मनीष आजाद वोट चोरी हेडक्वार्टर की लाइट्स झपझपा रही हैं। मुचुचो (मुख्य चुनाव चोर) ज्ञानू गधेश ऑफिस बन्द कर, अपनी स्कूटर पर जा रहे हैं। कहीं दूर रेडियो पर “नैना बरसे रिमझिम… बजता है। ………….. ज्ञानू (खुद से) ये बारिश… ये सन्नाटा… जैसे कोई श्वङ्करू मुझे बुला रहा हो। तभी सड़क पर अचानक एक सफेद साड़ी वाली सुंदरी हाथ हिलाती है। ज्ञानू ब्रेक लगाते हैं। – सुंदरी (धीमी, खरखराती आवाज) ज्ञानू साहब… मुझे पोलिंग बूथ तक छोड़ देंगे? – पोलिंग बूथ? इस वक्त? वोटिंग तो खत्म हो गई! – हमारा वोट पोलिंग के बाद ही पड़ता है। हिहिहि सुंदरी स्कूटर पर बैठती है। उसका चेहरा आधा दिखता है। ठंडी हवा चल रही है। बाला त्नमेरा नाम… स्वीटी ब्राजीलियन है। पोलिंग बूथ पहुंचते ही वो गेट खोलकर गायब हो जाती है। ज्ञानू चिल्लाते हैं – सुइटी जी! रुकिए! मगर सिर्फ गूंजता है नैना बरसे… ……. सीन 2 – वोट चोरी ऑफिस ज्ञानू पुराने चुनाव के सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने में व्यस्त रहा है। तभी एक मतदाता आता है – वही चेहरा! स्वीटी ब्राजीलियन स्वीटी (मुस्कुराते हुए)- गधेश साहब, सिर्फ 15 वोट डाल पाई। लेकिन मेरी आत्मा को चैन नही। हर रात सपने में कोई EVM मुझे बुलाती है।” ज्ञानू (पसीना छूटता है) तुम… तुम वो ही हो ना? उस रात, जिसे मैंने पोलिंग बूथ में छोड़ा था?” स्वीटी (हंसकर): क्या कह रहे हैं आप? मैं तो पहली बार मिल रही हूँ। अचानक फोन बजता है। खबर ये कि बस एक्सीडेंट में स्वीटी ब्राजीलियन नाम की लड़की मर गई। ज्ञानू दौड़कर मोर्चरी जाते हैं – लाश का चेहरा ढका है। जब उठाते हैं – वही चेहरा! ज्ञानू (चिल्लाते हुए): नहीं ह्यह्यह्यह्यह्य ये मुमकिन नहीं! ये तो अभी मेरे साथ थी। ……… सीन 3 – पुरानी हवेली (EVM का गोदाम) ज्ञानू की मां उसकी शादी तय करती हैं। दुल्हन का नाम: स्वीटी ब्राजीलियन है। बारात आती है। घूंघट उठता है – वही चेहरा! ज्ञानू (पीछे हटते हुए): तुम,? ये नही हो सकता। तुम तो स्वीटी ब्राजीलियन हो बाला (शांत स्वर में) नही। मैं आपकी पत्नी हूँ। मेरा नाम है सीमा हरयाणवी.. ज्ञानू भौचक रह जाता है। वह उससे कागज़ मांगता है। सीमा आधार दिखाती है। लेकिन आधार तो मान्य है ही नही.. वह उससे उसके बाप का बर्थ सर्टिफिकेट मांगता है। सीमा उसे खींचकर एक तमाचा जड़ती है। वेरिफिकेशन हो जाता है। ….. अब रात को ज्ञानू तमाचे वाले गाल में तेल लगा रहा था कि आवाज आती है – चल फिर डालें, वोट के फिर ये हसीं पोल हो न हो… वह भागता है। एक कमरे से दूसरा कमरा। चोरी की EVM के ऊपर, फर्जी वोटर रोल्स के पीछे, छुपाए गए 17 प्रतिशत के बीच से घुसाया कैमरा दिखाता है- गोदाम में जगह जगह सीमा हरयाणवी नकली EVM लेकर साथ नाच रही है। वह भागता है, बैडरूम में झांकता है। तो वहां वो सो भी रही है! ज्ञानू (पागलों की तरह): एक साथ दो जगह? ये कौन है? वो कौन थी? ………….. क्लाइमेक्स- बैगा राहुल को बुलाया जाता है। वो ज्ञानू के पुराने पापों का रजिस्टर खोज निकालते हैं। उसमे तमाम मरे खपे लोगो के नाम, जिंदा बताकर लिखे हैं। उसके बदले तमाम जिंदो को मारकर हिसाव बराबर कर दिया गया है। इस रजिस्टर में राहुल को सवूत मिल जाते हैं। स्वीटी ब्राजियलियन की एक जुड़वां बहन थी – बिहारी बहना। वो पुल गिरने से हुए हादसे में मर गई थी। लेकिन ब्राजियलियन बाला को लगता है बिहारी बहना का वोट उसे सताता है। राहुल अब रहस्य की तह तक पहुँच चुके हैं। यहां एक्टर, डायरेक्टर, राइटर, फाइनैंसर, डिस्ट्रीब्यूटर और दर्शक, इस पोस्ट के पाठक का दोगला चरित्र खुल रहा है। …… राज खुलते ही सीमा हरयाणवी उर्फ स्वीटी ब्राजियलियन उर्फ बिहारी बहना माफी मांगने लगती है। रोते हुए- मुझे माफ़ कर दो। मेरी बहन मुझसे वोट मांगती थी… लेकिन मैंने उसकी EVM चुरा ली। अब वो मुझे माफ नहीं करती।” ज्ञानू, सीमा हरयाणवी को माफ कर देते हैं। उसे गले से लगाते हैं। अचानक बिजली चली जाती है। आंटी की आत्मा EVM लेकर मुस्कुराकर गायब हो जाती है।) ज्ञानू (बाला से): अब डर नहीं। वो चली गई। बाला: नहीं… वो मेरे अंदर थी। मैं ही आंटी थी… और बाला भी। हिहिहोहोहाहा ज्ञानू की आंखे फटी रह जाती है।। स्क्रीन पर लिखा आता है: वो कौन थी? ……… शायद हम सबके भीतर एक सीमा हरयाणवी है, और स्वीटी ब्राजीलियन। फि़ल्म का संदेश यही है, की इस सबके दोषी हम है। क्योकि मोदी जी तो दोषी हो नही सकते। EVM की लॉन्ग बीप मद्धिम होती जाती है। फि़ल्म खत्म होती है। द इण्ड!!! …….. और फिर एक पॉप अप स्क्रीन पर उभरता है। दिस मूवी इज ब्रॉट टू यू बाय मोडानी इंटरप्राइजेज