ट्रॉमा सेंटर से हरियाणा सरकार ने पल्ला झाड़ा

ट्रॉमा सेंटर से हरियाणा सरकार ने पल्ला झाड़ा
March 30 17:35 2026

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पृथला के विधायक रघुवीर तेवतिया द्वारा पूछे जाने पर सरकार ने बताया कि होडल से फरीदाबाद के बीच ट्रॉमा सेंटर खोलने की कोई जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि इसी सरकार ने बीते वर्ष इसी विधायक की मांग पर आश्वासन दिया था कि आगामी एक वर्ष तक इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रामा सेंटर स्थापित कर दिया जाएगा। लेकिन एक साल के बाद सरकार का कहना है कि ट्रामा सेंटर की जरूरत ही नहीं है क्योंकि पलवल में सिविल हॉस्पिटल तथा बल्लभगढ़ स्थित सिविल हॉस्पिटल एकदम राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित हैं, जो ट्रामा सेंटर का काम कर सकते हैं। पलवल सिविल हॉस्पिटल तक पहुंचने में जाम के कारण जो देर लगने की समस्या थी उसे फ्लाईओवर बनवाकर इस सरकार ने दूर कर दिया है।

सुधी पाठक जान लें कि ट्रामा सेंटर होता क्या है। राजमार्ग पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों को जिस तरह की मेडिकल सुविधा की जरूरत होती है उसे प्रदान करने के लिए ट्रामा सेंटर बनाए जाते हैं। ट्रामा सेंटर में कम से कम एक ऑर्थोपेडिक (हड्डियों का डॉक्टर), एक सर्जन, एक फिजिशियन, एक ऑपरेशन थियेटर, ब्लड बैंक, कम से कम दस बेड का आईसीयू वार्ड होना आवश्यक होता है इसके साथ इमरजेंसी लैब, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन भी जरूरी होता है। उक्त बताए गए डॉक्टर तो चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगे। इनके अलावा न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, इसके अलावा ईएनटी, ऑप्थेल्मोलॉजी, प्लास्टिकसर्जरी आदि के डॉक्टरों को ऑन-कॉल (यानी कि जरूरत पडऩे पर बुलाया जा सके) रखा जाता है। यह बताने की जरूरत नहीं कि इन डॉक्टरों के अतिरिक्त और कितना व किस तरह का स्टाफ रखे जाने की आवयश्कता होती है, यह सब स्वास्थ्य सेवाओं की संहिता में लिखा हुआ है।

ट्रामा सेंटर के उक्त विवरण को देखकर सुधी पाठक समझ गए होंगे कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की जान बचाने के लिए ये सभी सेवाएं तुरंत उपलब्ध कराना आवश्यक होता है। उस वक्त इतना समय नहीं होता कि दूरदराज के बड़े अस्पतालों तक घायल को ले जाया जा सके। सरकार द्वारा बताए गए उक्त सिविल अस्पतालों में ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। एक डॉक्टर है तो दूसरा नहीं है, ओटी है तो ब्लड बैंक नहीं है, आईसीयू का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। पलवल व बल्लभगढ़ वाले अस्पतालों की श्रेणी में ही फरीदाबाद का बीके अस्पताल भी आता है, यहां भी इस तरह के इलाज के लिए कोई सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इन सभी अस्पतालों का स्तर इस बात से आंका जा सकता है कि साधारण डिलीवरी व फ्रैक्चर जैसे मामलों को हर रोज सफदरजंग (दिल्ली) रेफर कर दिया जाता है। जाहिर है ऐसे में ये अस्पताल ट्रामा सेंटर का विकल्प कतई नहीं हो सकते। हां, जिस सरकार की नीयत काम करने की न हो और जो घोर जनविरोधी मानसिकता रखती हो, उससे ऐसा ही जवाब मिलना था जो मिल गया।

संदर्भवश, स्थानीय ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा कई वर्ष पूर्व ट्रामा सेंटर बनाने के लिए प्रयास किए गए थे। इसके लिए कॉरपोरेशन मुख्यालय ने स्वीकृति भी दे दी थी। इसी आधार पर करीब डेढ़ वर्ष पूर्व कॉरपोरेशन अधिकारियों और स्थानीय विधायक एवं हरियाणा सरकार के मंत्री विपुल गोयल के बीच लंबी वार्ता चलने के बाद ट्रामा सेंटर के लिए पंद्रह एकड़ जमीन मेडिकल कॉलेज अस्पताल को देने की बात तय पाई गई थी। उस वक्त मंत्री विपुल गोयल ने एक शर्त यह रखी थी कि ट्रामा सेंटर में उन आम नागरिकों को भी समुचित इलाज उपलब्ध कराया जाएगा जो ईएसआई कवर्ड नहीं हैं। कॉरपोरेशन ने उनकी यह शर्त तुरंत मानते हुए आधे बेड गैर बीमित लोगों के लिए रखना स्वीकार किया था।

लेकिन जनता का दुर्भाग्य यह है कि उनके नेताओं को जुमलेबाजी के अतिरिक्त धरातल पर कोई काम करने में कतई रुचि नहीं है। इसके परिणामस्वरूप ट्रामा सेंटर की बात जहां थी वहीं खड़ी है। लोग दुर्घटनाग्रस्त होकर मरते हैं तो मरते रहें, उनकी बला से। एमसीआई/एनएमसी जब भी किसी मेडिकल कॉलेज को खोलने की अनुमति देते हैं तो उन पर एक कंडीशन यह भी होती है कि वे देहाती क्षेत्र में अपने छात्रों के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करेंगे। इसी शर्त को पूरा करने के लिए तत्कालीन डीन डॉ. असीम दास ने 2015 से तथा बाद में डॉ. अनिल पांडेय ने अपने स्तर पर पृथला क्षेत्र में एक सेंटर स्थापित करने का प्रयास किया था। इसके लिए ततारपुर गांव वालों ने तीन एकड़ जमीन भी नाम मात्र राशि के बदले पट्टे पर देने का प्रस्ताव दिया था लेकिन मुख्यालय में बैठे जनविरोधी हरामखोरों को यह बात पसंद नहीं आई और उन्होंने सिविल अस्पताल फरीदाबाद की गांव पाली में स्थित एक डिस्पेंसरी में अपना नकली सा ग्रामीण सेंटर बनाकर औपचारिकता पूरी कर ली। यदि मेडिकल कॉलेज से संबंधित एक ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा केंद्र पृथला के क्षेत्र में स्थािपत कर दिया जाए तो ट्रॉमा सेंटर की प्राइमरी लेवल की कुछ सुविधाएं जैसे कि चौबीसों घंटे डॉक्टर की उपलब्धता, माइनर ऑपरेशन थियेटर, ब्लड स्टोरेज सेंटर तथा सभी सुविधाओं से लैस एंबुलेंस उपलब्ध कराई जा सकती है। इस सेंटर में एमबीबीएस पासआउट छात्र को प्रोफेसर के अंडर आवश्यकतानुसार दो या तीन महीने के लिए ट्रेनिंग कराई जाती है, ये चौबीस घंटे ड्यूटी दे सकें इसके लिए परिसर में ही इनके लिए हॉस्टल भी बनाया जाता है।trauma center

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Mazdoor Morcha
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