फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जुमलाजीवी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत अभियान अधिकारियों और नेताओं की लूट कमाई और घोटाले का एक बड़ा स्रोत बन चुका है। बीते दस साल में शौचालय बनाने में करीब आठ करोड़ रुपयों की बंदरबांट की गई लेकिन शहर में कभी भी ढंग का शौचालय शायद ही दिखे। एक बार फिर आकांक्षी शौचालय के नाम पर करोड़ों लूटने की तैयारी हो रही है।
निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास के मुताबिक शहर में शौचालयों की व्यवस्था को सुधारने पर काम चल रहा है। आने वाले कुछ दिनों में लोगों को मौजूदा शौचालयों के मुकाबले बेहतर आकांक्षी शौचालय मिलेंगे, फिलहाल इन शौचालयों को बनाने के लिए जगह के चयन का काम चल रहा। निगम अधिकारियों ने आकांक्षी शौचालयों की खूबी बताई कि ये शौचालय पांच सितारा होटल के शौचालयों की तर्ज पर वातानुकूलित यानी एसी होंगे। इनमें महिला, पुरुष, बच्चों और दिव्यांगों के लिए अलग अलग सीट होगी। एसी शौचालय में महिलाओं के बच्चों को दूध पिलाने के लिए अलग रूम की व्यवस्था होगी, कूड़ेदान, टिश्यू पेपर के अलावा सैनिटरी पैड भी उपलब्ध होंगे। ऑटोमेटिक फ्लश सुविधा वाले इन शौचालयों में पावर बैकअप और पंखे, एग्जास्ट फैन और रौशनदान भी होंगे। आकांक्षी शौचालयों की जानकारी देने के लिए सौ मीटर के दायरे में साइन बोर्ड तो लगाए ही जाएंगे, जीपीएस मैप पर भी उनकी जानकारी डाली जाएगी।
इतनी खूबियां सुनकर पाठकों को खुश होने की जरूरत नहीं है। करीब आठ साल पहले दो करोड़ रुपये खर्च कर स्थापित किए गए दस स्मार्ट टायलेट का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने वो सारी खूबियां गिनाईं थी जिनका ढिंढोरा आकांक्षी शौचालयों के लिए पीटा जा रहा है। बस वो शौचालय वातानुकूलित नहीं थे। उद्घाटन के बाद ये शौचालय चले ही नहीं थे। इसका सबसे बड़ा कारण इन शौचालयों को किसी सीवर लाइन और जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन से नहीं जोड़ा जाना था। पानी और सफाई के अभाव में ये शौचालय उद्घाटन के एक सप्ताह बाद ही बेकार हो गए। खास बात यह थी कि खुले बाजार में इनसे बेहतर गुणवत्ता वाले शौचालय साढ़े चार से पांच लाख रुपये में मिल रहे थे तब स्मार्ट सिटी के भ्रष्टाचारी अधिकारियों ने सत्तापक्ष के नेताओं की मिलीभगत से बीस लाख रुपये में एक टॉयलेट खरीदा था।
हालांकि अधिकारी आकांक्षी टॉयलेट की कीमत नहीं बता रहे हैं लेकिन बताया जा रहा है कि दस टॉयलेट बनाने के लिए पांच करोड़ का बजट बनाने की तैयारी है। अगर यह सच है तो एक शौचालय पचास लाख रुपये में बन कर तैयार होगा। संदर्भवश सुधी पाठकों को बताते चलें कि गरीबों को आवास बनाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक लाख बीस हजार रुपये मिलते हैं, यानी एक आकांक्षी शौचालय की कीमत करीब 42 प्रधानमंत्री आवासों की लागत के बराबर होगी।
यह आकांक्षी शौचालय कितने चलेंगे इसका अंदाजा स्मार्ट शौचालयों से और पिछले दस साल में पूरे नगर निगम क्षेत्र में लगाए जा चुके डेढ़ हजार से अधिक शौचालयों से लगाया जा सकता है। साल 2014 में मोदी द्वारा स्वच्छ भारत मिशन और खुले में शौच मुक्त देश बनाने की घोषणा हुई तो पूरे शहर में 1200 शौचालय स्थापित किए गए। ये सारे शौचालय कब और कहां गायब हो गए निगम अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं है। इसके बाद 2018 में करीब 68 हजार 500 रुपये की दर से 292 प्रीकास्ट सीमेंटेड टॉयलेट लगाए। दो करोड़ के ये टॉयलेट भी पानी और सफाई के अभाव में बर्बाद हो गए। निगम रिकॉर्ड के अनुसार वर्तमान में 345 टॉयलेट हैं लेकिन इनमें से केवल चालीस ठीक ठाक हैं बाकी इस्तेमाल योग्य नहीं हैं। यानी बीते आठ-दस साल में शौचालय निगम अधिकारियों की लूट कमाई का साधन रहे, इस ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए कहा जा सकता है कि भविष्य में आकांक्षी टॉयलेट भी इसी कतार में शामिल हो जाएंगे।