‘स्काडा’ से पेयजल आपूर्ति तो हुई नहीं, स्ट्रीट लाइट जलाने चला है नगर निगम

‘स्काडा’ से पेयजल आपूर्ति तो हुई नहीं, स्ट्रीट लाइट जलाने चला है नगर निगम
January 05 15:55 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अधिकारियों की लूट कमाई का स्वर्ग कहे जाने वाले नगर निगम में अब स्ट्रीट लाइटें स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) सिस्टम से जलाने बुझाने के नाम पर करोड़ों रुपयों की बंदरबांट की तैयारी की जा रही है। निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने दावा किया है कि शहर की स्ट्रीट लाइटों को ऑपरेट करने के लिए स्काडा सिस्टम लगाया जाएगा, सभी लाइटें एक ही कमांड सेंटर से जलाई और बुझाई जा सकेंगी। अगर इन लाइटों में कोई खराबी होगी तो उसकी जानकारी कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को मिल जाएगी।

बताया जा रहा है कि पहले ओल्ड फरीदाबाद और ग्रेटर फरीदाबाद में 20 हजार स्मार्ट लाइट लगाई जाएंगी। इसके बाद बाकी विधानसभा क्षेत्रों में लगाई जाएंगी। पहले ओल्ड फरीदाबाद और ग्रेटर फरीदाबाद में लगाए जाने का कारण बताया जा रहा है कि मंत्री विपुल गोयल ने हाल ही में अधिकारियों के साथ बैठक कर खराब स्ट्रीट लाइटों को जल्द ठीक कराने का आदेश दिया था। तो सबसे पहले उन्हें ही खुश किया जाएगा। यह बात और है कि स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत करा उन्हें चालू करवाने के बजाय निगम के खाऊ अधिकारियों ने स्काडा का राग अलाप दिया, क्योंकि मरम्मत में खर्च कम है तो कमीशन भी ऊंट के मुुंह में जीरा ही रहेगा, इसके विपरीत स्काडा सिस्टम को लगाने, सभी स्ट्रीट लाइटों को अपग्रेड करने, उससे जोडऩे में दसियों करोड़ का खर्च होगा जिसमें मोटा कमीशन बनेगा। इसके बाद स्काडा की देखभाल संभाल-मरम्मत का ठेका देने में भी मोटी हिस्सा पत्ती मिल सकेगी।

मैडम के दावे में कितनी सच्चाई है इससे समझा जा सकता है कि यह सिस्टम बुरी तरह फ्लॉप और छह हजार करोड़ रुपयों बर्बादी करने वाली स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड के सर्वेे के आधार पर लगाया जाएगा। स्मार्ट सिटी का कोई भी प्रोजेक्ट आज तक पूर्ण नहीं हो सका है, आधे अधूरे प्रोजेक्ट के बावजूद ठेकेदारों को पूरा भुगतान किए जाने का खेल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधिकारियों की स्मार्टनेस का बड़ा सुबूत है। चार पांच साल पहले किया गया यह सर्वे वर्तमान की परिस्थितयों में कितना दुरुस्त होगा यह तो अलग विषय है, उससे भी बड़ा प्रश्न यह है कि सर्वे सही हुआ भी था या वो भी कागजों पर ही हुआ था। स्काडा सिस्टम फेल होगा इसकी दूसरी वजह इसको एफएमडीए और नगर निगम द्वारा संयुक्त रूप से लगाया जाना तय हुआ है।

अभी तक का अनुभव यह है कि शहर में जलभराव होने, सड़कों पर गड्ढे होने या कोई अन्य गड़बड़ी होने पर नगर निगम एफएमडीए और एफएमडीए नगर निगम को दोषी बताता है। स्काडा लगाने में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद काम नहीं करने पर भी यही होने वाला है।

मैडम का दावा सुनकर पाठकों को उत्साहित होने की जरूरत नहीं है। वर्ष 2018 में तत्कालीन चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर और निगमायुक्त अनीता यादव ने भी पूरे शहर की जलापूर्ति स्काडा सिस्टम से करने के का बड़बोलापन दिखाया था। दो सौ करोड़ गबन के मुख्य आरोपियों में से एक डीआर भास्कर ने तब बाकायदा पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देकर बताया था कि किस तरह सभी रैनीवेल, बूस्टर, ट्यूबवेल के साथ सभी पाइप लाइन स्काडा से जोड़ दी जाएंगी। इससे होगा यह कि जहां कहींं भी पानी की आपूर्ति कम या ज्यादा हो रही होगी उसे कमांड सेंटर में बैठे बैठे ही दुरुस्त कर लिया जाएगा।

यदि कोई पाइप लाइन टूट गई है तो उसकी जानकारी कमांड सेंटर पर हो जाएगी स्काडा सिस्टम पानी की आपूर्ति तब तक रोके रखेगा जब तक पाइप लाइन दुरुस्त नहीं हो जाती। यह भी बताया था कि स्काडा सिस्टम से पानी की चोरी की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लग जाएगा। इस सब पर एक करोड़ रुपये का बजट भी बना दिया गया था, खट्टर सरकार इसे मंजूरी देने ही वाली थी कि दो सौ करोड़ के घोटाले का खुलासा हो गया और सब कुछ रुक गया। अब निगमायुक्त मैडम खुद ही स्काडा सिस्टम से स्ट्रीट लाइट जलाने-बुझाने का दावा कर रही हैं, उनका दावा भी डीआर भास्कर के दावे की तरह ही होने वाला है। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार सोने के बिस्कुट खाने और महंगे लहंगे पहनने की मैडम की कुख्याति सरकार तक पहुंच चुकी है और जल्द ही मैडम की रुख्सती की तैयारी भी शुरू हो गई है। दरअसल, मैडम इस तरह के दावे कर सरकार को यह दिखाने का प्रयास कर रही हैं कि वह शहर के विकास में जी जान से जुटी हैं, ताकि उन्हें अभी नगर निगम में और रहने दिया जाए।

पहले भी हो चुका है स्ट्रीट लाइट घोटाला
बेशक नगर निगम इन्हें न तो समय पर जला सकती है और न बुझा सकती है। अक्सर दिन में स्ट्रीट लाइटें जलती रहती हैं और रात को बंद रहती हैं। बेशक, इनका जलाना बुझाना इनके बस में न हो लेकिन मोटी कमाई का अचूक साधन बनी रहती हैं। वर्ष 2016-17 में भी सभी स्ट्रीट लाइटों से सोडियम और टंगस्टन बल्ब हटा कर उनकी जगह एलईडी लाइटें लगाने का खेल हुआ था। तब करीब चालीस हजार खंभों में एलईडी लाइटें लगाई गई थीं। तब पार्षद और फाइनेंस कमेटी के सदस्य रहे धनेश अदलखा पर पार्षदों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने मुजेसर में बनने वाली नकली एलईडी लाइटों पर कंपनियों के ब्रांड की मोहर लगाकर नगर निगम को सप्लाई कराई थी। नकली एलईडी बनाने वाली फैक्टरी भी अदलखा के दोस्त की ही थी। सिर्फ एलईडी लाइटें ही नहीं उनके लगाने के लिए एल शेप के रॉड, क्लैंप, बोल्ट आदि में भी बड़ी मात्रा में हेराफेरी की गई थी। बाद में निगमायुक्त एम शाईन ने एलईडी लाइटों की गुणवत्ता पर नाराजगी जाहिर की थी, और एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी देकर शांत हो गए, लगता है इसके खेल में उन्होंने भी अपना हिस्सा वसूल लिया होगा।

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Mazdoor Morcha
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