नेहा सरन के नेतृत्व में अवैध कारोबार का गढ़ बन चुकी है बडख़ल तहसील

नेहा सरन के नेतृत्व में अवैध कारोबार का गढ़ बन चुकी है बडख़ल तहसील
February 15 16:31 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एनआईटी इंडस्ट्रियल एरिया में प्लॉट 38 ए की गैरकानूनी रूप से नीलामी करने के मामले में तहसीलदार नेहा सरन के खिलाफ केस दर्ज हुआ तो तहसीलदारों में हड़कंप मच गया। बीते सोमवार को प्रदेश संगठन के आह्वान पर सभी तहसीलों में काम ठप कर दिया गया। विरोध करने वालों का कहना था कि बेबुनियाद आरोपों पर केस दर्ज किया गया, केस दर्ज करने से पहले जांच की जानी चाहिए थी।

विरोध करने वालों को शायद यह नहीं बताया गया कि नेहा सरन ने न्यायालय में भी झूठ परोसा था। सुधी पाठकों को बता दें कि एनआईटी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित विवादित प्लॉट 38 ए का केस न्यायालय में लंबित होने और डीसी फरीदाबाद के निर्देश के बावजूद तहसीलदार नेहा सरन ने इसकी नीलामी कर दी थी। यहां तक कि जब पीडि़त अमरजीत सिंह ने न्यायालय में नीलामी के खिलाफ अपील की तो नेहा सरन ने अदालत में झूठ बताया कि प्लॉट 38 की नीलामी की गई है न कि 38 ए की। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि प्लॉट 38 की नीलामी के लिए नीलामी प्रक्रिया का कभी प्रकाशन ही नहीं हुआ, न ही बिड अमाउंट निर्धारित किया गया और न ही खरीदने वाले ने कोई रकम जमा करवाई। यही नहीं डीसी ने भी नेहा सरन को लिखित निर्देश जारी किया था विवादित प्लॉट के संबंध में कोई भी निर्णय अदालत के आदेश के मद्देनजर ही लें।

मोटे नजराने की लालच में नेहा सरन ने इन सब आपत्तियों को दरकिनार कर पुलकित दीवान, राकेश दीवान और दीपक मनचंदा के हक में सारी कार्रवाई कर डाली। विरोध करने वालों को यह भी नहीं मालूम है कि केस आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच किए जाने और नेहा सरन के खिलाफ पर्याप्त आधार मिलने के बाद ही़ एसीपी ईओडब्ल्यू के पत्र के आधार पर दर्ज किया गया है। बडख़ल तहसील में भ्रष्टाचार सामने आने का यह पहला केस हो सकता है लेकिन अकेला नहीं है। यहां दलाल और रिश्वत के जरिए अवैध रजिस्ट्रियां कराए जाने का खेल काफी पहले से धड़ल्ले से चल रहा है।

मज़दूर मोर्चा ने 31 दिसंबर 2024 के अंक में बडख़ल तहसील मे चल रहा अवैध प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री का खेल शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर वहां के भ्रष्टाचार से शासन-प्रशासन को अवगत कराया था। पूरी एनआईटी में आवासीय प्लॉटों में बनाई गई अनेकों स्टिल्ट पार्किंग की रजिस्ट्री कर दी गई। बिना सब डिवीजन के ही प्रॉपर्टी के हिस्से की रजिस्ट्री कर दी गई। बडख़ल, अनंगपुर के अनअप्रूव्ड इलाकों में बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग हुईं और इनकी बाकायदा रजिस्ट्री की गईं। यदि बडख़ल तहसील में बीते चार-पांच साल में हुई रजिस्ट्रियों की जांच कराई जाए तो बहुत बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। सवाल तो डीसी फरीदाबाद एवं एसडीएम पर पर भी बनता है क्या इन लोगों का यह दायित्व नहीं है कि ये लोग अपने मातहत तहसीलदारों की कारगुजारियों पर निरंतर निगरानी रखेें। निगरानी न रखने के पीछे कहीं लूट कमाई में हिस्सा पत्ती का मामला तो नहीं है।

डीसी, एसडीएम या तहसीलदार को क्या रोएंं, जब इनको तैनात करने वाले राजनेता ही खुद चोर हों। नेताओं की चाटुकारिता और मोटी रिश्वत की लालच करने वाली नेहा सरन भूल गई थीं कि केस दर्ज होने पर वह फंसेंगी न कि फोन पर मौखिक आदेश देने वाले नेता। काम ठप करने वाले तहसील कर्मी केवल आम जनता की परेशानी का ही सबब साबित हुए। उन्हें यदि लगता है कि नेहा सरन निर्दोष हैं तो जांच जल्द पूरी करने की मांग करें, न कि जनता को परेशान करें।

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Mazdoor Morcha
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