पलवल (मज़दूर मोर्चा) सरकारी कर्मचारियों के भ्रष्टाचार से जनता को निजात दिलाने के नाम पर सरकार ने विजिलेंस विभाग जिसे अब भ्रष्टाचार निरोधक दस्ता यानी एसीबी कहा जाता है, का गठन किया है। यह विभाग अपने आप में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता जा रहा है। पहले जहां गिनती के इक्का-दुक्का अफसर इस विभाग में होते थे अब दर्जनों छोटे-बड़े अधिकारियों का जमावड़ा इस विभाग में हो गया है जिन पर करोड़ों रुपये सरकार खर्च कर रही है। विभाग द्वारा आए दिन छापेमारी करके रिश्वतखोरों को पकडऩे का दावा किया जाता है। परन्तु कहीं से भी रिश्वतखोरी घटती नज़र नहीं आ रही। घटे भी कैसे?
दिनांक 14 जुलाई को $फरीदाबाद एसीबी ने छापा मार कर पलवल मार्केट कमेटी के नीलामी अभिलेखक सतीश कुमार को एक लाख तीस हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। यह रिश्वत उसने शिकायतकर्ता की मंडी में एक दुकान को उसके पोते के नाम कराने के एवज में मांगी थी। नियमानुसार उसे गिरफ्तार कर केस अदालत करके जेल भेज दिया गया। इसी तरह दिनांक 16 जनवरी 2023 को होडल की एक शिकायत पर भी इसी सतीश कुमार को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने पर जेल भेजा गया था। मुकदमे में अभी तक गवाहियां आदि चल रही हैं। अदालत का फैसला कब और कैसा आएगा, पता नहीं। इस दौरान उसकी जमानत हो जाती है और वह फिर से अपनी पुरानी तैनाती पर तैनात हो जाता है। जमानत पर आने के बाद उसने बेखौ$फ होकर फिर से वही रिश्वतखोरी का काम पूरे जोर-शोर से शुरू कर दिया। उसका विश्वास है कि रिश्वखोरी में पकड़े जाना तो एक खेल-तमाशा है और जल्द ही इस मौजूदा केस में भी जमानत पर आकर अपना धंधा शुरू कर देगा।
मंडी के व्यापारियों व अन्य लोगों का कहना है कि वह किसी की कोई परवाह नहीं करता। वह धमकी देता है कि उसके विरुद्ध शिकायत करने वाले को वह एससीएसटी एक्ट (दलित संरक्षण कानून)में लपेट कर जेल भिजवा देगा। इसी डर के मारे लोग उसके विरुद्ध शिकायत करने से घबराते रहे हैं।