फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ईएसआई कॉर्पोरेशन जिस मज़दूर से उसके पूरे सेवाकाल में वसूली करता रहा, सेवानिवृत्त होने के बाद चिकित्सा के नाम पर मात्र एक झुनझुना पकड़ा कर अपना पल्ला झाड़ लेता है। सेवानिवृत्ति के पश्चात कॉर्पोरेशन उससे 120 रुपये वार्षिक लेकर केवल वही चिकित्सा सेवाएं प्रदान करता है जो उसके अस्पतालों में उपलब्ध हैं। विदित है कि फरीदाबाद जैसे इक्का-दुक्का मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को छोड़ कर कॉर्पोरेशन के अस्पतालों में पर्याप्त प्राइमरी चिकित्सा सेवा भी उपलब्ध नहीं, सेकेंडरी व सुपरस्पेशलिटी की तो बात ही क्या।
सर्वविदित है कि चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता, वह भी सुपरस्पेशलिटी आदि की, बीमाकृत मज़दूरों को जवानी में कम ही पड़ती है, बुढ़ापे में जब इसकी आवश्यकता होती है तो कॉर्पोरेशन पल्ला झाड़ लेता है। सेवारत मज़दूरों को जहां कार्पोरेशन इलाज के लिए निजी व्यापारिक अस्पतालों में रेफर करता है वहीं सेवानिवृत्त लोगों को इससे वंचित रखता है क्योंकि उन्हें केवल कॉर्पोरेशन के अस्पतालों में उपलब्ध सेवाएं देने का नियम बना रखा है। है न गजब की बात, अपने अस्पतालों में तो है कुछ नहीं और बाहर रेफर करेंगे नहीं, कोई मरता है तो मरे, उनकी बला से।
मज़दूरों की उम्र बढऩे के मद्देनजर 7 दिसंबर 2023 को हुई स्टैंडिंग कमेटी की 229 वीं बैठक में महसूस किया गया कि सेवानिवृत्त ईएसआई लाभार्थी तथा ईएसआई से बाहर हो चुके सेवानिवृत्त मज़दूरों के लिए दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं पर विचार करने पर फैसला लिया जाए। इसके आधार पर अधिकारियों की एक कमेटी बनाई गई। कमेटी ने दिनांक 10 फरवरी 2024 को हुई कॉर्पोरेशन की 193 वीं मीटिंग में यह प्रस्ताव रखा कि इस स्कीम में सेवानिवृत्त होने के पश्चात भी बीमाकृत मज़दूरों को वे सभी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी जो सेवारत मज़दूरों को मिल रही हैं यानी कि आवश्यकतानुसार उन्हें भी इलाज के लिए निजी अस्पतालों में रेफर किया जाएगा। नई स्कीम में 2012 के बाद नौकरी पाने वाले ऐसे मज़दूरों को भी शामिल किया गया है जिन्होंने कम से कम पांच साल काम किया और अपर लिमिट यानी 21,000 से अधिक वेतनमान होने के कारण बेशक ईएसआई की स्कीम से बाहर हो गए।
कॉर्पोरेशन मुख्यालय से छन-छन कर आने वाली खबरों से समझा जा रहा है कि सेवानिवृत्त बीमाकृत मज़दूरों से 120 रुपये वार्षिक की जगह 7560 रुपये वसूलने का निर्णय लिया गया है। इस वसूली के बाद ही उन्हें सेवारत मज़दूरों के बराबर चिकित्सा लाभ दिए जा सकेंगे। समझने वाली बात यह है कि कार्पोरेशन की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है उसने अपने पौने चार करोड़ आईपी की चिकित्सा सेवाओं पर कुल 14 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यानी इस आधार पर प्रति आईपी सालाना 3733 रुपया 33 पैसे खर्च आया है, इसके विपरीत आईपी से लगभग दोगुनी रकम 7560 रुपये सालान वसूली जाएगी, यानी यहां भी मुनाफाखोरी। शायद इसी आधार पर हिंद मज़दूर सभा के केंद्रीय नेता हरभजन सिंह संधू ने इस स्कीम को मज़दूरों को मुफ़्त में देने का प्रस्ताव रखा जिसे नकार दिया गया।
बेशक ये योजना अच्छी तो है लेकिन 7560 रुपये वार्षिक की वसूली, वह भी सेवानिवृत्त उस मज़दूर से जिसे कोई पेंशन आदि भी नहीं मिलती, सरासर ज्यादती है। मज़दूर नेताओं को कॉर्पोरेशन से सौदेबाजी करके इस वार्षिक वसूली को कम से कम कराने का प्रयास करना चाहिए। किसी भी हालत मेें यह रकम 3733 रुपये 33 पैसे से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि उस प्रस्ताव को 13 महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक नोटिफाई नहीं किया गया है। जबकि 2023-24 की सालाना रिपोर्ट में इसका केवल उल्लेख करके छोड़ दिया गया है। जाहिर है कि कॉर्पोरेशन में बैठे मज़दूर विरोधी हरामखोर अफसर मज़दूरों को उनका कोई हक देना नहीं चाहते। इसीलिए अब तक यह नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। उक्त नोटिफिकेशन कब तक रुका रहेगा कहा नहीं जा सकता।
एक बार का बीमाकृत सदाके लिए बीमाकृत हो. ईएसआई कॉर्पोरेशन के नियमानुसार कोई भी मज़दूर जब नौकरी लगता है तो वह बीमाकृत हो जाता है बशर्ते कि उसका मालिक तथा कॉर्पोरेशन का इंस्पेक्टर बेइमानी न करे तो। ज्यों-ज्यों उसका वेतन बढ़ता रहता है त्यों-त्यों उससे कॉर्पोरेशन की वसूली भी बढ़ती रहती है। लेकिन 21,000 रुपये मासिक का स्तर पार करने के बाद उसे ईएसआई से मुक्त कर दिया जाता है। इसके विपरीत भविष्यनिधि के मामले में ऐसा नहीं है। मासिक 15,000 रुपये पाने वाले मज़दूर के वेतन से 12 प्रतिशत तथा इतनी ही रकम मालिक की ओर से भविष्यनिधि में जमा कराई जाती है। इस वेतन सीमा के उपरांत किसी भी सीमा तक मज़दूर अपना 12 प्रतिशत या चाहे तो इससे भी अधिक भविष्यनिधि में जमा कराता रह सकता है। लेकिन मालिक के लिए यह बाध्यकारी नहीं है कि वह अपने 15,000 रुपये पर दिए जाने वाले 12 प्रतिशत अंशदान से अधिक मज़दूर के खाते में जमा कराए। मतलब स्पष्ट है कि मज़दूर का भविष्यनिधि खाता उसके सेवानिवृत्त होने तक चलता रहता है।
अब समझने वाली बात यह है कि कॉर्पोरेशन में बैठे मज़दूर नेताओंं को यह मुद्दा उठाना चाहिए कि एक बार बीमाकृत हो जाने के बाद मज़दूर का वेतन चाहे एक लाख ही क्यों न हो जाए उसे ईएसआई से बाहर न खदेड़ा जाए। हां, ईएसआई द्वारा वसूला जाने वाला अंशदान उतना ही रखा जा सकता है जितना कि 21,000 रुपये मासिक पर वसूला जाता था। जाहिर है कि यह कदम उठाने से बीमाकृत मज़दूरों की संख्या मौजूदा पौने चार करोड़ से बढ़कर एक दम छह करोड़ अथवा इससे भी अधिक हो जाएगी। इससे कार्पाेरेशन तो और भी अधिक मालामाल हो जाएगा लेकिन चिकित्सा सेवाएं देने का सिस्टम फेल हो जाएगा।
इसको फेल होने से बचाने के लिए तुर्त-फुर्त कॉर्पोरेशन की कार्यक्षमता को भी इसी अनुपात में बढ़ाना अति आवश्यक है। विदित है कि बीमाकृतों की संख्या जब देश भर में दो करोड़ थी तो डिस्पेंसरियों की संख्या 1500 थी और आज जब बीमाकृतों की संख्या बढ़ कर पौने चार करोड़ हो गई है तो भी डिस्पेंसरियों की संख्या लगभग उतनी ही है। ऐसे में कॉर्पोरेशन का कामयाब होना कदापि सम्भव नहीं है। दूसरी ओर नाकारा अस्पतालों की जगह मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी जरूरत के अनुसार बढ़ाई जाए। अभी तक के अनुभव के अनुसार जहां भी बीमाकृतों की संख्या पांच लाख है वहां मेडिकल कॉलेज अस्पताल स्थापित किए जाएं। इनको स्थापित करना ही काफी नहीं है, क्योंकि इन्हें सही ढंग से चलाने के लिए आवश्यक निष्ठावान तथा सुयोग्य अधिकारी भी चाहिए जिनका इस वक्त मुख्यालय में नितांत अभाव है। जब तक कॉर्पोरेशन मुख्यालय में मौजूदा मूर्ख एवं हरामखोर कमिश्नरों की फौज मौजूद रहेगी तो दिल्ली के बसई दारापुर तथा मुंबई के अंधेरी स्थित मेडिकल कॉलेजों जैसी हालत ही दयनीय बनी रहेगी। कितना शर्मनाक है कि मुख्यालय की नाक के नीचे चलने वाला बसई दारापुर अस्पताल अपनी क्षमता से 35-40 प्रतिशत पर ही चल रहा है। आए दिन वहां से मरीजों को इधर-उधर खास कर फरीदाबाद रेफर कर दिया जाता है।
इतना ही नहीं मुख्यालय में बैठे कमिश्नरों सहित तमाम अधिकारी अपना इलाज कराने के लिए बसई दारापुर न जाकर सीधे $फरीदाबाद की ओर दौड़ते हैं। शर्म तो मानो इन्होंने बेच कर खा ली हो। इतना ही नहीं फरीदाबाद के इसी अस्पताल के हर काम में रोड़ा अटकाना ये लोग अपना परम कर्तव्य समझते हैं। केेंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को उक्त बातों का संज्ञान लेकर समय रहते उचित कार्रवाई करनी चाहिए।