बल्लबगढ़ (मज़दूर मोर्चा) राज्य की अर्थव्यवस्था का सत्यानाश कैसे किया जाता है, यह भाजपा सरकार से बेहतर कौन बता सकता है। परिवहन चालन का धंधा अच्छी कमाई वाला समझा जाता है। प्राइवेट बसों की बात तो छोडिय़े एक ऑटो वाला भी शाम को करीब हजार रुपये कमा कर घर लौटता है। इसके विपरीत हरियाणा परिवहन विभाग, लाभ कमाना तो दूर लगातार घाटे में चला आ रहा है। घाटा हो भी क्यों ना, जब बसों को चलाने के लिये न तो पर्याप्त चालक, परिचालक व अन्य स्टाफ हो। कामगारों की कमी के चलते बसें खड़ी हैं तो खड़ी रहे सरकार के बाप का क्या जाता है, घटा हो रहा है तो जनता का।
सरकार की इसी जन विरोधी नीति के चलते स्थानीय डिपो में अनेकों बसें बेकार खड़ी हैं इससे न केवल यात्रियों को परेशानी हो रही है बल्कि सरकार को भी राजस्व का घाटा हो रहा है। कई सप्ताह के बाद अफसरों ने इन बसों में से टाटा कंपनी वाली 20 बसों को तो दिल्ली डिपो के हवाले कर दिया। जबकि अशोक लीलैंड वाली अनेकों बसें अभी भी खाली खड़ी जंग खा रही हैं। यह हाल सिर्फ बल्लबगढ़ बस डिपो का नहीं हैं कमोबेश पूरे प्रदेश की यही हालत है। भाजपा ने सिर्फ रोडवेज और बसों का ही बेड़ा गर्क नहीं किया है, ये तो बस पतीले का एक चावल है, दस साल में भाजपाइयों नें संघ की सीख पर चलते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, सीवर-पेयजल, सड़क हर क्षेत्र में बर्बादी ही की है।
रोडवेज में न तो पर्याप्त बसें हैं न ही चालक-परिचालक, स्टोरों में बसों के जरूरी उपकरण, टूल्स की कमी है। शिक्षकों की भर्ती नहीं की जा रही जिस कारण सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती, मजबूर होकर अभिभावक सरकारी स्कूलों में बच्चों को प्रवेश नहीं दिला रहे, इसका बहाना बना सरकार सरकारी स्कूल भी धड़ाधड़ बंद कर शिक्षा व्यवस्था को पाताल में ले जा रही है। स्वास्थ्य सेवाएं इतनी लचर हैं कि सामान्य मरीज को प्राथमिक उपचार केंद्र में इलाज नहीं मिल पा रहा है क्योंकि अधिकतर में तो डॉक्टर हैं ही नहीं। डॉक्टर है तो दवांए नहीं, झक मार कर मरीज को निजी अस्पताल में महंगा इलाज कराने को मजबूर होता है। जनसुविधाओं के नाम पर नगर निकायों में भाजपा नेताओं के संरक्षण में खुली लूट मची हुई है।