फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) फर्जी डिग्री वाले इंजीनियर केवल नगर निगम की बर्बादी का कारण ही नहीं हैं, अवैध निर्माण, कब्जा करने और कराने वालों, भू माफिया से मिलीभगत कर करोड़ों के वारे न्यारे कर रहे हैं, और निगम कंगाल हो रहा है। इस लूट कमाई और भ्रष्टाचार के पीछे इन हरामखोर कर्मचारियों को राजनीतिक संरक्षण हासिल होना है। काली कमाई करने वाले ये कर्मचारी हिस्सापत्ती निगम के आला अधिकारियों को भी पहुंचाते हैं, इसीलिए अपनी तैनाती के बाद से ही तोडफ़ोड़ विभाग में टिके हुए हैं। वर्तमान में नगर निगम में एसडीओ सुरेंद्र हुड्डा के भ्रष्टाचार के चर्चे छिड़े हुए हैं। अवैध निर्माण करने-करवाने वालों से उसकी इतनी बेहतरीन सांठ-गांठ है कि निगमायुक्त ने उसे चार विधानसभा क्षेत्रों का तोडफ़ोड़ जिम्मा सौंप रखा है, इसीलिए उसे निगम में फोर स्टार एसडीओ के नाम से पुकारा जाता है, माना जा रहा है कि लूट कमाई और हरामखोरी के कौशल और काबिलियत के कारण आचार संहिता हटते ही मैडम उसे पांचवी विधानसभा का तोडफ़ोड़ इंचार्ज भी बना देंगी।
फाइव स्टार एसडीओ की लूट कमाई की चर्चाएं जोरों पर हैं। अतिरक्ति निगमायुक्त आवास के ठीक पीछे सील पड़ी इमारत में लेंटर डलवाने का ठेका सुरेंद्र हुड्डा ने लिया है। यह बिल्डिंग बेसमेंट का काम शुरू होने के दौरान ही संयुक्त आयुक्त के आदेश पर सील कर दी गई थी। लेकिन बिल्डर से मोटी रकम लेकर हरामखोर एसडीओ ने उस इमारत में निगम की सील और लागू होने वाले सारे नियम कानून ताक पर रख कर निर्माण शुरू करवा दिया। वह अवैध निर्माणकर्ताओं को बेरोकटोक काम करने का आश्वासन देकर कहता है कि जो मैने कह दिया वही काम होगा। सील होने के बावजूद इस इमारत में निर्माण कार्य तो चल रहा है, अब लेंटर डाले जाने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि बहुत जल्द किसी दिन या रात में लेंटर डाल दिया जाएगा।
मथुरा रोड स्थित मेट्रो स्टेशन के सामने एक अवैध बहुमंजिला इमारत बनाई जा रही है। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार चार स्टार एसडीओ ने आला अधिकारियों को राज़ी करने के नाम पर 15 लाख रुपयों में सौदा किया है। यही कारण है कि शिकायत के बावजूद अधिकारी नजरअंदाज कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री के वेष में भूमाफिया कृष्णपाल गूजर की गोद में बैठे सुरेंद्र हुड्डा से शहर के सभी अवैध निर्माण करने वालों से प्रगाढ़ संबंध हैं। आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि निगम आयुक्त मोना ए श्रीनिवास व अतिरिक्त निगम आयुक्त आर पाटिल के घर की दीवार से लग कर कमर्शियल निर्माण चल रहा है लेकिन इन आला अधिकारियों को नहीं दिखाई देता। इस लाइन में अधिकारियों के घर व लड़कियों का कॉलेज भी है। यदि इस रोड पर अवैध व्यावसायिक इमारतें बन जाएंगी तो यहां जाम की स्थिति बन जाएगी। फाइव स्टार एसडीओ बनने को आतुर सुरेंद्र और उसके जैसे भ्रष्ट अधिकारयिों के कारण निगमायुक्त आवास के सामने सड़क पार एनआईटी पांच के रिहायशी प्लॉटों को पूरी तरह व्यावसायिक इमारतों में तब्दील करवा दिया गया। इसी तरह संयुक्त निगमायुक्त के आवास से सटी इमारत भी बन कर तैयार हो जाएगी, और आला अधिकारी अपना दामन यह कह कर बचा लेंगे कि उन्होंने सीलिंग के आदेश दिए हुए हैं, यानी अवैध निर्माणकर्ता भी खुश, एसडीओ तोडफ़ोड़ भी और निगम के आला अधिकारी भी खुश, क्योंकि सभी लोग अपना अपना काम ‘करते रहे। शहर में सैकड़ों अवैध कॉलोनियां, कृषि या औद्योगिक भूमि पर बिना सब डिवीजन, बिना सीएलयू पर अधिकतर अवैध इमारतें सुरेंद्र हुड्डा की सहमति से बनी हैं, हालांकि इसके लिए वह सहमति आला अधिकारियों को खुश करके ही प्राप्त करता है। हालांकि सुरेंद्र हुड्डा और निगम अधिकारियों की इस हरामखोरी का खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ा रहा है। अवैध निर्माण के कारण पूरे शहर की सड़कें अतिक्रमणग्रस्त हैं तो सीवर लाइनें चोक हो रही हैं, ओवरलोड के कारण ट्रांसफॉर्मर भी खराब होते रहते हैं, लो वोल्टेज की समस्या आम हो चुकी है।
जैसे सुरेंद्र हुड्डा आला अधिकारियों का वसूली एजेंट है उसी तरह उसने बाजार से उगाही करने के लिए अपने दलाल और एजेंट छोड़ रखे हैं। उगाही उसके खास गुर्गे अमरपाल बेलदार और क्लर्क डेविड नागर हैं। कहने को तो डेविड ठेका क्लर्क है लेकिन वह कार्यालय में और अपनी सीट पर बहुत ही कम नजर आता है। सुरेंद्र की शह पर वह सीट छोड़ कर सुबह से शाम तक केवल दलाली और अवैध निर्माण करने वालों से वसूली करता है। अवैध निर्माण करने वालों में डेविड नागर की अलग ही धाक है। निगम रिकॉर्ड के अनुसार सुरेंद्र हुड्डा नगर निगम में बेलदार पद पर भर्ती हुआ था। तब से वो तोडफ़ोड़ विभाग में ही है, जब कुछ शोर उठता है तो एक-दो या चंद सप्ताह के लिए उन्हें किसी दूसरे विभाग में भेज दिया जाता है, इसके बाद फिर तोडफ़ोड़ विभाग लौट आता है। उसे तोड़ फोड़ विभाग से, उसकी किसी खास योग्यता के लिए नहीं बल्कि अवैध निर्माण करने वालों और दलालों से तालमेल बनाकर मोटी लूट कमाई करने में महारत हासिल होने के कारण ही नहीं हटाया जाता है। सभी राजनेताओं से अच्छे संबंध बनाने में कुशलता के कारण भी वह न केवल इस विभाग में टिका रहा बल्कि फर्जी इंजीनियरिंग कॉलेज से डिप्लोमा हासिल करके पदोन्नति भी हासिल करता रहा। यह अलग बात है कि प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव द्वारा 21 मई 2019 में जारी पत्र, संख्या 42/178/2008-5 जीएसआई में स्पष्ट आदेश दिया गया था कि सरकार में नियुक्ति और पदोन्नति के लिए डिस्टेंस एजुकेशन मोड से हासिल डिग्री या डिप्लोमा मान्य नहीं होगा। इसके बावजूद पूर्व निगमायुक्त महताब सिंह सहरावत ने सुरेंद्र हुड्डा को जूनियर इंजीनियर पर पदोन्नत कर दिया। अधिकारियों की मेहरबानी उस पर यहीं नहीं रुकी, उसे सहायक अभियंता पद पर भी पदोन्नत कर दिया। उसकी इस पदोन्नति पर कोई आपत्ति इसलिए नहीं हुई क्योंकि वह कांग्रेस-भाजपा सहित सभी दलों से बेहतर संबंध बना कर रखता है। भाजपा सरकार आते ही कृष्णपाल गूजर, सीमा त्रिखा, धनेश अदलखा, मूलचंद से लेकर गोपाल शर्मा आदि की जी हुजूरी कर उसने तोडफ़ोड़ विभाग में बने रह कर करोड़ों रुपये बनाए। जानकारों का कहना है कि यदि उसकी और उसके परिवार की संपत्ति की जांच की जाए तो आय से कई सौ गुना अधिक संपत्ति होने का एक नया घोटाला सामने आएगा जिसके आगे दो सौ करोड़ का घोटाला भी कुछ न होगा। उसके खिलाफ कोई जांच होगी इसकी संभावना नहीं है क्योंकि निगम के आला अधिकारियों की ऊपरी कमाई का वह बड़ा स्रोत तो है ही राजनेताओं खास कर मंत्री गूजर और अधिकारियोंं के बीच लाइजनिंग का भी काम वह बखूबी निभाता है।