गरीब जनता से छलावा है आयुष्मान भारत योजना

गरीब जनता से छलावा है आयुष्मान भारत योजना
November 04 06:02 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) प्रधानमंत्री मोदी की आयुष्मान भारत योजना देश की गरीब जनता के लिए छलावे से ज्यादा कुछ नहीं है। ढिंढोरा तो पीटा जाता है कि इस योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी परिवार को पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ़्त मिलेगा लेकिन बीते वित्त वर्ष में प्रत्येक लाभार्थी को औसतन बीस हज़ार रुपये का ही इलाज मिल सका। इसका पहला कारण है कि सरकार ने प्रत्येक बीमारी के इलाज का एक बजट बना रखा है, उदाहरण के लिए किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए सरकार ने एक साल में केवल पचास हज़ार रुपया ही खर्च करना तय किया है, यानी पांच लाख नहीं केवल पचास हज़ार रुपये दिए जाएंगे। दूसरे सरकार ने बीमारियों के इलाज की रेट लिस्ट इतनी कम रखी है कि निजी अस्पताल संचालक इलाज नहीं करते।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत योजना की घोषणा की थी। वर्ष 2011 में कांग्रेस राज में की गई सामाजिक-आर्थिक जनगणना के तहत 1 लाख 20 हजार रुपये वार्षिक से कम आय वाले दस करोड़ परिवारों यानी करीब पचास करोड़ लोगों को इस योजना में शामिल किया गया। पांच लाख रुपये तक मुफ़्त इलाज दिलाने की परियोजना का ढिंढोरा पीटने और विज्ञापन करने में मोदी सरकार ने दो सौ करोड़ रुपये खर्च कर डाले। हालात ये हैं कि योजना शुरू होने के बाद से आज तक 35 करोड़ से कुछ ज्यादा ही आयुष्मान कार्ड बन सके हैं। यानी अभी भी कार्ड नहीं बनने के कारण करीब तीस फीसदी लोग मुफ़्त इलाज से वंचित है, और मोदी जी ने सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिए हाल ही में इस योजना में 70 साल से अधिक उम्र वाले बुजुर्गों को भी शामिल करने की घोषणा की है। आंकड़ों के अनुसार छह करोड़ बुजुर्ग इस योजना में शामिल होंगे लेकिन जिस तरह से योजना फ्लॉप साबित हो रही है लगता नहीं उन्हें इसका लाभ मिल पाएगा।

स्वास्थ्य सेवा मामलों के जानकार कहते हैं सरकार ने आयुष्मान योजना की जो रेटलिस्ट बनाई है वह सेंट्रल गरवर्नमेंट हेल्थ स्कीम की रेट लिस्ट से भी काफी कम है। निजी अस्पताल वाले इस रेट लिस्ट पर रो पीट कर इलाज करते हैं। इस रेट लिस्ट पर ही ईएसआई, ईसीएचएस और राज्य सरकारों के कर्मचारियों का इलाज होता है। एक तो रेट कम दूसरे इलाज का खर्च भी सीमित होने के कारण निजी अस्पताल वाले मरीज का या तो पूरा इलाज नहीं करते या फिर अतिरिक्त खर्च मरीज से वसूलते हैं यानी मुफ़्त इलाज नहीं मिल पाता। स्वास्थ्य मामलों के जानकार कहते हैं कि यदि सरकार सच में आयुष्मान का लाभ गरीब जनता को देना चाहती है तो सबसे पहले सीजीएचएस रेट लिस्ट लागू करे और खर्च सीमा का बंधन हटाए। इससे भी बड़ी बात सरकार की नीयत सही होनी चाहिए।

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Mazdoor Morcha
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