सीईसी ने पीएलपीए क्षेत्र में नलकूप हटाने को कहा, गूजर-अदलखा ने लगाने को कहा

सीईसी ने पीएलपीए क्षेत्र में नलकूप हटाने को कहा, गूजर-अदलखा ने लगाने को कहा
October 05 05:00 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अरावली के संरक्षित वन क्षेत्र को वोट की राजनीति करने वाले भाजपाई बर्बाद करने में जुटे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिस अनंगपुर में संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध निर्माण, मकान आदि तोड़े गए और भविष्य में तोड़े जा सकते हैं वहां केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और विधायक धनेश अदलखा धड़ाधड़ ट्यूबवेल लगवा रहे हैं। यह घोषणाएं तब की जा रही हैं जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (सीईसी) ने नगर निगम को अनंगपुर, अनखीर, लक्कड़पुर और मेवला महाराजपुर के पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में लगाए गए ट्यूबवेल और बिजली महकमे को बिजली आपूर्ति के लिए लगाए गए खंभे और तार जल्द से जल्द उखाडऩे का आदेश दिया है। इतना ही नहीं जिला प्रशासन को इन इलाकों का रोड नेटवर्क खोद कर छोटी छोटी खाई बना कर पौधों के बीज छिड़कने के आदेश दिए हैं ताकि इन रास्तों का दोबारा इस्तेमाल न किया जा सके।

सुधी पाठकों को यह भी याद दिला दें कि एफएमडीए के आंकड़ों के अनुसार जिले का जलस्तर पांच सौ फीट तक नीचे गिर चुका है और प्रति वर्ष चार से पांच मीटर की दर से नीचे गिर रहा है। केंद्रीय जल आयोग ने फरीदाबाद को क्रिटिकल जोन में रखा है। इसका अर्थ है कि यहां से जितनी मात्रा में भूजल का दोहन किया जा रहा है रिचार्ज की दर उससे कहीं कम है। यही कारण है कि केवल प्रशासन को अतिआवश्यक स्थिति में ही ट्यूबवेल लगाने की अनुमति है, अन्यथा पूर्णतया प्रतिबंध है। पाठकों को बता दें कि पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में अनंगपुर में सर्वाधिक 167.98 एकड़ पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में 585 जगहों पर 5771 निजी मकान, घर आदि बने हुए हैं। इसी तरह 0.14 एकड़ में आश्रम, मंदिर, गोशाला आदि 24 इमारतें हैं। 116 एकड़ में 161 बैंकट हॉल, फार्म हाउस आदि फैले हुए हैं। जानने योग्य बात यह है कि इन बैंकट हॉल, आश्रम, गोशाला आदि में प्रतिबंध के बावजूद ट्यूबवेल लगाए गए हैं। सीईसी के आदेश के अनुसार तो नगर निगम को इन ट्यूबवेल को और बिजली महकमे को कनेक्शन हटा देने चाहिए थे।

इन परिस्थितयों के आधार पर अनंगपुर के इलाके में प्रशासन को कोई भी विकास कार्य नहीं करने हैं खासकर ट्यूबवेल और बिजली कनेक्शन तो नहीं ही देने हैं। इस सबकी जानकारी प्रशासन, निगम अधिकारियों के साथ ही केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर, बडख़ल विधायक धनेश अदलखा और क्षेत्रीय पार्षद बिंदे भड़ाना को भी भली भांति है। बावजूद इसके पिछले सप्ताह बिंदे भड़ाना ने उसी पीएलपीए संरक्षित अनंगपुर में विधायक धनेश अदलखा का कार्यक्रम रखा। इस कार्यक्रम में अदलखा ने अनंगपुर में करीब 27 लाख रुपये लागत के तीन ट्यूबवेल लगाने का आदेश जारी किया। इनमें से एक केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर द्वारा लगवाया जा रहा है।

अदलखा-गूजर की इस घोषणा से यह समझना मुश्किल नहीं है कि वोट के लालची ये नेता अरावली के रहे सहे संरक्षित वन क्षेत्र की हरियाली को भी नुकसान पहुंचाने में पीछे नहीं हैं। जहां सीईसी ट्यबवेल उखाडऩे की बात कर रही है वहां ये एक दो नहीं बल्कि तीन नए ट्यूबवेल लगाने की घोषणा कर रहे हैं।

जानकार कहते हैं कि नेताओं की कवायद का उद्देश्य जनहित की आड़ में भूमाफिया, बैंकट हाल, फार्महाउस वाले पूंजीपतियों के लिए आसानियां पैदा करना है। दरअसल, सीईसी ने अनंगपुर, मेवला, अनखीर और लक्कड़पुर में ऐसी इमारतें जो वन संरक्षण एवं सवर्धन अधिनियम 1980 के उल्लंघन में बनाई गई हैं लेकिन उन्हें पोस्ट फैक्टो यानी बाद में अनुमति दी जा सकती है, को छोड़ कर बाकी सारे निर्माणों पर तीस सितंबर तक कार्रवाई करने का आदेश दिया है। जानकारों के अनुसार इस छूट का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनके पास जमीन के 1980 से पहले के मालिकाना हक के दस्तावेज होंगे, जीपीए या अन्य ढंग से अवैध रूप से खरीदी-बेची गई जमीन को कोई छूट नहीं मिलेगी। सीईसी ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि इस तरह के भवनों को छोड़ कर बाकी सारे अवैध निर्माण के खिलाफ तीस सितंबर तक तोडफ़ोड़ की कार्रवाई पूरी कर ली जाए। तोडफ़ोड़ की तो कोई सूचना नहीं है, उल्टे मंत्री-विधायक यहां विकास कार्य कराने में जुटे है।

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Mazdoor Morcha
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