फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा)। कोरोना महामारी की आड़ में बंद की गईं लोकल ट्रेनों को सरकार ने आज तक बहाल नहीं किया है, लेकिन 262 करोड़ रुपये खर्च कर शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन को ‘विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। इस स्टेशन के दोनों ओर बहुमंजिला कार पार्किंग भी बनाई जा रही है। जनता की गाढ़ी कमाई को लुटा कर जो कथित विश्वस्तरीय पार्किंग बनाई जा रही है, वो बेमानी ही साबित होने वाली हैं।
बताया जा रहा है कि फरीदाबाद रेलवे स्टेशन के शहर वाले छोर पर छह मंजिला पार्किंग बनाई जा रही है जिसमें 350 कारें खड़ी होंगी, नेशनल हाईवे वाले छोर पर 250 कारों के लिए 4 मंजिला पार्किंग बन रही है। इन दोनों पार्किंग पर 59 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
जानकारों के अनुसार सरकार ने यहां पार्किंग बनवा कर जगह और धन दोनों की बर्बादी की है। उनके अनुसार फरीदाबाद स्टेशन पर रोजाना औसतन 60 ट्रेनों का ठहराव होता है, इनमें भी आधी से अधिक लोकल या इंटरसिटी ट्रेनें हैं। लंबी दूरी की चंद ट्रेनों का ही यहां ठहराव होता है। जाहिर है कि लोकल और इंटरसिटी से यात्रा करने वाले कार से नहीं चलते। अधिकतर लोग स्कूटर, बाइक या साइकिल वाले हैं। इनमें से अधिकतर नौकरी पेशा दैनिक यात्री होते हैं जो सुबह वाहन खड़ा करते हैं और रात को लौट कर उठाते हैं। कम किराया (चौबीस घंटे के लिए पंद्रह रुपये) होने के कारण ये लोग काफी पहले से अपनी बाइक, साइकिल आदि स्टेशन के आसपास बनी प्राइवेट पार्किंग में खड़ी करते हैं। करोड़ों रुपये की सरकारी पार्किंग में चार घंटे के लिए पंद्रह से बीस रुपये देकर ये दैनिक यात्री अपनी बाइक, साइकिल खड़ी नहीं करेंगे।
रही बात कारों की तो दोनों पार्किंग खाली ही रहने वाली हैं, कारण यहां कार वाले रेल यात्री लगभग नहीं आते। जानकार बताते हैं कि राजधानी, वंदेभारत जैसी ट्रेनों का यहां ठहराव नहीं है, चंद सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनें ही ठहरती हैं, जिनके आरक्षण का कोटा देखा जाए तो बमुश्किल सौ पहुुंचेगा। इन ट्रेनों से यात्रा करने वाले अधिकतर लोग भी कार से नहीं आते। अगर आते भी तो कोई पार्किंग में कार खड़ी कर रेल यात्रा करने नहीं जाएगा। यानी मल्टी स्टोरी पार्किंग बनाना निरर्थक साबित होने वाला है।
संदर्भवश, सुधी पाठक जान लें कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2014-15 में फरीदाबाद स्टेशन को मॉडल स्टेशन बनाने के लिए करीब सवा सौ करोड़ रुपये जारी किए थे। यह मॉडल स्टेशन एक साल में बनना था लेकिन लाल फीताशाही और भ्रष्टाचार के कारण 2021 में तैयार हुआ था, बावजूद इसके, उसमें बहुत कमियां रह गई थीं। जानकार कहते हैं पिछले प्रोजेक्ट के भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए ही मोदी ने अमृत योजना नाम देकर विश्व स्तरीय स्टेशन बनाने की आड़ में फिर से 282 करोड़ रुपये लुटा दिए। स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने पर करोड़ों रुपये खर्च करने से बेहतर होता कि सरकार कोरोना महामारी के दौरान बंद की गईं लोकल ट्रेनों को दैनिक यात्रियों की सुविधा के लिए फिर से बहाल करती।