फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) स्मार्ट सिटी की यातायात पुलिस इतनी स्मार्ट है कि सेक्टर 84 निवासी कार मालिक सुरेंद्र पटियाल का पिछली सीट की सवारी बिना हेल्मेट के वाहन चलाने का चालान काट दिया। वह भी तब जब उनकी कार घर पर खड़ी थी और वो काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे। यातायात पुलिस ने उनका ई-चालान किया था।
यातायात पुलिस की ओर से सुरिंदर को भेजे गए नोटिस में बताया गया कि उनकी कार एचआर 51 सीसी 0509 का ई-चालान दिनांक 16 अक्तूबर 2023 को 113 मवई रोड, जीवन नगर, सेक्टर 87 ओल्ड फरीदाबाद में वाहन चेकिंग के दौरान किया गया। चालान का कारण बताया गया कि पीछे बैठी सवारी ने हेल्मेट नहीं लगाया था। इसके सुबूत में एक बाइक की फोटो लगाई गई थी, इस बाइक की प्लेट पर रजिस्ट्रेशन नंबर एचआर 51 सीसी 5909 साफ-साफ पढऩे में आ रहा था। उन्हें समझते देर न लगी कि चालान गलत है।
इसके बाद अपना चालान निरस्त कराने के लिए उन्होंने यातायात थाने से लेकर आला अधिकारियों के चक्कर काटे। सबको बताया कि कार में सीट बेल्ट लगानी होती है हेल्मेट नहीं। जिस समय चालान किया गया उस समय तो वह घर पर मौजूद थे और कार बाहर खड़ी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। किसी अधिकारी ने चालान गलत होने के कारण निरस्त किए जाने का आदेश नहीं दिया। बेचारे गलत ई-चालान लेकर भटकते रहे। इधर उनके फोन पर चालान की राशि जल्द भरने के मैसेज आने लगे। जाम और यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के बजाय चालान काट कर सरकारी खजाने के साथ साथ अपनी जेबें भरने में व्यस्त ट्रैफिक पुलिस ने उनकी एक न सुनी तो उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की सोची। कचहरी में मौजूद वकीलों ने उन्हें 8 मार्च को लगने वाली लोक अदालत में आवेदन करने की सलाह दी। लोक अदालत में उनका नोटिस देखते ही जज ने चालान रद्द करने का आदेश जारी किया, इसके बाद पोर्टल से उनका चालान हटाया गया। यह काम यातायात पुलिस तब भी कर सकती थी जब सुरिंदर पटियाल कार्यालयों के चक्कर लगा कर जनविरोधी एवं अक्ल के दुश्मन पुलिस वालों को समझा रहे थे कि उन लोगों ने बाइक की जगह उनकी कार का नंबर चढ़ा दिया है, फोटो में बाइक का जो नंबर दिख रहा है चालान में उसे दर्ज किया जाए, लेकिन बिना भेंट लिए कुछ नहीं करने के आदी यातायात पुलिसवालों ने उनकी बात अनसुनी कर दी।
इस तरह का चालान केवल सुरिंदर को ही भेजा गया हो ऐसा नहीं है, दरअसल, यातायात पुलिस को अब जाम से निपटने, वाहनों का आवागमन दुरुस्त करने का नहीं बल्कि प्रतिदिन चालान काटने का टारगेट दिया जाता है। यातायात पुलिस के एक एएसआई ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रत्येक दिन 200 चालान काटने का टारगेट दिया जाता है। टारगेट पूरा न होने पर आला अधिकारियों की प्रताडऩा झेलनी पड़ती है। उनके अनुसार अधिकतर बाइक चालक हेल्मेट लगाते हैं, पिछली सवारी का हेल्मेट नहीं पहनने पर चालान काटना अनैतिक सा लगता है क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति रास्ते में मिल गया और उसे बैठा लिया, लेकिन टारगेट पूरा करने की मजबूरी में चालान काट देते हैं, बेचारे ने समाजसेवा की और एक हजार का चालान कट गया। सारे चालान सिर्फ दो पहिया वाहनों के ही नहीं करने होते, कार और भारी वाहनों का भी टारगेट दिया जाता है। अब यातायात व्यवस्था संभालें कि टारगेट पूरा करें।
वरिष्ठ आरटीआई एक्टिविस्ट सुरेश चंद गोयल कहते हैं वाहन चालकों से जुर्माना तो करोड़ों रुपये वसूला जा रहा है लेकिन क्या सड़कें दुरुस्त की जा रही है। प्रमुख सड़कों को जोडऩे वाली शहर की कोई भी सड़क गड्ढा रहित नहीं है, गलियों की बात ही छोड़ दीजिए। अब तो यातायात पुलिस भी उसी जगह चालान करने के लिए खड़ी होती है जहां सड़क टूटी फूटी हो क्योंकि चालक को यहां वाहन लगभग रोकना पड़ता है और उनकी फोटो आसानी से क्लिक की जा सकती है। वह कहते हैं कि सरकार को चाहिए कि पहले सड़कों की स्थिति बेहतर करे ताकि जाम न लगे और वाहन चालकों को समस्या न हो, वरना ई चालान को सरकारी लूट ही माना जाना चाहिए।