फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम में केवल विकास कार्यों के नाम पर ही करोड़ों की लूट बांट नहीं होती, कलेक्शन एजेंट का काम करने वाले कर्मचारियों को बचाने के लिए निगम के आला अधिकारी शहरी-स्थानीय निकाय विभाग के नियमों को भी दरकिनार करने में भी नहीं डरते। सफाईकर्मी भर्ती हुुआ प्रेमचंद अधिकारियों को लूट कमाई की मलाई खिलाकर उनकी मेहरबानियों से पदोन्नतियां पाता रहा और टैक्सेशन इंस्पेक्टर तक पहुंच गया। यहां तक कि जब राज्य पात्रता कंप्यूटर परीक्षा (एससीईटी) उत्तीर्ण होने की बात आई तो उसे बचाने के लिए अधिकारियों ने सूची से उसका नाम ही हटवा दिया। एससीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने तक कर्मचारी को पदोन्नति के बावजूद बढ़ा हुआ वेतन नहीं देने का नियम है। प्रेम चंद को बचाने के लिए निगम अधिकारियों ने न केवल उसे बल्कि अन्य पदोन्नत हुए अन्य कर्मचारियों का बढ़ा हुआ वेतन भी जारी करवा दिया ताकि ये कर्मचारी हो हल्ला न करें, समझा जा सकता है कि नगर निगम और इसके अधिकारी-कर्मचारी शहरी स्थानीय निकाय के नियम कानूनों की जगह अपनी मनमानी चला रहे हैं।
खुद को पूर्व मंत्री शिवचरण लाल शर्मा का पारिवारिक सदस्य बताने वाला प्रेमचंद उनकी ही सिफारिश पर नगर निगम में सफाई कर्मचारी की नौकरी पाया था। भर्ती के बाद उनकी ही कृपा से अधिकारियों ने नियम ताक पर रख कर उसे सफाई कर्मचारी से लाइब्रेरी अनुचर बना दिया था। प्रेमचंद ने कभी लाइब्रेरी की शक्ल भी नहीं देखी लेकिन अधिकारियों के लिए लेनदेन कर उनका कलेक्शन एजेंट बन गया। अधिकारियों को खुश करने में माहिर प्रेम उनके लिए पैसे से लेकर फरमाइशें और निजी काम कराने के कारण उनके पीए की तरह रहने लगा।
निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास के कलेक्शन एजेंट के रूप मेंं भी उसने खूब सेवाएं दीं लेकिन मज़दूर मोर्चा ने अगस्त 2023 के अंक में उसका कच्चा चिट्ठा खोल दिया तो शरम खाकर मोना ने उसे अपने कार्यालय से हटा दिया, लेकिन उसे अपने मूल पद पर भेजने के बजाय ईओ ब्रांच में लिपिक लगा दिया। कुछ दिन निगमायुक्त दफ्तर के चक्कर काटने के बाद प्रेमचंद ने अपने नए बॉस अतिरिक्त निगमायुक्त रवींद्र आर पाटिल का कलेक्शन एजेंट बन कर उनकी नदीकियां हासिल कर लीं।
ई गवर्नेंस पॉलिसी के तहत खट्टर सरकार ने वर्ष 2018 से पदोन्नत होने वाले कर्मचारियों के लिए स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट इन कंप्यूटर एप्रीसिएशन एंड एप्लीकेशन परीक्षा (एसईटीसी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया था। नियम था कि जो कर्मचारी एसईटीसी उत्तीर्ण नहीं करेगा तो उसका बढ़ा हुआ वेतनमान जारी नहीं किया जाएगा। यदि कर्मचारी परीक्षा में असफल होगा तो उसे पदावनत कर दिया जाएगा। नगर निगम के भी 28 कर्मचारियों को यह परीक्षा देने के लिए पंचकूला स्थित हारट्रोन मुख्यालय जाना था। सफाईकर्मी प्रेमचंद को कंप्यूटर की एबीसीडी नहीं आती थी, उसे मालूम था कि फेल होने पर पदावनत होना पड़ेगा, बताया जाता है कि खुद को बचाने के लिए उसने निगम के बाकी कर्मचारियों को परीक्षा नहीं देने के लिए भड़काना शुरू किया। परीक्षा न देनी पड़े इसके लिए हर निगमायुक्त को साध कर, उनकी मान मनौव्वल कर परीक्षा टलवाता रहा। इधर मुख्यालय से नोटिस जारी होते रहे, उधर प्रेमचंद के चाहने वाले निगमायुक्त कोई न कोई बहाना बना कर साल-छह महीने का समय ले लेते। यही नहीं मोटी मलाई खिलाने वाले प्रेमचंद की मोहमाया में अंधे अधिकारियों ने पदोन्नति का बढ़ा वेतनमान भी जारी करवा दिया। अन्य कर्मचारी भी बवाल न करें तो एसईटीसी परीक्षा पास करने के वायदे पर सबको बढ़े वेतनमान के अनुसार भुगतान भी शुरू करवा दिया। लिपिक पूनम ने परीक्षा पास कर सर्टिफिकेट जमा करवाया तो प्रेमचंद सहित अन्य पर परीक्षा का दबाव बढ़ गया। बताया जा रहा है कि इस कवायद से बचने के लिए उसने आला अधिकारियों की खास सेवा की और परीक्षा देने वालों की सूची से अपना नाम हटवाने में कामयाब हो गया। आला अधिकारियों की मेहरबानी से एसईटीसी परीक्षा नहीं देने वाले कर्मचारियों की जो नई सूची बनाई गई है उसमें से प्रेमचंद का नाम नदारद है।
बताया जा रहा है कि स्थानीय शहरी निकाय मुख्यालय अब चुनाव के बाद बचे हुए कर्मचारियों को एसईटीसी परीक्षा देने का अंतिम नोटिस जारी करने वाला है लेकिन आला अधिकारियों की मेहरबानी से प्रेमचंद निश्चिंत होकर घूम रहा है। बताते चलें कि हाल ही में अतिरिक्त निगमायुक्त की मेहरबानी से नियमों को ताक पर रख कर प्रेमचंद को टैक्सेशन अधिकारी पर पदोन्नत कर दिया गया है, लेकिन वह एसईटीसी परीक्षा नहीं देगा। कहने को तो वह इंस्पेक्टर बना दिया गया है लेकिन अपने आका रवींद्र आर पाटिल की मेहरबानी से ईओ ब्रांच का बेताज बादशाह बना घूम रहा है, साथ ही कराधान शाखा में भी धाक जमाकर वहां भी लूट कमाई के रास्ते खोजने शुरू दिए हैं। प्रेमचंद का नाम सूची से निकाले जाने के कारण अन्य कर्मचारियों में आला अधिकारियों के प्रति काफी रोष है, लेकिन क्योंकि इन लोगों को भी बढ़ा हुआ वेतन मिल रहा है इसलिए खुल कर विरोध करने से बच रहे हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि वो लोग अपनी ड्यूटी मेहनत से करते हैं, प्रेम तो अपनी कुर्सी पर भी नहीं बैठता, फिर भी उसे सारी सुविधाएं दी जा रही हैं। निगम में कोई भी काम निगमायुक्त की जानकारी और मर्जी के बिना नहीं होता है। समझा जा सकता है कि एसईटीसी परीक्षार्थियों की सूची से प्रेम का नाम भी निगमायुक्त की जानकारी और उनकी मर्जी से ही निकाला गया होगा।