फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ग्रेप 1, 2, 3, 4, लगाने के बावजूद भी वायु प्रदूषण में किसी प्रकार की कोई कमी न हो पाई तो अब बीते तीन-चार सप्ताह से स्वीपिंग मशीनों द्वारा सड़कें साफ करने का ढ़ोल पीटा जा रहा है। वैसे इन मशीनों का चर्चा व खर्चा बीते कई वर्षों से चल रहा है। इस पर करोड़ों रुपए नगर निगम खर्च कर चुका है। वह बात अलग है कि खर्चा सफाई पर किया गया है अथवा विभिन्न राजनेताओं, अफसरों तथा ठेकेदारों द्वारा डकारा गया है। करीब दो सप्ताह पूर्व स्थानीय विधायक एवं मंत्री विपुल गोयल द्वारा अपने सेक्टर 16 स्थित कार्यालय से ऐसी ही कुछ मशीनों को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया गया था। उनका न तो कोई परिणाम आना था और न ही आया क्योंकि यह सब नकली ड्रामेबाजी थी और आगे भी चलती रहेगी। इनका लक्ष्य केवल जनता को भ्रमित करना और जनता के पैसे से लूट कमाई करना है।
अभी हाल ही में फिर से सरकार द्वारा घोषणा की जा रही है कि ऐसी ही और मशीने लाकर सड़कों की सफाई की जाएगी। यह भी दावा किया गया है कि 19 सड़कें बिल्कुल साफ कर दी गई हैं लेकिन यह नहीं बताया गया कि वह कौन सी सड़कें हैं और शहर में कुल कितनी सड़कें हैं। दरअसल सड़कों की गिनती करना इसलिए भी सम्भव नहीं है कि इनके साइज यानी लम्बाई-चौड़ाई एक जैसी नहंी होती। इसलिए शहर भर की तमाम सड़कों की कुल लम्बाई को ही आधार मान कर बताया जाना चाहिए कि किस क्षेत्र के कितने किलो मीटर की सड़कें साफ कर दी गई हैं ताकि उन्हें देख कर नगर निगम की कार करदगी को समझा जा सके। फिलहाल पूरे शहर में ऐसी कोई सड़क नजर नहंी आती जिसे पूर्णतया धूल-मिट्टी रहित साफ सुथरी कहा जा सके। ‘मज़दूर मोर्चा’ पहले भी कई बार लिख चुका है कि सफाई की ये आधुनिक मशीनें केवल वहीं कामयाब हो सकती हैं जहां सड़कों में गड्ढे न हों तथा किनारों पर रेत मिट्टी न पड़ी हो। ये मशीनें झाड़ू द्वारा सफाई करने का विकल्प होती हैं क्योंकि इनके द्वारा सफाई करने पर धूल नहंी उड़ती जबकि झाड़ू लगाने से धूल उड़ती है। आज भी शहर में सैंकड़ों स्थानों पर हजारों स्वीपर झाड़ू लगाते देखे जा सकते हैं। इसी तरह शहर में एक भी सड़क ऐसी नहीं है जिसके किनारे रेत-मिट्टी न पड़ी हो जो वाहनों के चलने से उड़ती है।
निर्माणाधीन इमारतों में इस्तेमाल होने वाला रेत-बालू इत्यादि सब कुछ खुले में पड़ा रहता है जो हवा में उड़ता है। इस पर रोक-थाम के बावजूद कोई नियंत्रण नहीं है। जाहिर है यह सब प्रशासनिक काहिली एवं भ्रष्टाचार की बदौलत हो रहा है। इसी तरह कूड़े तथा औद्योगिक कचरे को जलाने पर भी कोई रोक नजर नहीं आती, सब कुछ यथावत जारी है। बिजली सप्लाई में कटौतियों के चलते डीजल-जनरेटरों के चलने से लगातार प्रदूषण बढ रहा है। सड़कों पर लगने वाले जाम से हो रहे प्रदूषण को आसानी से घटाया जा सकता है यदि यातायात व्यवस्था को सुचारु कर लिया जाय। परन्तु ये सब बातें कहने-सुनने तक ही सीमित हंै इसलिए प्रदूषण से लगातार जनता का दम घुट रहा है।