स्वार्थ,गुटबाजी में बंटी 140 साल पुरानी कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी से हर क्षेत्र में पिछड़ गई है

स्वार्थ,गुटबाजी में बंटी 140 साल पुरानी कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी से हर क्षेत्र में पिछड़ गई है
January 20 07:15 2025

अनूप चौधरी
चंडीगढ़। केंद्र में सत्ता में आ कर देश की बागडोर संभालने के मंसूबे पाल रही कांग्रेस प्रदेशों में अपना संगठन खड़ा नहीं कर पा रही है। कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व अपने क्षत्रपों पर नकेल डालना तो दूर अनुशासन की फटकार लगाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा है। इसी के चलते 140 साल पुरानी कांग्रेस अपने से 95 साल छोटी भाजपा से मीलों पीछे रह गई है।

भाजपा ने हरियाणा समेत सभी प्रदेशों में बूथ लेवल तक अपना मजबूत संगठन खड़ा कर दिया है। कांग्रेस विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के छह हफ्ते बाद भी अपना नेता प्रतिपक्ष नही बना पाई है। संगठन खड़ा करना तो दूर की कौड़ी है, पार्र्टी अभी हार के सदमे से भी नहीं उभर पाई है। कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 में हुई थी। 140 साल की पार्टी की उम्र जैसे-जैसे विस्तार ले रही है वैसे-वैसे पार्टी का संगठनात्मक ढांचा सिकुड़ता जा रहा है। इस के मुकाबले 6 अप्रैल 1980 को अस्तित्व में आई भाजपा ने हरियाणा में 2014 में न केवल अपने बलबूते सरकार बनाई साथ ही साथ एक मजबूत संगठन भी खड़ा किया। हालांकि कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा तो पार्टी के सत्ता में रहते ही बिखरने लगा था।

लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बूथ लेवल तक अपना मजबूत संगठन खड़ा कर दिया है। दूसरी तरफ तीन विधानसभा चुनाव हारने के बाद सदमे में आई कांग्रेस हरियाणा में अपने जिलाध्यक्ष तक नहीं बना पाई है। हरियाणा कांग्रेस का ग्यारह साल में यानी 2014 से अब तक अपना संगठनात्मक ढांचा सिकुड़ता ही गया है। भाजपा ने 2024 के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पहले से ज्यादा शिद्दत से अपने संगठन को मजबूत किया और इसे बूथ लेवल तक ले गई। चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने में अपनी उर्जा और समय खपा रही है। पार्टी के 37 विधायकों में कांग्रेस को एक भी विधायक ऐसा नहीं मिल रहा जो विधानसभा में जनहित के मुद्दे मजबूती से उठा सके। साथ ही पार्टी और जनभावनाओं की पैरवी कर सके। कांग्रेस नेता ने शायद इतना जोर पार्टी को विधानसभा चुनाव जीताने में नहीं लगाया जितनी ताकत एक अदद सरकारी कोठी को पाने के लगा रखा है।

दूसरी तरफ भाजपा ने चुनाव जीतने के बाद दावा किया है कि उसने अब तक 43 लाख नए सदस्य बना लिए हैं। पार्टी का लक्ष्य 50 लाख लोगों को जोडऩे का है। इसके अलावा भाजपा ने प्रदेश के 20629 बूथों (मतदान केंद्रों) पर प्रति बूथ 12 निष्ठावान कार्यकर्ताओं की कमेटी बनाई है। इसका मतलब मतदान केंद्रों पर 247548 कार्यकर्ताओं की मजबूत फोज खड़ी कर दी है। कांग्रेस के पास इस की काट नहीं है। कांग्रेस नेताओं में ना इच्छाशक्ति रह गई और ना ही मनोबल रह गया है। आने वाले नगर पालिका, नगर परिषद, नगर निगम समेत सभी स्वशासन संस्थाओं में भाजपा का बर्चस्व रहने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

गौरतलब यह है कि पिछ्ला लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों से त्रासत आम लोगों ने खुद आगे आकर लड़ा था पर कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल अपना बचाव भी नहीं कर पाए। फिलहाल कांग्रेस को हरियाणा समेत कहीं कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। पार्टी को देशव्यापी जनांदोलन चलाने के एक मजबूत और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के संगठन की दरकार है जो फिलहाल कांग्रेस के पास नहीं है।

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Mazdoor Morcha
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