फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) थाना सूरजकुंड के अंतर्गत दयाल नगर व आस-पास के घनी आबादी वाला एक क्षेत्र है। यहां नशे का व्यापार करने के साथ-साथ सरकारी पानी को अवैध रूप से बेचने वाला एक गिरोह सक्रिय है। इसके अलावा ये लोग तमाम तरह की असामाजिक गतिविधियोंं में संलग्न रहते हैं। इलाके में अपनी धाक जमाए रखने के लिए कमजोर लोगों के साथ मारपीट करना, ये लोग जरूरी समझते हैं। दिल्ली से आकर इलाके में बसा एक पढ़ा-लिखा संभ्रांत परिवार इस गिरोह को अखरने लगा क्योंकि ये लोग न तो इन्हें सलाम करते थे और न ही इनकी कोई परवाह करते नज़र आते थे। इसी परिवार की एक उच्च शिक्षित महिला मन्नी सिंह कुत्तों, गायों व अन्य निरीह पशुओं से लगाव होने के चलते व उनको खाना आदि खिलाने के अलावा जरूरत पडऩे पर इलाज कराने का भी प्रयास करती हैं। उनके इस पशु-प्रेम से आस पड़ोस के लोगों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए वह इन जीवों को गुरुकुल के पीछे सुनसान इलाके में ले जाकर खाना-दाना आदि परोसती थी।
इसी गतिविधि के सिलसिले में 10 सितम्बर को सुबह करीब छह बजे अपने कुछ छोटे-बड़े कुत्तों के साथ गुरुकुल के पीछे पहुंची तो लाठी डंडो से लैस उक्त गिरोह के सुजीत पटेल, ओम प्रकाश, मुकेश, विनोद कुमार और विनय पाठक ने उन पर हमला कर दिया। अति अश्लील गालियां बकते हुए धक्का-मुक्की की। इसी दौरान उन्होंने एक कुत्ते का सिर फोड़ कर लहूलुहान कर दिया। महिला ने इस पर प्रतिरोध किया तो उन्होंने कहा कि तेरा भी सिर फोड़ देंगे। महिला ने तुरन्त 112 नम्बर पर फोन किया तो कुछ समय में पुलिस जिप्सी आ गई, तब तक वे सब भाग चुके थे। पुलिस ने महिला को तो कहीं भी यानी अस्पताल या थाने तक छोड़ आने की पेशकश की लेकिन कुत्ते को अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया। इस पर महिला ने कैब मंगवाई व कुत्ते को सीआर पार्क दिल्ली ले गई। वहां से लौटने के बाद उन्होंने अपने साथ हुई वारदात की सूचना थाना सूरजकुंड पुलिस को दी।
गुंडों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तो क्या होनी थी, उल्टे एक पुलिसकर्मी के साथ इलाके के दो पार्षद हरेंद्र भड़ाना, और गजेंद्र भड़ाना उर्फ लाला तथा कुछ अन्य लोग मन्नी के घर आ धमके और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने लगे। वो नहीं मानी तो देख लेने की धमकी देकर चले गए। इसके बाद लगातार उन लोगों द्वारा भेजी गई भीड़ उनके दरवाजे पर आकर दबाव बनाने के लिए तरह-तरह की धमकी देने लगी। इनमें से कुछ लोगों ने मन्नी के सहयोगी एक परिवार के अनुराग नामक लड़के पर हमला करके उसका सिर फोड़ कर लहूलुहान कर दिया। ये लोग सीधे थाने पहुंचे तो वहां मौजूद हवलदार ने सिर से बहते खून को अनदेखा करते हुए कहा कि दरख्वास्त लिखकर देवें। पुलिस का अमानवीय रवैया देखते हुए ये लोग अनुराग को अस्पताल ले गए, मरहम-पट्टी कराने के बाद एमएलआर भी कटवाया जो कि पुलिस को कटवाना चाहिए था। जब ये लोग थाने में मौजूद थे तो मन्नी व अनुराग पर गुंडा गिरोह ने यह आरोप जड़ दिया कि इन्होंने गिरोह के एक गुंडे पर चाकू से हमला कर दिया।
गिरोह के इशारे पर नाचने वाली पुलिस जो मन्नी व उसके सहयोगियों की रत्ती भर भी सुनवाई नहीं कर रही थी, तुरन्त हरकत में आई और कलंदरा बना कर डीसीपी एनआईटी मसूद अहमद को भेज दिया। जहां से मन्नी को आदेश आया कि वह 30 सितंबर को उनके सामने आकर पेश होवे। मजे की बात तो यह है कि जिस डीसीपी को दो बार मिलने गई मन्नी को उनके रीडर चंचल ने मिलने तक नहीं दिया वही डीसीपी साहब गुंडों की शिकायत पर तुरन्त सक्रिय हो गए और मन्नी को पेश होने का आदेश दिया। परन्तु शुक्र की बात तो यह है कि जब उन्हें बताया गया कि चाकू वाली घटना के वक्त तो वे सभी थाने में मौजूद थे तो हैरान हो गए। उन्होंने थाने में फोन करके सच्चाई जान कर कलन्दरे को तो रद्द कर दिया परन्तु उन्होंने सारे केस की तह में जाने व सम्बन्धित बिके हुए पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझी।
मन्नी ने बताया कि 11 सितंबर को उन्होंने पुलिस आयुक्त कार्यालय मेंं शिकायत की। इस पर एसएचओ प्रह्लाद कुमार शाम को मौका मुआयना करने गए और उन्हें अपने साथ ले गए।। उन्होंने वहीं पर मन्नी का बयान दर्ज करके उनके दस्तखत भी करा लिये, जबकि वह कहती रह गई कि जो कुछ मैने कहा है वह तो आपने लिखा ही नहीं। सुनसान जगह व अकेली होने के कारण भयभीत हालत में उससे दस्तखत करवा लिए गए थे। मन्नी के अनुसार जो भी परिवार उनके साथ खड़े होने लगते हैं तो उनको ये गुंडागिरोह खुद तो डराता-धमकाता ही है, इसके लिए पुलिस का इस्तेमाल भी पूरी बेशर्मी के साथ करता है। ऐसा ही एक मुस्लिम परिवार मुजीबुर रहमान का भी है जिसकी पत्नी व बेटी मन्नी की सक्रिय सहयोगी हैं। आज के दिन मुस्लिम इन गुंडों के लिए एक बहुत ही आसान शिकार होता है। मुजीबुर रहमान शटरिंग लगाने का काम करके अपनी गुजर-बसर करता है। इसके बावजूद गुंडा-गिरोह ने उसके पीछे क्राइम ब्रांच वालों को लगा दिया है। उनकी पत्नी के मुताबिक वे बीते तीन दिन से लापता हैं, वे पुलिस हिरासत में हैं या कहीं और, कुछ पता नहीं।
क्षेत्र में हो रही चर्चाओं से मन्नी को पता चला कि पूरे गुंडा गिरोह तथा दोनों पार्षदों का सरपरस्त स्थानीय विधायक धनेश अधलखा है। उसी के आदेशों पर थाने व चौकियों में पुलिस अधिकारियों की तैनातियां होती हैं। इसी के परिणामस्वरूप पुलिस मन्नी की सुनवाई करने की अपेक्षा गुंडा गिरोह के समर्थन में खड़ी है। बेशक दिल्ली से आई मन्नी के लिए यह एक नई बात हो सकती है परन्तु ‘मज़दूर मोर्चा’ व इसके पाठकों के लिए यह कोई नई जानकारी नहीं है।