फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दिनांक 21 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे सीमेंट कंक्रीट मिक्स ढोने वाला एक टैंकर ओल्ड फरीदाबाद के उसी अंडरपास में जा फंसा जिसमें गत माह दो बैंक कर्मी डूब मरे थे। तीव्र गति से अंडरपास में घुस कर यह वाहन ऐसा फंसा कि न आगे चल सका न पीछे हट सका। स्थिति बिगड़ते देख ड्राइवर मौके से फरार हो गया।
ट्रैफिक जाम की सूचना मिलते ही उसी चौक पर मौजूद पुलिस मौके पर पहुंची। फंसे हुए वाहन के टायरों की हवा निकालने के बावजूद भी उसकी ऊंचाई इतनी नहीं घट सकी कि उसे बाहर खींंचा जा सके। हार कर पुलिस ने इलेक्ट्रिक कटर से टैंकर का ऊपरी भाग कटवा कर रात करीब आठ बजे वाहन को बाहर निकाला। जाहिर है इसके चलते पूरा दिन अजरोंदा मोड़ एवं नीलम फ्लाईओवर पर जाम की स्थिति बनी रही।
इसके लिए भले ही वाहन चालक को दोषी ठहराना बहुत आसान है। लेकिन उसकी अपेक्षा प्रशासन कहीं बड़ा दोषी है जिसने अंडरपास की ऊंचाई से अधिक ऊंचे वाहनों को उसमें घुसने से रोकने की कोई व्यवस्था नहीं कर रखी। इस अंडरपास पर कहीं नहीं लिखा है कि कितनी ऊंचाई वाले वाहन इसमें से गुजर सकते हैं। बुद्धिहीन प्रशासकों की तो क्या बात करनी, बुद्धिमान प्रशासक इस तरह के प्रवेश पर बाकायदा एक बैरियर लगाते हैं। यदि यहां भी ऐसा बैरियर लगा होता तो यह वाहन अंडरपास में घुसने से पहले उस बैरियर से ही टकरा कर रह लेता।
इस तरह का बैरियर न केवल वाहनों को सुरक्षा देता है बल्कि अंडरपास को भी सुरक्षित रखता है। समझा जा सकता है कि इस मामले में अंडरपास के लेंटर को भी कुछ न कुछ तो नुक्सान जरूर हुआ होगा। अब केस भी टैंकर चालक और उसके मालिक के खिलाफ दर्ज किया गया होगा जबकि उनकी कोई गलती नहीं है, बल्कि बॉडी काटे जाने और पंक्चर किए जाने से टायर बर्बाद हो गए, टैंकर में भरा माल भी बर्बाद हो गया, जमी हुई रेडीमिक्स कंक्रीट को निकालना भी आसान नहीं होगा यानी टैंकर मालिक का कई लाख रुपयो का नुक्सान हुआ।
यदि मालिक में थोड़ा बहुत भी दम होगा तो वह प्रशासन के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराकर हर्जाना वसूली की मांग कर सकता है।