फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) गाय और बहन बेटियों की रक्षा का नाटक करने वाले कामेच्छा पीडि़त दंगाई बिटुआ को शादी के लिए बीस से पच्चीस उम्र की कन्या चाहिए। कन्या कहीं पचास वर्षीय सांड जैसे मोटे थुलथुले बजरंगी को देख कर शादी से इनकार न कर दे इसलिए अपनी जगह मरे हुए भाई की फोटो भेज दी। फिर वही हुआ जो होना था, कन्या ने जिस लड़के की फोटो देख कर शादी के लिए हामी भरी थी आमना सामना होने पर उसकी सारी सच्चाई सामने आ गई। दंगाई के दबाव में बेचारी उस समय तो कुछ न बोल सकी लेकिन एैन शादी के दिन इनकार कर दिया और गायब हो गई। दूल्हा बन कर अलीगढ़ के मंदिर में विवाह करने पहुंचे बिटुआ को घंटों इंतजार करने के बाद दुल्हन और उसका परिवार आता नहीं दिखा तो खाली हाथ लौटने को मजबूर हुआ। घटना सितंबर 2025 की बताई जा रही है लेकिन बिटुआ ने करीब चार महीने बाद थाने में शिकायत दी। दरअसल, इतने समय तक बिटुआ कन्या और उसके परिवार वालों से किसी भी कीमत पर शादी करने का दबाव बनाता रहा। उसका एक ऑडियो भी वायरल है जिसमें वह कन्या से कह रहा है कि चाहे एक सप्ताह के लिए आ जाए उसके बाद चली जाए। बिटुआ उसे सारे तरह के प्रलोभन देता रहा लेकिन इस मोटे गैंडे के साथ शायद ही कोई कन्या रहने को राजी होती। कन्या पक्ष पर अपनी बजरंग फोर्स, दंगाई संगठन सहयोगियों से दबाव भी डलवाया गया होगा लेकिन संभवत: बिटुआ का खूंरेजी और दंगों वाला इतिहास सामने आने पर कन्या और उसके परिवार वाले पीछे हट गए। अपने सारे हथकंडे बेकार जाते देख बिटुआ ने पुलिस के जरिए दबाव बनाना चाहा लेकिन कहानी उल्टी हो गई। शादी तो हुई नहीं जग हंसाई अलग से हुई।
समझने वाली बात यह है कि हिंदू धर्म में शादी के लिए कन्या पक्ष ही ज्यादा खर्च करता है यहां तक कि दहेज के रूप में लाखों रुपये कन्याधन भी देता है। हास्यास्पद यह है कि इस शादी के लिए बिटुआ कन्या पक्ष को एक लाख बीस हजार रुपये देने का दावा कर रहा है। बिहार और पूर्वांचल में इस तरह के काम को शादी नही बल्कि कन्या खरीदना कहा जाता है। पुलिस को भी इस बिंदु की जांच करनी चाहिए कि कहीं बिटुआ ने शादी के नाम पर कन्या खरीदने के लिए तो करीब सवा लाख रुपये नहीं दिए थे।
बिटुआ को छोटा भाई बताने वाले पूर्व सीएम खट्टर को ही उस पर तरस खाना चाहिए। अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर खट्टर ने बड़ी शान से कहा था कि अब कश्मीर का रास्ता साफ हो गया है और अब हम कश्मीर से लड़कियों को लाएंगे। खट्टर को चाहिए कि लड़की के लिए इधर उधर-भटक रहे और थाने में फूट फूट कर रो रहे छोटे भाई बिटुआ के लिए कश्मीर से ही कोई लड़की लाकर दे दें। बहुत दुखदायी स्थिति है कि पूरे देश के गोरक्षा संगठनों, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, मोनू मानेसर आदि कट्टरवादियों का पूरा नेटवर्क खट्टर के चहेते बिटुआ के विवाह के लिए एक अदद कन्या उपलब्ध नहीं करा सका। इन संघी-बजरंगियों को कुछ नहीं तो अपने आका संघ प्रमुख मोहन भागवत का सपना कि ङ्क्षहदू तीन बच्चे पैदा करें ही पूरा करने के लिए बिटुआ का विवाह करा देना चाहिए। धार्मिक कट्टरता के नाम पर एक दूसरे के लिए तन, मन धन से जुटने वाले दंगाई सनातनियों में अनेकों के घर में विवाह योग्य बहन, बेटी तो होगी।
समान विचारधारा वाले लोग बि़टुआ के साथ अपनी बहन बेटी क्यों नहीं ब्याह देते, बेचारे को हरियाणा छोड़ अलीगढ़, बुलंदशहर में धक्के खाने पड़ रहे हैं। सारे दंगाई बिटुआ जैसों का भविष्य अच्छी तरह से जानते हैं शायद इसीलिए दंगा करने में भले ही उसके साथ खड़े हों लेकिन बहन-बेटी नहीं दे सकते। इन संघियों के चक्कर में आकर चंद मुसलमानों को फंसाने के लिए जिस बेचारे बिटुआ ने अपने हाथों से अपने भाई की कुर्बानी दे दी, वही संघी उसके लिए एक कन्या का इंतजाम नहीं कर सकते? शर्मनाक, लानत है ऐसे संघी साथियों पर।