फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार $वर्ष 2025 में अभी तक $फरीदाबाद से होडल के बीच 285 लोग विभिन्न ट्रेनों से कट मर चुके हैं। वर्ष पूरा होने में अभी डेढ़ महीना बाकी है। इसी रफ्तार से यदि लोग कट कर मरते रहे तो यह आंकड़ा 300 के पार जाएगा। चंद खुदकुशी करने वालों को छोड़ कर शेष सभी लोगों की मौत के लिए रेलवे जिम्मेदार है। बेशक रेलवे पुलिस यात्रियों को कितना ही समझाएं, कितने ही जागरुकता अभियान चलाएं, उससे कोई खास फर्क पडऩे वाला नहीं।
यदि रेलवे अ२पनी नालायकी छोड़कर, दो ट्रैकों के बीच हैजिंग कर दे तो कोई भी यात्री एक प्लेटफार्म से दूसरे पर जाने के लिए ट्रैक क्रॉस नहीं कर पाएगा, उसे पुल से ही ट्रैक पार करने होंगे। किसी जमाने में हैजिंग हुआ भी करती थी, लेकिन समय के साथ-साथ बढ़ते लालच के चलते रेलवे ने यह व्यवस्था समाप्त कर दी। रेलवे की दूसरी नालायकी, अक्सर यह होती है कि गाड़ी आगमन के अंतिम क्षणों में प्लेटफार्म बदल दिया जाता है। ऐसे में यात्रियों के पास इतना समय नहीं होता कि वे पुल के द्वारा प्लेटफार्म बदल सकें। युवा यात्री तो फिर भी भाग-दौड़ करके इस काम को कर पाते हैं, लेकिन बड़े-बूढ़ों, बीमारों आदि के लिए यह काम बहुत ही कठिन होता है।
इसके लिए रेलवे को पर्याप्त मात्रा में स्वचालित सीढिय़ों वाले पुलों को स्थापित करना चाहिए। रेलवे यह सब काम तो तब करे न जब उसे यात्रियों की सुरक्षा की कोई चिन्ता हो। यात्री लोग कटते मरते हैं तो उनकी बला से। इतना ही नहीं आए दिन होने वाली भयंकर रेल दुर्घटनाओं में यात्रियों की मौतों से जो रेलवे कोई सबक नहीं सीखना चाहता, वह प्लेटफार्मों पर होने वाली इन मौतों से क्यों सबक सीखने लगा, यहां तो उल्टे यात्रियों को ही दोषी ठहरा कर रेलवे अपना पल्ला झाड़ लेता है।