं कराई गई थी। कोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान रिपोर्ट सबमिट कर दी जाएगी। इधर आर्यन के परिवार वाले भी पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगा रहे हैं।