विकास नहीं लूट कमाई की योजनाओं का शिलान्यास कर रहे केंद्रीय मंत्री गूजर

विकास नहीं लूट कमाई की योजनाओं का शिलान्यास कर रहे केंद्रीय मंत्री गूजर
April 01 09:31 2026

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गूजर ने बीते दिनों वार्ड एक और पांच में करीब नौ करोड़ रुपयों के कार्यों का शिलान्यास किया। गूजर बीते दस-बारह वर्षों में ऐसे सैकड़ों शिलान्यास और उद्घाटन कर चुके हैं लेकिन ये सारे विकास की जगह लूट कमाई वाले प्रोजेक्ट ही साबित हुए हैं। गूजर के शिलान्यास-उद्घाटन के इतिहास को देखते हुए वार्ड एक और पांच के कार्यों में भी लूट-कमाई और जनता को ठगे जाने की प्रबल संभावनाएं नजर आ रही हैं। गूजर ने वार्ड -1 में पांच एकड़ में बनाए गए अटल पार्क का उद्घाटन किया तो पत्तलपाड़ मीडिया ने तारीफों के पुल बांध दिए क्योंकि इस पार्क में ओपन थियेटर और म्यूजिकल फाउंटेन भी स्थापित किए गए हैं। पाठकों को याद होगा कि सितंबर 2019 में स्मार्ट सिटी के तहत सेक्टर 21 में स्मार्ट पार्क बनाया गया था, इस पार्क में भी ओपन थियेटर बनाया गया था, स्मार्ट पैनल, किड्स जोन, न जाने क्या क्या बनाने पर करीब पौने तीन करोड़ रुपये लुटा दिए गए, सात साल भी नहीं बीते हैं, ओपन थियेटर की दुर्दशा देखी जा सकती है, इस पार्क का शिलान्यास भी पार्षदों का हक छीनने वाले कृष्णपाल गूजर ने किया था।

गूजर ने बडख़ल फ्लाईओवर से बाईपास रोड तक 42 करोड़ की लागत वाली स्मार्ट सड़क का भी उद्घाटन किया था। वहां लेजर लाइट शो, वाईफाई, स्मार्ट फुटपाथ, स्टॉर्म वाटर लाइन, साइकिल ट्रैक न जाने क्या क्या दावे किए गए थे। साइकिल ट्रैक गायब है, फुटपाथ पर अतिक्रमण है, थोड़ी सी बारिश में ही पूरी स्मार्ट सड़क पानी से भर जाती है, यह सड़क भी भ्रष्टाचार और लूट कमाई का स्मार्ट नमूना है। म्यूजिकल फाउंटेन की बात की जाए तो गूजर ने बीते साल तीन सितंबर को डबुआ लेजर वैली पार्क में चार करोड़ कीमत वाले एक फाउंटेन का उद्घाटन किया था। मज़दूर मोर्चा ने तब म्यूजिकल फाउंटेन के नाम पर की जा रही बंदरबांट का खुलासा किया था कि कैसे बाजार में यह संगीतमय फव्वारा पचास लाख रुपये में उपलब्ध है जिसके लिए चार करोड़ का बिल फाड़ दिया गया। मज़दूर मोर्चा की आशंका सच्ची निकली और उद्घाटन के तीसरे सप्ताह ही आधा फाउंटेन कबाड़ होकर बंद हो गया और म्यूजिक ने चुप्पी साध ली थी।

मज़दूर मोर्चा ने ‘भाजपाई ट्रिपल इंजन सरकारों का लूट कमाई मॉडल : चालीस दिन भी नहीं चला चार करोड़ का फव्वारा’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर गूजर के विकास कार्यों की सच्चाई बताई थी। गूजर द्वारा उद्घाटन किया गया यह पहला फव्वारा नहीं है जिसमें जनता की गाढ़ी कमाई लूटी गई। इससे पहले सेक्टर 31 में भी लाखों रुपये की लागत से म्यूूजिकल फाउंटेन लगवाया गया था जो कुछ दिन बाद गायब ही कर दिया गया था। गूजर के सबसे प्रिय मंझावली पुल का शिलान्यास तो सबको याद ही होगा। डेढ़ सौ करोड़ से अधिक बर्बाद हो गए लेकिन पुल चालू नहीं हो सका, यहां तक कि बिना इस्तेमाल के ही पुल का गारंटी पीरियड भी खत्म हो गया। अब तो चर्चा होने लगी है कि गूजर-गडकरी ने यह पुल जनता के लिए नहीं बल्कि संघी ठेकेदारों को मोटी कमाई कराने के उद्देश्य से किया था, ट्रिपल इंजन सरकारों के जानकारों की मानें तो कोई भी विकास कार्य बिना नेता-मंत्री और अधिकारियों की हिस्सापत्ती के होता ही नहीं है, इस आधार पर समझा जा सकता है कि मंझावली पुल में भी सबकी जेबों में हिस्सा भी गया होगा, जनता की किसे परवाह। गूजर के विकास कार्यों की इन करतूतों को देख कर यह कहना गलत नहीं होगा कि वार्ड एक और पांच में खर्च होने वाले 8 करोड़ 85 लाख रुपये भी मलियामेट होने वाले हैं।

पार्क, म्यूजिकल फाउंटेन आदि जरूरी हैं लेकिन इनसे भी ज्यादा जरूरी पेयजल आपूर्ति, जलभराव, गंदगी, सीवर ओवरफ़्लो, टूटी सड़कों की समस्याओं पर काबू पाना है। गर्मी आते ही पूरे शहर में पीने के पानी की किल्लत हो जाती है। भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकारों में करीब दस साल पहले शहर में 450 एमएलडी पेयजल की जरूरत थी, जो वर्तमान में बढ़ कर कहीं ज्यादा हो चुकी है। पिछले दस साल में गूजर ने शहर की प्यासी जनता को पर्याप्त पानी मुहैया कराने की शायद ही कोई गंभीर कोशिश की हो, आज भी मांग के सापेक्ष करीब बीस फीसदी यानी लगभग नब्बे एमएलडी पानी की कमी है। शहर की सीवेज व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के नाम पर करोड़ों रुपये लूट-बांट लिए गए, इसका परिणाम है कि बरसात में पूरा शहर लबालब हो जाता है।

खराब वायु गुणवत्ता, टूटी सड़कें न जाने कितनी समस्याएं हैं। बाटा पुल पर दोनों ओर जगह-जगह छह इंच से एक फुट तक गहरे और दो से चार फुट तक लंबे गड्ढे हैं, इन गड्ढों के कारण वाहन सुचारु रूप से नहीं चल पाते और इनमें फंंस कर टूटते फूटते रहते हैं। ये गड्ढे बीते करीब पांच साल से बने हुए हैं लेकिन मंत्री गूजर को नजर नहीं आते। जानकार कहते हैं कि आते हैं लेकिन पैचवर्क से न अधिकारियों का भला होना है न नेता-मंत्री का, संभवत: इसीलिए पुल को जर्जर होने के लिए छोड़ दिया गया है, ताकि पूरा पुल नए सिरे से बनाया जाए। इसके लिए करोड़ों रुपये का प्रोजेक्ट बनेगा तभी सबको मनमाफिक हिस्सापत्ती भी मिलेगी। यदि ऐसा न होता तो मंत्री गूजर, विधायक मूलचंद या धनेश अदलखा इस पुल की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर करवाने के प्रयास करते लेकिन रिश्वतखोरी के आरोपों से सबके दामन दागदार हैं। कृष्णपाल गूजर को दिल्ली-मथुरा हाईवे बनाने वाले ठेकेदार से साठ करोड़ रुपये मांगने के आरोप में सड़क मंत्रालय से निकाला गया था, तो उसका चेला धनेश अदलखा हरियाणा फार्मेसी काउंसिल में अभ्यर्थियों से वसूली और पांच करोड़ के गबन का आरोपी रहा है। विधायक मूलचंद का नाम भी नगर निगम में दो सौ करोड़ के घोटाले में है, ठेकेदार सतबीरा ने उन्हें रिश्वत के रूप में महंगी कार भेंट की थी और परिवार को पर्यटन कराने के लिए हवाई यात्रा व होटल आदि का खर्च भी दिया था। गूजर यदि जनता के प्रति सच में ईमानदार हैं तो पहले इन समस्याओं का समाधान करें, इसके बाद ऐसे म्यूजिकल फाउंटेन भी लगाएं जो चलें न कि पिछलों की तरह लूट कमाई की भेंट चढ़ जाएं।

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Mazdoor Morcha
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