तिरंगा यात्रा : मोदी भक्ति ही भाजपाइयों की नजर में देशभक्ति

तिरंगा यात्रा : मोदी भक्ति ही भाजपाइयों की नजर में देशभक्ति
August 20 04:49 2024

पलवल (मज़दूर मोर्चा) उद्यमियों, डिपो होल्डर, कारोबारियों से तिरंगा यात्रा के नाम पर जबरन चंदा उगाही करवाने वाली भाजपा के नेता मोदीभक्ति को ही देशभक्ति मानते हैं। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का यह कहना कि दस साल में पीएम मोदी ने देशभक्ति का जज्बा पैदा किया, उनकी तुच्छ मानसिकता, मोदी भक्ति और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के प्रति उनकी उपेक्षा को दर्शाता है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की क़ुर्बानियों को कमतर करने के पैंतरे अपनाने वाले संघी-भाजपाई उन नमक हराम औलादों की तरह व्यवहार कर रहे हैं जो उन माता-पिता से ही संबंध तोड़ लेते हैं जिन्होंने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया।

देश चलाने में हर कदम पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हो रहे मोदी ने अपनी नाकामियां छिपाने के लिए जनता को छद्म राष्ट्रवाद का छलावा दिया, तिरंगा यात्रा भी उसी छलावे का हिस्सा है। मोदी जी जब पैदा भी नहीं हुए थे तब स्वतंत्रता सेनानी तिरंगा हाथ में लेकर देशक्ति से ओतप्रोत होकर फिरंगियों से लड़ रहे थे और आपके कायर संघी पूर्वज सावरकर जिसे आप वीर कहते हैं, अंग्रेजों से माफी मांग कर उनकी पेंशन के टुकड़ों पर पल कर स्वतंत्रता संग्राम को कमजोर करने में ज़ुटे थे। माफीवीर सावरकर की तरह ही संघ की पाठशाला के होनहार कार्यकर्ता रहे भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और उनके भाई प्रेम बिहारी ने जेल जाने से बचने के लिए झूठी गवाही देकर चार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को जेल भिजवाया था।

अटल बिहारी वाजपेयी के गांव के ही लीलाधर वाजपेयी 27 अगस्त 1942 को हुई उस घटना में शामिल थे। उनका दावा था कि उस दिन कोई डेढ़ दो सौ लोग जंगलात महकमे की एक बिल्डिंग पर तिरंगा झंडा फहरा रहे थे। घटना में अटल बिहारी और उनके भाई प्रेम शामिल नहीं थे बल्कि दूर से तमाशबीनों में शामिल थे। पुलिस ने उस समय बहुत से लोगों को गिरफ्तार किया था उनमें अटल बिहारी और प्रेम भी शामिल थे, लेकिन पिता ने अंग्रेज अफसरों के पैर पकड़ कर बेटों को इस शर्त पर छुड़वा लिया कि वो पुलिस के मनमाफिक गवाही देंगे।

आज तिरंगा यात्रा निकाल रहे मंत्री कृष्णपाल गूजर जिस संघ की शाखाओं में पढ़े हैं वह तो स्वतंत्रता के 52 साल तक तिरंगे को अशुभ बताता रहा, 2002 से पहले गूजर भी शायद तिरंगा हाथ में नहीं लेते थे। येन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहने और देश की संपदा पूंजीपतियों को सौंपने के लिए फिरंगी शासन जिस तरह विरोध करने वालों का दमन करता था, मोदी भी विरोधियों को दबाने के लिए ईडी, सीबीआई, पुलिस, चुनाव आयोग यहां तक कि न्यायपालिका का दुरुपयोग लगातार कर रहे हैं।

कुशासन के खिलाफ जनता भड़क न उठे इसीलिए फिरंगियों की फूट डालो और राज करो नीति अपनाते हुए, हिंदुओं को मुसलमानों, ईसाइयों के खिलाफ, हिंदुओं के बीच जातीय भेदभाव की खाई बढ़ा कर समाज में वैमनस्यता फैला कर राज कर रहे हैं। मोदीभक्ति को ही देशभक्ति मानने वाली जनता महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, शोषण के बावजूद अंधभक्ति कर रही है लेकिन यह बहुत ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है। पड़ोसी देश बांग्लादेश में जनता के वोटों से प्रधानमंत्री बनीं शेख हसीना वैसे तो खुद को जनता का सेवक कहती थीं लेकिन व्यवहार में वह निरंकुश शासक की तरह काम कर रहीं थीं, कभी उनकी अंधभक्ति करने वाली जनता ने ही उनका तख्ता पलट दिया।
आर्थिक जानकार तिरंगा यात्रा को मोदी-संघ द्वारा घोटाला किया जाना बताते हैं। उनके अनुसार तिरंगा यात्रा के लिए देश भर में खपने वाले 90 प्रतिशत से अधिक झंडे संघ-भाजपा समर्थित पूंजीपतियों के कारखानों में बनते हैं। इन तिरंगों को खरीद कर बांटने का दबाव जिला प्रशासन पर रहता है। कोई भी अधिकारी अपनी जेब से तो तिरंगा खरीदने से रहा, तो फिर उद्यमियों, कारोबारियों, डिपो होल्डर, ठेकेदारों आदि को झंडे खरीद कर दान करने के लिए विवश किया जाता है।

जाहिर है कि तिरंगा खरीद के लिए खर्च होने वाले धन की भरपाई करने के लिए इन्हें आम जनता को लूटने की छूट सरकार और प्रशासन की ओर से दी जाती है। यानी तिरंगा यात्रा के नाम पर संघ-भाजपा समर्थित पूंजीपतियों को मोटी कमाई कराई जाती है और आम जनता देशभक्ति का झुनझुना थाम कर मुफ़्त मिलने वाले तिरंगे को हवा में लहरा कर अप्रत्यक्ष रूप से देश विरोधी तत्वों के हाथ की कठपुतली बन जाता है।

भाजपाई तिरंगा यात्रा के नाम पर हर साल देश के सिरमौर तिरंगे का अपमान कराते हैं। तिरंगे के साथ फोटो खिंचाने के बाद मंत्री से लेकर उनके लगुए भगुए सब तिरंगे को इधर उधर छोड़ देते हैं। देश की शान तिरंगे जिन्हें फहराने से लेकर रखरखाव तक सख्त नियम हैं, मेज-कुर्सियों पर छोड़ दिए जाते हैं। यहां तक कि कचरे में भी फेक दिए जाते हैं। किसी भी व्यवक्ति को तिरंगे की गरिमा और सम्मान से खिलवाड़ की छूट नहीं दी जानी चाहिए।

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Mazdoor Morcha
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