बिहार चुनाव में हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज का योगदान मज़दूर मोर्चा ब्यूरो भाजपा की पुरानी परम्परा है कि जिस राज्य में चुनाव हो तो तमाम भाजपाई राज्य सरकारें उसमें जी-जान से जुट जाती हैं। इन राज्यों के कार्यकर्ता मंत्री, मुख्यमंत्री आदि तो चुनावी राज्य में डेरे डालते ही हैं, सरकारी तौर पर वाहियातपने भी करते हैं। ऐसा ही एक वाहियातपना हरियाणा सरकार भी करने जा रही है। परिवहनमंत्री अनिल विज की घोषणा के अनुसार चंडीगढ़, अम्बाला, पानीपत व गुडग़ांव से बिहार के विभिन्न शहरों के लिए विशेष वातानुकूलित बसें चलाई जाएंगी। कहने को तो ये छठ पर्व के नाम पर चलेंगी लेकिन हर साल आने वाले इस पर्व के लिए इसी बार यह मेहरबानी क्यों की जा रही है? उत्तर स्पष्ट है कि चुनाव की बेला है, शायद इस कवायद से कोई दो-चार वोटर बकावे में आकर भाजपा को वोट दे दें। विज ने यह नहीं बताया कि बसों की ये सवारी मुफ्त में मिलेगी या भाड़ा भी लगेगा। हालांकि, परिवहन निगम के अधिकारियों ने बताया कि सरकार इन बसों के टिकट पर सब्सिडी दे रही है। चंडीगढ़ से बिहार के मधुबनी का एसी सीटर बस का औसत किराया 1873 रुपये है लेकिन तीस नवंबर तक केवल 1254 रुपये रखा गया है। यानी सरकार प्रत्येक टिकट पर 619 रुपये लगभग एक तिहाई सब्सिडी दे रही है। इसी तरह एसी स्लीपर बस का किराया 2812 रुपये है इसके लिए महज 1893 रुपये लिया जा रहा है।
शाम को रवाना होने वाली ये बसें, जाहिर है पूरी रात भर चलने के बाद ही गंतव्य तक पहुंचेगी। इस ठंडे मौसम में एसी बस चलाने का औचित्य विज एवं उनके संघी-साथियों के अलावा और कोई नहीं समझ सकता। शायद इसके पीछे बिहारियों को ज्यादा खुश करना हो सकता है। समझने वाली बात यह है कि जिन मज़दूरों के लिए यह सेवा देने की बात है, वे साधारण बसों का खर्चा ही वहन करने को सक्षम होते हैं।
भाजपा सरकार के लिए इससे भी बड़ी शर्मनाक बात तो यह है कि इतनी लम्बी-लम्बी यात्राओं के लिए ट्रेन की बजाय बसों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बसों का इस्तेमाल केवल छठ के अवसर पर ही नहीं बल्कि आनंद विहार टर्मिनल से नियमित रूप से साल भर बिहार के लिए बसें निर्बाध चलती रहती हैं। इनमें सवारियों को ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है और किराया भी बहुत महंगा पड़ता है। दूसरी ओर वंदे भारत जैसी आलीशान ट्रेनें खाली दौड़ाई जाती हैं। संदर्भवश सवाल यह भी बनता है कि कोरोना काल में जब बिहारी मज़दूर सैकड़ों-हजारों किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर हुए थे उस वक्त भाजपा की ट्रेनें व बसें कहां थीं?
ऐसे में भला दिल्ली की भाजपा सरकार कैसे पीछे रह सकती है। वहां की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बिहारियों को रिझाने के लिए कई चुनाव क्षेत्रों में उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करने पहुंचीं। उन्होंने दिल्ली में कार्यरत बिहारियों के काम-काज को काफी सराहा। छठ पर्व के अवसर पर दिल्ली में ही रहकर पूजा करने वाले बिहारियों को विशेष साफ-सुथरे घाट व पंडाल आदि उपलब्ध कराने का वायदा किया। इन पंडालों में खान-पान के अलावा डॉक्टरी व अन्य प्रकार की सभी सुविधाएं दिल्ली सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा पहली बार पूजा के वक्त उन पर पुष्प वर्षा भी कराई जाएगी, शायद योगी द्वारा कांवडिय़ों पर की जाने वाली पुष्प वर्षा की तर्ज पर।
कहां हैं रेलमंत्री की 12000 स्पेशल ट्रेनें झूठ बोलने में माहिर मोदी के चेले एवं रेल मंत्री अश्वनी वैशनव ने झूठ बोलने का नया रेकॉर्ड कायम करते हुए घोषणा करी कि बिहार के लिए 12000 स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। यदि ये ट्रेनें वास्तव में ही चल रही हैं तो हरियाणा सरकार को बसें चलाने की क्या जरुरत थी? तमाम रेलवे एवं बस स्टेशनों पर बिहार जाने वाले यात्रियों की अथाह भीड़ अभी तक कैसे कायम हैं? थोड़ा सा भी गणित जानने वाले लोग आसानी से समझ सकते हैं कि 12000 ट्रेनों से लाखों नहीं करोड़ों यात्रियों को सुविधा पूर्वक गंतव्य तक पहुंचाया जा सकता है। यदि ये ट्रेनें वास्तव में ही चल रही होगी तो बिहार के यात्रियों को रेल बोगियों में भूसे की तहर ठूंस-ठूंस कर न ढ़ोया जाता।