फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक शहर की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दिलाने के लिए पिछले 257 दिनों से शांतिपूर्वक ढंग से चलाए जा रहे रेफर मुक्त फरीदाबाद अभियान को निर्लज्ज प्रशासन ने एक बार फिर उजाड़ दिया। बीके अस्पताल के पास फुटपाथ पर लगा तंबू नगर निगम के तोडफ़ोड़ दस्ते ने उजाड़ दिया। धनेश अदलखा ने विधायक बनने के बाद दावा किया था कि धरनारत लोग उन्हें बीस मिनट दे दें तो वह उनकी सारी मांगें पूरी करवा देंगे। चर्चा है कि बीते आठ महीने 14 दिनों में अदलखा इन लोगों से मिलने के बीस मिनट नहीं निकाल सके लेकिन सरकार की बदनामी बचाने के लिए उनके इशारे पर जन हित के अभियान को महज बीस मिनट में उजाड़ दिया गया। करीब 25 लाख आबादी वाले शहर के सरकारी अस्पतालों में गंभीर हादसों का शिकार होने वालों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। ट्रॉमा विशेषज्ञों के अनुसार हादसे के बाद पहला एक घंटा घायल व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसे गोल्डन आवर कहा जाता है। जिले के सबसे बड़े सरकार अस्पताल बीके की इमरजेंसी का हाल यह है कि गंभीर हादसे के शिकार लोगों को रेफर करना ही इलाज माना जाता है। यानी इलाज तो दूर गोल्डन आवर के साथ दो से ढाई घंटे रेफर करने की प्रक्रिया में बर्बाद हो जाते हैं। नतीजा अक्सर घायलों की सांसें थमने के रूप में सामने आता है।
सिर्फ घायल ही नहीं हृदय रोग व कोई अन्य आपात स्थिति के अधिकतर मामलों में मरीज को बीके अस्पताल से सफदरजंग दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। इतनी बड़ी आबादी को दोयम दर्जे की स्वास्थ्य सेवाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता इसलिए समाजसेवी सतीश चोपड़ा ने पांच दिसंबर 2024 को रेफर मुक्त फरीदाबाद अभियान के तहत बीके चौक पर धरना शुरू किया था। जनता के वोटों से सत्ता हासिल करने वाली भाजपाई सरकार ने जनहित की इस मांग के खिलाफ तब ही मोर्चा खोल दिया था। महज छह दिन बाद 10 दिसंबर को सतीश चोपड़ा का तंबू उखाड़ दिया गया था। मांगों के प्रति अडिग चोपड़ा ने बीके अस्पताल के पास फुटपाथ पर तंबू तान दिया था। पहली बार विधायक बनते ही खुद को सर्वशक्तिमान समझने वाले भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा से लेकर किसी भी विकास कार्य को सिरे चढ़ाने में नाकाम रहने वाले केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने बड़ी बड़ी बातें तो कीं लेकिन एक अदद ट्रामा सेंटर की घोषणा नहीं कर सके। दरअसल, इन भाजपाइयों के लिए जन हित के कार्य कोई मायने नहीं रखते, जनता मरती है तो मरे इनकी बला से, इनकी प्राथमिकता ट्रामा सेंटर नहीं बल्कि लेजर वैली पार्क में ढाई करोड़ का फव्वारा लगाना है, क्योंकि इस फैंसी काम से वाहवाही और कमीशन दोनों अच्छे से प्राप्त होंगे।
ऐसे विकास कार्यों के बीच एक अदद ट्रॉमा सेंटर और रेफरमुक्त फरीदाबाद की मांग सरकार और उसके जनविरोधी प्रतिनिधियों की छवि खराब कर रही थी। संघी की शाखाओं में अलोकतांत्रिक मूल्यों की घुट्टी पीकर सत्ता में आए सीएम सैनी ने भी मानो फरीदाबाद की जनता को ट्रॉमा सेंटर नहीं देने की कसम खा रखी है, इसलिए टरकाने के लिए ट्रामा केयर यूनिट की घोषणा कर जिले की जनता के साथ भद्दा मजाक किया। ट्रामा सेंटर और ट्रॉमा केयर में जमीन आसमान का अंतर होने के कारण सतीश चोपड़ा फिर भी अपनी मांग पर संवैधानिक ढंग से अड़े रहे। उनका कहना है कि ट्रॉमा सेंटर बनने से केवल उनका तो भला नहीं होगा बल्कि फरीदाबाद, पलवल और आसपास के जिलों की करीब चालीस लाख की आबादी को लाभ मिलेगा।
उनकी ये जनहितैषी बातें संघी-भाजपाइयों की जी हुजूरी पसंद करने वाली सरकार को चुभने लगी और 19 अगस्त को एक बार फिर निर्लज्ज प्रशासन ने धरना स्थल तोडफ़ोड़ डाला। हालांकि सरकार की यह कार्रवाई सतीश चोपड़ा को लक्ष्य से डिगा नहीं पाई है, खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे चोपड़ा कहते हैं कि अब वह अभियान और तेज करेंगे, भूख हड़ताल और आमरण अनशन करेंगे। जिले की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दिलाने के लिए वह अपनी जान देने के लिए भी तैयार हैं।