गुरमीत राम रहीम को 40 दिन के लिये जेल से निकाला
फरीदाबाद (म.मो.) हिमाचल प्रदेश में डबल इंजन की भाजपाई सरकार होने के बावजूद वहां कोई भी ऐसा काम सरकार नहीं कर सकी जिसके बूते, अगले माह होने वाले चुनावों में भाजपा वोट मांग सके। दरअसल देश की उन्नति के लिये काम करना तो भाजपा के एजेंडा में कभी रहा ही नहीं। इनका भी लक्ष्य लूट कमाई के लिये सत्ता में बने रहने का ही रहा है। इसके लिये जनता में जाति व धर्म के नाम पर फूट डालने तथा उन्हें आपस में लड़ाये रखना भाजपा को अधिक रास आता है।
इसके साथ-साथ जनता में अंधविश्वास फैला कर व धर्म की अफीम चटा कर नशे में रखना जरूरी है। इस काम के लिये देश में तरह-तरह के पाखंडी एवं अपराधी बाबों को धर्मगुरू के रूप में स्थापित करना भाजपा को कहीं ज्यादा रास आता है। वैसे तो धर्म की अफीम व बाबों का सहारा लगभग तमाम पूंजीवादी पार्टियां लेती हैं परन्तु इस मामले में भाजपा का कोई मुकाबला नहीं।
हिमाचल में चुनाव की घोषणा होने से पूर्व ही भाजपा ने बलात्कारों एवं हत्या में सजायाफ्ता बाबा गुरमीत राम को रोहतक जेल से 40 दिन के लिये निकालने की समय पूर्व योजना बना ली थी। उसी योजना के तहत हरियाणा की खट्टर सरकार ने बीते सप्ताह उसे 40 दिन की पैरोल पर जेल से निकाल दिया। इससे पहले पंजाब चुनाव के समय भी इस पाखंडी अपराधी को इसी तरह जेल से निकाला गया था। परन्तु पंजाब की जनता ने न केवल अकालियों, भापाईयों व कांग्रेसियों को बुरी तरह से हरा कर स्पष्ट संदेश दे दिया कि वे लोग ऐसे किसी पाखंडी के बंधुआ वोटर नहीं हैं।
सुधी पाठक भूले नहीं होंगे कि किस प्रकार इस बाबे ने धर्म की अफीम चटा कर अपनी ऊन दो शिष्याओं का बलात्कार किया था जो अपने मां-बाप की मूर्खता के चलते इसके शिकंजे में फंस गई थी। डेरा स्थल सिरसा के पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति ने जब इस कांड को प्रकाशित किया तो इस बाबे ने उनकी भी हत्या करवा दी थी। इन दो मामलों में सीबीआई अदालत द्वारा दोषी घोषित करने व सजा देने के अलावा ऐसे अनेकों दुर्दान्त काण्ड भी इसके खाते में हैं जिनको साम, दाम, दण्ड, भेद की नीति द्वारा दबा दिया गया।
भोली जनता को अपने माया जाल में फंसा कर इसने न केवल सिरसा में भब्य अय्याशीखाना बना रखा है बल्कि अन्य कई स्थानों पर भी इसकी ब्रांचें खोल रखी हैं। यहां पर सतसंग की आड़ में तमाम बदकारियां होती हैं। लगभग तमाम राजनीतिक पार्टियों के नेता इसके सामने इसलिये माथा रगड़ते हैं कि इसके पास अंधभक्तों का अच्छा-खासा वोट बैंक है। दूसरी ओर अंधभक्त यहां बड़े-बड़े नेताओं को देख एवं प्रेरित होकर यहां अधिक से अधिक संख्या में आने लगते हैं। यानी कि नेताओं को देख कर पब्लिक और पब्लिक को देख कर नेता यहां बड़ी संख्या में आने लगते हैं।
हाल-फिलहाल यह पाखंडी बलात्कारी एवं हत्यारा भारी पुलिस सुरक्षा घेरे में बैठ कर किसी बागपत आश्रम से ऑनलाइन अपने भक्तों को बेवकूफ बनाने में जुटा है। इसकी दुकानदारी चमकाने के लिये भाजपा के अनेकों छोटे-बड़े नेताओं ने जगह-जगह बड़े-बड़े स्क्रीन लगा कर इसके भाव बढ़ाने का काम शुरू कर रखा है। मूर्ख लोगों में इस पाखंडी की मान्यता बढ़ाने के लिये हिसार जिले के विधायक एवं डिप्टी स्पीकर गंगवा ने अपने क्षेत्र में स्क्रीन के सामने खड़े होकर बाबा का यशोगान करते हुए आशीर्वाद मांगा तो बाबा ने भी उस पर अपनी कृपा बनाये रखने का आश्वासन दिया। इसी तरह करनाल की मेयर रेणुवाला गुप्ता ने तो बाबा को अपना पिता ही बाता दिया और करनाल आने का न्योता भी दे डाला जिसे बाबा ने स्वीकार भी कर लिया।
इससे पूर्व सन 2014-15 में जब मनोहर लाल खट्टर की सरकार बनी थी तो तमाम विधायक और मंत्री, अपनी जीत के लिये बाबा का धन्यवाद करने उसके डेरे पर गये थे। वहां जाने को तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी बहुत आतुर थे लेकिन कुछ सयाने अफसरों ने उन्हें समझा-बुझा कर वहां जाने से रोक लिया था। जानकार बताते हैं कि उस वक्त इन भाजपाईयों ने बाबे को करोड़ों का चढ़ावा चढ़ाया था।
जिस दुर्दान्त अपराधी के सामने राज्य की पूरी सरकार ही नतमस्तक हो तो उसका दिमाग तो खराब होना ही था। व आदमी को आदमी, सरकार को सरकार और जज को जज नहीं समझता था। ऐसे में बलात्कार व हत्या जैसे कार्यों को वह जघन्य अपराध न समझ कर मामूली दिनचर्या का हिस्सा मानता रहा है। बड़ी मुश्किल से उसके विरुद्ध उक्त अपराधों की कार्यवाही शुरू हुई तो थी लेकिन वह तारीखों पर कोर्ट में पेश होने ही नहीं जाता था। बड़ी मुश्किल से 25 अगस्त 2017 को फैसले वाली तारीख पर उसे जैसे-तैसे पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट में पेशी पर लाया गया।
उस दिन वह 200 से अधिक कारों के शाही काफिले के साथ कोर्ट पहुंचा था। भक्तों के वेष में बाबे के हजारों गुंडे कोर्ट परिसर के बाहर मौजूद हो कर जज पर दबाव बना रहे थे। लेकिन निर्भीक जज ने उसे 10-10 साल की दो अलग-अलग सजायें सुनाई तो वहां हंगामा हो गया। बाबे के गुंडों को सम्भालने के लिये फौज को भी बुलाना पड़ा था। इस हंगामे में 38 लोग मारे गये व सैंकड़ों घायल हो गये थे। सैंकड़ों गाडिय़ों व आस-पास के घरों में तोड़-फोड़ की गई थी। खट्टर सरकार की हिम्मत नहीं थी कि इस पाखंडी को सडक़ मार्ग से रोहतक जेल तक ले जाये। इसलिये हेलिकॉप्टर द्वारा इसे जेल भेजा गया था।
ऐसे दुर्दान्त अपराधी को जेल से बाहर निकालने का क्या मतलब? मतलब केवल एक ही है कि उसके चेले चपाटे हिमाचल में भाजपा को वोट देकर जिता दें। इसके अलावा इन भाजपाईयों को देश व जनता से कोई लेना-देना नहीं। इसी संदर्भ में सबसे मजेदार बात तो हरियाणा के गृहमंत्री विज ने कही कि बाबे की पैरोल से उनका क्या लेना-देना? यह तो जेल विभाग का मामला है और जेल नियमावली के अनुसार ही कैदियों को पैरोल दी जाती है, इसके अलावा उन्हें कुछ भी मालूम नहीं है।