बल्लबगढ़ (मज़दूर मोर्चा) विकास के नाम पर जहां भाजपा के मंत्री-विधायक जनता को वरगलाने में जुटे हैं वहीं हरामखोर अधिकारी लूट कमाई में जुटे हैं, इन दोनों को ही जनता को होने वाली समस्या से कोई सरोकार नहीं है। मंत्री मूलचंद शर्मा जिस सोहना ओवरब्रिज को दस साल में चार लेन नहीं करवा सके, उसी पुल की मरम्मत के नाम पर लोक निर्माण विभाग के अधिकारी लाखों रुपये की बंदरबांट कर गए। नतीजा ये है कि 65 लाख रुपये खर्च कर एक साल पहले मरम्मत कराए गए पुल पर बड़े बड़े गड्ढे हो चुके हैं।
सोहना रेलवे ओवरब्रिज बल्लभगढ़ और एनआईटी के कई सेक्टरों, कॉलोनियों और औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ता है। दिल्ली मथुरा हाइवे से जुड़ा होने के कारण इंडस्ट्रियल एरिया के भारी वाहन भी इस पुल से चौबीस घंटे गुजरते हैं। इस महत्वपूर्ण रेलवे ओवर ब्रिज को चार लेन किए जाने की मांग लंबे अर्से से होती आ रही है। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर से लेकर मूलचंद शर्मा तक हर चुनाव में इसको फोरलेन करवाने का फरेब देकर मासूम जनता से वोट लेकर सत्ता हासिल करते रहे हैँ लेकिन कभी कुछ किया नहीं।
दोनों नेता यह ओवर ब्रिज फोर लेन तो नहीं करवा सके लेकिन लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जनता के रोष को शांत करने के लिए अप्रैल 2023 में मूलचंद शर्मा ने बड़ी घोषणा की थी कि 65 लाख रुपये से इस पुल की विशेष मरम्मत कराई जाएगी, इसके बाद इस पर सफर बहुत अच्छा हो जाएगा। लोक निर्माण विभाग के हरामखोर अधिकारियों को भी मालूम था कि यह घोषणा जनता की समस्या को दूर करने से ज्यादा चुनावी है। बस उसी तरह का काम कराया गया, मई 2023 में शुरू होने वाला विशेष मरम्मत कार्य चार महीने तक लटकाया गया और फिर सितंबर में आरंभ हो सका। ऐसा संभवता इसलिए किया गया कि अधिकारियों को मालूम था कि नेता-नगरी को खुश करने, कमीशनखोरी और आपसी बंदरबांट के बाद इस प्रोजेक्ट के लिए जो धनराशि बचेगी उससे किया गया मरम्मत कार्य सात-आठ महीेने ही टिक पाएगा, यदि मई में काम शुरू होता तो दिसंबर-जनवरी तक ही पुल में फिर से गड्ढे हो जाते और लोकसभा चुनाव में कृष्णपाल को जनता का गुस्सा झेलना पड़ता।
सितंबर में हुई मरम्मत होने का फायदा यह हुआ कि लोकसभा चुनाव तक पुल में गड्ढे नहीं हुए। आसपास रहने वालों के अनुसार पहली बरसात में ही पुल के सारे पैच खुलने लगे। अब इस पुल का हाल पिछले साल से भी बदतर है, पूरे पुल पर गहरे गड्ढे बन चुके हैं, दो पहिया वाहन चालक तो इनमें उलझ कर अक्सर गिर कर चोटिल होते रहते हैं। यही नहीं पैदल चलने वालों के लिए बनाया गया फुटपाथ भी उखड़ चुका है। भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मरम्मत में ईमानदारी से 65 लाख रुपये लगाए जाते तो यह पुल कम से कम पांच साल तक तो अच्छी अवस्था में रहता लेकिन मरम्मत के नाम पर रुपयों की सिर्फ हिस्साबांट ही हुई है।
लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रदीप सिंह संधू कहते हैं कि अभी मरम्मत कार्य वारंटी पीरियड में है, ठेकेदार कंपनी से इसे दुरुस्त कराया जाएगा। समझा जा सकता है कि जिस ठेकेदार कंपनी ने पहली बार में सही काम नहीं किया और प्रदीप संधू के मातहतों ने उसे पास कर