खुलेआम करोड़ों की ठगी करने वाले विशंबर दयाल को नहीं पकड़ रही पुलिस

खुलेआम करोड़ों की ठगी करने वाले विशंबर दयाल को नहीं पकड़ रही पुलिस
December 16 08:28 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी ने इंडियन पीनल कोड की जगह भारतीय न्याय संहिता लागू की तो मीडिया ने ऐसे ढिंढोरा पीटा था जैसे अब अपराध करने वालों की खैर नहीं, लेकिन लागू करने वाली पुलिस की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं हुआ। शिकायत देने पर पुलिस अब भी उम्मीद करती है कि पीडि़त ही आरोपी को पकड़ कर लाए तब वो कार्रवाई करे। पुलिस की इसी कार्यशैली के कारण शहर के दर्जनों लोगों से करीब तीस करोड़ रुपये ठगने का आरोपी विशंबर दयाल सिंघानिया शिकायत किए जाने के बावजूद इसी शहर में बेखौफ घूम रहा है और पीडि़त पुलिस के दरवाजे पर जूते घिस रहे हैं।

दर्जनों पीडि़तों में से एक हूडा कालोनी निवासी विमलजीत ने बताया कि दोस्त जगतार सिंह एवं वरुण बहल ने उनकी पहचान विशंबर सिंघानिया से कराई थी। विशंबर ने बताया था कि वह पिछले दो साल से फॉरेक्स ट्रेडिंग का काम कर रहा है इसमें पैसा लगाने पर प्रतिमाह 10-18 प्रतिशत तक रिटर्न निकलता है। दोस्तों के भरोसा दिलाने पर उन्होंने भी विशंबर के यहां 2 लाख 80 हजार रुपये लगाए, गारंटी के तौर पर उसने उन्हें इतनी कीमत के दो चेक भी काट कर दिए। उसने दो तीन महीने तक कुछ पैसे भी दिए और विश्वास जमाया। इस दौरान उन्होंने अपने कई और मिलने वालों से भी विशंबर के यहां पैसा लगाने को कहा। विशंबर ने किसी को फॉरेक्स ट्रेड में तो किसी को रियल एस्टेट में पैसा लगाकर 10 से 18 प्रतिशत प्रतिमाह रिटर्न देेने का झांसा दिया।

उनके मिलने वालों ने करीब दस करोड़ रुपये लगा दिए, विशंबर ने सबको गारंटी के रूप में उतनी ही रकम के चेक जारी किए। दो तीन महीने तक तो सबको पैसा मिला उसके बाद पैसा देना बंद कर दिया और फोन उठाना भी बंद कर दिया। इस पर उन्होंने और कई अन्य भुक्तभोगियों ने भुगतान के लिए विशंबर के चेक लगाए लेकिन सब बाउंस हो गए।

विमलजीत ने तफ्तीश करनी शुरू की तो पता चला कि विशंबर ने ओल्ड फरीदाबाद, बिजनेस हब बीपीटीपी और डबुआ कॉलोनी में सिंहानिया एंटरप्राइजेज नाम से ऑफिस खोल रखे हैं और लोगों से फॉरेन एक्सचेंज ट्रेडिंग, जमीन, प्लॉट खरीद फरोख्त में पैसा लगाकर एक साल में रकम दोगुनी करने का लालच देकर मोटी रकम ऐंठता है। साथ ही कमेटी चला कर हजारों लोगों से प्रतिमाह मोटी रकम लेकर डकार चुका है।

सच्चाई मालूम होने पर उन्होंने अपने और अन्य साथियों की बची धनराशि वापस करने के लिए विशंबर पर दबाव बनाया तो वह सेक्टर 18 के अपने किराए के आवास को छोड़कर भाग निकला। बताया जा रहा है कि इस दौरान उसने सैकड़ों अन्य लोगों से भी एक साल में रुपया दोगुने करने का झांसा देकर करीब तीस करोड़ रुपये ऐंठे।
खोजबीन के बाद पता चला कि विशंबर समृद्धि अपार्टमेंट सेक्टर 89 में रह रहा है। विमलजीत ने पुलिस से इसकी शिकायत की तो मामला आर्थिक अपराध का बताते हुए उन्हें थाने से आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत देने की सलाह देकर लौटा दिया गया। 19 नवंबर को उन्होंने इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) में शिकायत दी, तो पुलिस ने पहले तफ्तीश करने की बात कह, केस दर्ज नहीं किया। जब भी वो पूछते हैं तो बताया जाता है कि नोटिस भेजा गया है लेकिन आरोपी जांच में शामिल होने नहीं आ रहा है।

बताया जा रहा है कि ईओडब्ल्यू वाले करीब तीस करोड़ की इस ठगी को आर्थिक अपराध नहीं मानते, पीडि़तों से इस लेनदेन का सुबूत मांगा जा रहा है, जब पीडि़तों द्वारा विशंबर के बैंक अकाउंट का स्टेटमेंट देखने और उसमें पीडि़तों द्वारा जमा कराए गए धन देखने को कहा गया तो तुरंत ही दूसरा बहाना पेश किया गया कि विशंबर के साथ यदि किसी का कोई एग्रीमेंट हो तो वो दिखाओ।

लोगों ने बाउंस चेक दिखा कर इसके आधार पर केस दर्ज करने को कहा तो उन्हें टाल दिया गया और बताया गया कि आरोपी को बुलाकर उससे पूछताछ की जाएगी, इसके बाद ही कोई कार्रवाई हो सकती है। नोटिस पर नोटिस जारी किए जाने के बावजूद विशंबर थाने नहीं आ रहा। अब पुलिस पीडि़त पक्ष से उम्मीद लगाए है कि वह आरोपी को लेकर आए तब ही पूछताछ करेगी।

विशंबर के बैंक खाते में करोड़ों रुपये की ऑनलाइन इंट्री, उसके चेक बाउंस होना क्या उसके खिलाफ केस दर्ज करने के लिए पर्याप्त सुबूत नहीं हैं? उसके खिलाफ यदि ठगी की धारा 316 और धोखाधड़ी की धारा 318 के तहत केस दर्ज कर जांच की जाती तो पुलिस को उसे बुलाने की जरूरत नहीं पड़ती, गैर जमानती धाराएं होने के कारण उसे गिरफ़्तार किया जा सकता था लेकिन लगता है कि ईओडब्ल्यू के लिए सैकड़ों सेवानिवृत्त, संभ्रांत नागरिकों, बुजुर्ग महिलाओं को न्याय दिलाने से ज्यादा आरोपी के पक्ष में पीडि़त पक्ष को चक्कर लगवाना ही सही लग रहा है। ईओडब्ल्यू और पुलिस की इसी कार्यशैली के कारण आर्थिक अपराध और ठगी की वारदातें लगातार तेजी से बढ़ रही हैं, और कोई कार्रवाई, गिरफ़्तारी न होने से ठगों के हौसले बुलंद हैं।

इस तरह के मामलों में पुलिस का एक स्थायी जुमला यह रहता है कि ठग को पैसे क्या उससे पूछ कर दिए थे, कच्चे लालच में फंसने का परिणाम ऐसा ही होता है, जब कोई ठग को आमंत्रित करे तो पुलिस क्या करे आदि-आदि। यह ठीक है कि ठगी का शिकार होने वाला मूर्खतावश लालच में फंंसता तो जरूर है लेकिन अगर सारा दोष पीडि़त का ही होता है तो फिर धोखाधड़ी एवं चालबाजी की धाराएं बनाने की जरूरत ही क्या थी?

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Mazdoor Morcha
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