सेक्टर 21 जिमखाना क्लब में चल रहा अवैध निर्माण, वन विभाग के अधिकारी मौन

सेक्टर 21 जिमखाना क्लब में चल रहा अवैध निर्माण, वन विभाग के अधिकारी मौन
May 20 15:53 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अनखीर चौक स्थित सेक्टर 21 जिमखाना क्लब पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में होने के कारण तोड़ा जाना है लेकिन हूडा के हरामखोर अधिकारी इसमें अवैध रूप से बड़े पैमाने पर निर्माण करा रहे हैं। क्लब द्वारा घेरी गई संरक्षित वन की अतिरिक्त जमीन पर सैफ्रॉन हाल के नाम से मैरिज लॉन तैयार किया जा रहा है। जाहिर है इसके लिए हरियाली उजाड़ कर सीमेंट, कंक्रीट, टाइल्स बिछाई गई हैं। अस्थायी के नाम पर स्थायी निर्माण किया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों को न तो ये अवैध निर्माण नजऱ आ रहा है और न ही अपने पुराने नोटिस याद आ रहे हैं जो इस जिमखाना क्लब को गिराने के लिए उसने हू्डा को भेज रखे हैं।

पाठकों को याद दिला दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जिमखाना सहित पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में बने सभी निर्माण गिराने के आदेश करीब एक दशक पहले दिए हुए हैं। इस आदेश का पालन करने के लिए वन विभाग ने 1 अगस्त 2021 को हूडा को पत्र जारी कर सेक्टर 21 अनखीर में वन विभाग की जमीन पर बनाए गए जिमखाना क्लब को एक सप्ताह के भीतर खुद ही तोडऩे का आदेश दिया था। चेतावनी दी गई थी कि यदि एक सप्ताह में नहीं तोड़ा तो वन विभाग खुद इसे तोड़ देगा और खर्च हूडा को भुगतना पड़ेगा। चार साल बीत चुके हैं लेकिन जिमखाना को न तो हूडा ने तोड़ा और न ही वन विभाग के अधिकारियों ने अपनी जमीन खाली करवाई। तोडऩा तो दूर हूडा ने यहां मोटी कमाई के लिए मैरिज लॉन बनवा डाला।

दरअसल, वन विभाग द्वारा तोडफ़ोड़ की कार्रवाई नहीं करने के पीछे मोटी कमाई है। शहर में इसके अलावा एक जिमखाना सेक्टर 15 में है। आंकड़ों के मुताबिक इनके करीब तीन हजार सदस्य हैं जिनसे करीब चार हजार रुपये प्रति वर्ष सदस्यता शुल्क वसूला जाता है यानी प्रतिवर्ष एक करोड़ से अधिक की आमदनी इस शुल्क से होती है। इसके अलावा क्लब में कार्यक्रम, इवेंट, पार्टी बैठक आदि से प्रतिवर्ष पचास लाख से अधिक की कमाई होती है। जाहिर है कि जिमखाना को तोडऩे से कमाई का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो जाएगा।

इतना ही नहीं आए दिन अफसर, नेताओं, रसूखदारों के मुफ़्त होने वाले कार्यक्रम भी खत्म हो जाएंगे। अब जब बात ऊपरी कमाई और हरामखोरी की हो तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी अधिकारियों के ठेंगे पर। यदि ईमानदारी से कार्रवाई की जाती तो यह जिमखाना अगस्त-सितंबर 2021 में ही तोड़ दिया जाता, लेकिन अब तो इसमें बाकायदा सैफ्रॉन हाल बनाया जा रहा है। इससे प्रत्येक सीजन एक करोड़ रुपये कमाई का अनुमान है, इसमें से निश्चित फीस ही सरकारी खाते में जाएगी बाकी मोटी रकम की बंदरबांट होगी ताकि यह लॉन और जिमखाना बरकरार रहे।

सुधी पाठकों को याद दिला दें कि पीएलपीए 1900 की धारा 4 व 5 के तहत संरक्षित वन क्षेत्र में किसी भी तरह की गैर वानिकी गतिविधियां पूर्णतया प्रतिबंधित हैं। इस संरक्षित क्षेत्र में पेड़ तो क्या झाडिय़ां तक तोडऩा-काटना गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग और सरकार को संरक्षित वन क्षेत्र से अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटाने के आदेश दे रखे हैं। इस मामले में वन विभाग को समय समय पर सर्वाेच्च न्यायालय में स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होती है।

वन विभाग के जानकारों के अनुसार केवल फरीदाबाद में पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र मेें दो हजार से अधिक अवैध निर्माण हैं। इनमें से सात सौ निर्माण कॉमर्शियल गतिविधियां जैसे मैरिज लॉन, बैंकट हॉल, फार्म हाउस आदि हैं। वन विभाग को जब भी रिपोर्ट दाखिल करनी होती है तो कार्रवाई दिखाने के लिए खोरी, जमाई कॉलोनी जैसी मलिन बस्तियों को तोड़ दिया जाता है। हाल ही में वन विभाग ने जमाई कॉलोनी, बडख़ल और अनखीर में अपनी तोडफ़ोड़ की कार्रवाई की लेकिन उससे जिमखाना क्लब का अवैध निर्माण नहीं रोका गया।

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Mazdoor Morcha
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