भाजपा सरकार की नजर में स्वतंत्रता सेनानी, शहीद सैनिक और अपराधी सब बराबर मज़दूर मोर्चा ब्यूरो भाजपा सरकार और कठपुतली सीएम नायब सिंह सैनी ने विधानसभा सत्र के पहले दिन नैतिक पतन की सारी सीमाएं तोड़ दीं। बीते सत्र के बाद काल कवलित हुए देश की महान विभूतियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शहीद सेनाकर्मी, गण्यमान्य नागरिकों के साथ ही पुलिस के घोषित दलाल, अपराधी, माफिया राजपाल मामा को भी श्रद्धांजलि दी गई।
राजपाल की उपलब्धि बस इतनी है कि वह चड्ढीधारी केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का रिश्ते का मामा था और उसके संरक्षण में जमीनों पर कब्जे, ठेके, शराब कारोबार, विरोधियों पर जानलेवा हमला आदि कराने का काम करता था। दरअसल, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चरित्र हनन और अंग्रेजों की चरणवंदना करने वाले दामोदर सावरकर को वीर बताने वाले संघ-भाजपा की यही दोगली नीति है कि वह अपराधियों का गुणगान करती है और विरोधियों पर झूठे-मनगढंत लांक्षन लगाती है।
बताते चलें कि अक्तूबर 2022 में पुलिस के आला अधिकारियों द्वारा गुप्त रूप से बनवाई गई राजनीतिक रसूख रखने वाले अपराधियों, दलाल, माफिया की सूची लीक हो गई थी। उसमें केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के मामा राजपाल का नाम प्रमुखता से सामने आया था। मामा को पुलिस के काम में हस्तक्षेप करने, दलाली करने, हत्या जैसे जघन्य अपराध करने वालों को पुलिस से संरक्षण देेने, जमीनों पर जबरन कब्जा करने, गुुर्गों से मारपीट कराने जैसे काम करने वाला बताया गया था। सूची लीक होने से सबसे ज्यादा भद मंत्री गूजर की पिटी थी क्योंकि यह खुला हुआ सच है कि मामा राजपाल यह सारे काम कर ही इसलिए पाता था कि उसे सत्ताधीश भांजे गूजर का संरक्षण मिला हुआ था। यही कारण है कि वह पुलिस से लेकर प्रशासन तक हर जगह अपनी जा बेजा इच्छाएं पूरी करवाता था। यह भी बताया जाता है कि कई प्रशासनिक अधिकारियों, ठेकेदारों आदि से मंत्री के नाम पर वसूली का काम भी मामा राजपाल करता था। कुल मिलाकर समाज में मामा राजपाल की छवि हमेशा बाहुबली- अपराधी की रही।
राजपाल की मृत्यु पर सीएम सैनी अंतिम संस्कार में सांत्वना देने शमशान घाट पहुंचे थे। इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, संभव है कि नायब सैनी और मामा के व्यक्तिगत संबंध रहे हों। हालांकि सीएम पद पर रहते हुए विवादास्पद लोगों से बचकर रहना ही राजनैतिक शुचिता और नैतिकता का तकाजा होता है जो सैनी ने नहीं निभाया। सैनी का इतने पर भी दिल नहीं भरा तो बजट सत्र में पूर्व पीएम पद्म विभूषण डॉ. मनमोहन सिंह, हरियाणा के भूतपूर्व मंत्री सतपाल सांगवान, डॉ. कृपाराम पूनिया, विधानसभा के भूतपूर्ण सदस्य सुरिंदर सिंह औजला, चौधरी कर्म सिंह, हेम राज स्वतंत्रता सेनानी सरदार बाज सिंह के साथ ही समाज के कुख्यात चरित्र राजपाल मामा को भी श्रद्धांजलि दी गई। राजनीति के जानकार इसे महान विभूतियों की आत्माओं का घोर अपमान कह रहे हैं। जो सीएम 26 लोगों पर दुष्कर्म के झूठे मुकदमे दर्ज करा ब्लैकमेल करने वाली जींद की निर्लज्ज रेखा धीमान को महिला दिवस पर सम्मानित कर सकता है उसके द्वारा देश की महान विभूतियों की गरिमा को कुचल देना कोई अचरज की बात नहीं होना चाहिए। सवाल तो लम्बे समय से तैनात सीआईडी के डीएसपी मनीष सहगल पर भी उठता है कि उन्होंने राजपाल मामा के अपराधी होने की जानकारी होने के बावजूद सीएम को अवगत नहीं कराया।